नयी दिल्ली, छह अक्टूबर (भाषा) देश के विनिर्माण क्षेत्र में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान धारणा में सुधार हुआ और कंपनियों के उत्पादन तथा क्षमता उपयोग में बढ़ोतरी दर्ज की गई। उद्योग मंडल फिक्की के एक सर्वेक्षण में मंगलवार को यह जानकारी दी गई।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 95 प्रतिशत विनिर्माताओं ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में उत्पादन का स्तर अप्रैल-जून तिमाही के मुकाबले अधिक या समान रहने की जानकारी दी।
इस सर्वेक्षण में करीब 225 कंपनियों को शामिल किया गया। इनमें वाहन एवं वाहन कलपुर्जा, पूंजीगत उत्पाद, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं बिजली के सामान, कांच, मशीन उपकरण, धातु एवं धातु उत्पाद, कपड़ा एवं परिधान सहित नौ प्रमुख क्षेत्रों की कंपनियां शामिल थीं।
सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 77 प्रतिशत कंपनियों ने उत्पादन का स्तर अधिक या समान रहने की जानकारी दी थी। दूसरी तिमाही में यह अनुपात बढ़कर करीब 95 प्रतिशत हो गया। फिक्की ने कहा कि यह पश्चिम एशिया संकट से उबरने के संकेतों के बीच उत्पादन धारणा में सुधार को दर्शाता है।
बीती तिमाही में मांग के मोर्चे पर भी सुधार देखा गया। इस दौरान 90 प्रतिशत कंपनियों ने ऑर्डर का स्तर अधिक या समान रहने की जानकारी दी, जबकि जून तिमाही में यह अनुपात 77 प्रतिशत था।
विनिर्माण क्षेत्र में औसत क्षमता उपयोग भी पहली तिमाही के 72 प्रतिशत से बढ़कर करीब 75 प्रतिशत हो गया।
सर्वेक्षण में अगले छह महीनों के लिए निवेश की धारणा स्थिर रहने की बात कही गई है।
हालांकि, कंपनियों के सामने क्षमता विस्तार में मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति से जुड़ी अनिश्चितता, शुल्क एवं व्यापार प्रतिबंध, मांग को लेकर अनिश्चितता, कुशल श्रम की उपलब्धता, कच्चे माल की कमी, बढ़ती लॉजिस्टिक लागत और नियामकीय चुनौतियां प्रमुख बाधाएं हैं।
सितंबर तिमाही में निर्यात के मोर्चे पर भी सुधार हुआ है। करीब 80 प्रतिशत कंपनियों ने निर्यात का स्तर पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले अधिक या समान रहने की जानकारी दी, जबकि पहली तिमाही में यह अनुपात 74 प्रतिशत था। फिक्की ने कहा कि सरकार और उद्योग के निर्यात में विविधता लाने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं।
रोजगार के मोर्चे पर करीब 43 प्रतिशत कंपनियों ने अगले तीन महीनों में अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की योजना बनाई है। पहली तिमाही में ऐसा कहने वाली कंपनियों का अनुपात 35 प्रतिशत था।
हालांकि, विनिर्माताओं पर उत्पादन लागत का दबाव बढ़ा है। करीब 83 प्रतिशत कंपनियों ने बिक्री के प्रतिशत के रूप में उत्पादन लागत बढ़ने की जानकारी दी, जबकि जून तिमाही में यह अनुपात 79 प्रतिशत था।
दूसरी तिमाही में विनिर्माताओं द्वारा चुकाई गई औसत ब्याज दर 9.1 प्रतिशत रही, जो पहली तिमाही में 8.9 प्रतिशत थी। हालांकि, 90 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उन्हें कार्यशील पूंजी या दीर्घावधि पूंजी के लिए बैंकों से पर्याप्त धन उपलब्ध है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, श्रम की उपलब्धता को लेकर 67 प्रतिशत कंपनियों ने कोई समस्या न होने की बात कही है जबकि 33 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि अपने क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की कमी है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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Web Title: दूसरी तिमाही में देश के विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों की धारणा में सुधारः फिक्की सर्वेक्षण