टिपरा मोथा प्रमुख प्रद्योत देबबर्मा ने अगले महीने के बाद सक्रिय राजनीति से हटने की घोषणा की | IBC24

Published on 6 अक्टू॰ 2026

अगरतला, छह अक्टूबर (भाषा) टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने मंगलवार को घोषणा की कि वह स्वास्थ्य कारणों से अगले महीने के बाद सक्रिय राजनीति से बाहर हो जाएंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह टिपरासा लोगों के ‘‘सजग प्रहरी’’ बने रहेंगे और जब भी उनके साथ अन्याय होगा, उसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) की 587 ग्राम समितियों के चुनाव में राजग ने 4,594 में से 4,320 सीटों पर जीत दर्ज की है। इनमें अकेले टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने 4,328 सीटें जीती हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 859 सीट पर जीत हासिल की, जबकि उसकी सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने 33 सीटें जीतीं।

इससे पहले दिन में उन्होंने कहा कि केंद्र को त्रिपुरा के मूल निवासियों से किए गए अपने वादे का ‘‘सम्मान’’ करना चाहिए और टिपरासा समझौते को लागू करना शुरू करना चाहिए। टिपरा मोथा पार्टी ने मार्च 2024 में मूल निवासियों के समग्र विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

देबबर्मा ने कहा, ‘‘दिल्ली में हुई एक बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री माणिक साहा की मौजूदगी में हमें आश्वासन दिया था कि दुर्गा पूजा के बाद टिपरासा समझौते को लागू करना शुरू किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि केंद्र जनजातीय क्षेत्रों के लोगों से किए गए वादे को पूरा करेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर किए गए वादे को पूरा नहीं किया गया, तो मैं 2028 के विधानसभा चुनाव में दोबारा लोगों के बीच कैसे जा सकता हूं? अपनी वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए समझौते को लागू किए जाने का लोग लंबे समय से धैर्यपूर्वक इंतजार कर रहे हैं।’’

उन्होंने बाद में सोशल मीडिया मंच 'फेसबुक' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैं अगले महीने के बाद सक्रिय राजनीति में नहीं रहूंगा। मेरे पिता महाराजा किरीट बिक्रम माणिक्य बहादुर कहा करते थे कि जब आप शीर्ष पर हों, तब विदा हो जाएं, नीचे जाते समय नहीं। राजनीति में शामिल होने का मेरा कोई इरादा नहीं था, लेकिन मुझे लगा कि अपने टिपरासा लोगों के लिए संघर्ष करना जरूरी है, इसलिए मैं राजनीति में आया।’’

देबबर्मा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अगले महीने एक बड़ी रैली आयोजित करने और सभी ग्राम समितियों के अध्यक्षों को आमंत्रित करने का आह्वान किया, ताकि वह एक राजनीतिक मंच से आखिरी बार उन्हें संबोधित कर सकें।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि अगले महीने के बाद मेरी राजनीतिक यात्रा समाप्त हो जाएगी, लेकिन मैं सजग प्रहरी के रूप में टिपरासा लोगों के साथ बना रहूंगा और जब भी उनके साथ कोई अन्याय होगा, तब आवाज उठाऊंगा। मैं पार्टी से यह भी अपील करता हूं कि ग्राम समिति चुनाव में मिली जीत का जश्न न मनाए, क्योंकि संवैधानिक अधिकार अभी हासिल किए जाने बाकी हैं।’’

उन्होंने ग्राम समिति चुनाव में टिपरा मोथा पार्टी की जीत के लिए लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा, ‘‘अब वे अपने गांवों में सत्ता का आनंद ले सकेंगे, जो निर्वाचित निकायों के अभाव में पिछले 10 वर्षों से संभव नहीं हो पाया था।’’

देबबर्मा ने कहा कि उन्होंने ग्राम समिति चुनाव कराने का मुद्दा त्रिपुरा उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया और बाद में उच्चतम न्यायालय का रुख किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उच्चतम न्यायालय का बहुत आभारी हूं, जिसने राज्य निर्वाचन आयोग को ग्राम समिति चुनाव कराने का निर्देश दिया। आखिरकार 10 साल बाद ये चुनाव हो सके हैं।’’

टिपरा मोथा पार्टी के संस्थापक ने कहा कि अब टिपरासा समझौते को लागू करना शुरू करने का समय आ गया है और जनजातीय परिषद के मूल निवासियों से केंद्र द्वारा किए गए वादे को पूरा किया जाना चाहिए।

भाषा तान्या दिलीप

दिलीप

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