इंदौर में पहली बार इस्तेमाल हो रहे साइंटिफिक रोलर, इंग्लैंड की रिसर्च से तैयार होगी भारत-वेस्टइंडीज मैच की पिच

Published on 5 अक्टू॰ 2026

इंदौर के होल्कर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को होने वाले भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 मुकाबले की तैयारियां अब आधुनिक तकनीक के साथ की जा रही हैं। मैच के लिए पिच तैयार करने में पहली बार खास तरह के साइंटिफिक रोलर का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिच तैयार करने की प्रक्रिया में इंग्लैंड की रिसर्च को आधार बनाया जा रहा है। इसके तहत पिच की मिट्टी, नमी, घास की जड़ों और गेंद के उछाल जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर रोलिंग की जाएगी।

200, 500 और 750 किलो के रोलर आए

होल्कर स्टेडियम में इस बार 200, 500 और 750 किलोग्राम वजन वाले तीन आधुनिक रोलर उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें चेन्नई से इंदौर लाया गया है। बीसीसीआई के निर्देश पर इन रोलर की व्यवस्था की गई है। पुराने मैनुअल रोलर की तुलना में ये आकार और तकनीक के लिहाज से अलग हैं।

ग्राउंड स्टाफ मौसम और पिच में मौजूद नमी की स्थिति को देखते हुए तय करेगा कि किस समय किस वजन के रोलर का इस्तेमाल करना है। इसका उद्देश्य पिच की सतह को संतुलित रखना और मैच के दौरान बेहतर एवं नियंत्रित उछाल सुनिश्चित करना है।

सिर्फ भारी रोलर चलाने की सोच से आगे बढ़ी तैयारी

क्रिकेट में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि भारी रोलर चलाने से पिच ज्यादा सख्त होती है और बल्लेबाजों को फायदा मिल सकता है। हालांकि आधुनिक पिच साइंस में केवल रोलर का वजन ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता। मिट्टी में मौजूद नमी और पिच की बनावट के साथ रोलिंग का सही तालमेल भी जरूरी है।

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड और क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोध में पिच की नमी, मिट्टी और रोलर के दबाव के बीच संबंध का अध्ययन किया गया है। इसी तरह के वैज्ञानिक आकलन को ध्यान में रखते हुए इंदौर की पिच तैयार की जा रही है।

नमी और मौसम के हिसाब से होगा रोलर का इस्तेमाल

पिच की स्थिति पर मौसम का सीधा असर पड़ता है। ऐसे में ग्राउंड विशेषज्ञ तापमान, नमी और सतह की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रोलर का चुनाव करेंगे। जरूरत के मुताबिक अलग-अलग वजन वाले रोलर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

होल्कर स्टेडियम में भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले के लिए काली मिट्टी की पिच तैयार की जा रही है। इससे पहले बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर ने मैदान और पिच की तैयारियों का निरीक्षण भी किया था।

मैच में पिच का मिजाज रहेगा अहम

टी-20 क्रिकेट में पिच का मिजाज मैच के नतीजे पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है। इसी वजह से पिच को तैयार करने के दौरान गेंद के उछाल और सतह के व्यवहार को लेकर खास सावधानी बरती जा रही है। वैज्ञानिक तरीके से रोलिंग करने का मकसद ऐसी सतह तैयार करना है, जिस पर पूरे मुकाबले के दौरान परिस्थितियां अपेक्षाकृत संतुलित रहें।

इंदौर में पहली बार इन आधुनिक रोलर के इस्तेमाल से पिच तैयार करने का तरीका भी खास चर्चा में है। अब 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच मुकाबले के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई होल्कर की पिच खिलाड़ियों के प्रदर्शन और मैच के रोमांच पर किस तरह असर डालती है।