दिनभर रील्स देखने की लत और फोन छीनने पर गुस्सा? ऐसे कम करें बच्चों का स्क्रीन टाइम
Updated: Sat, 26 Sep 2026 05:46 PM (IST)
रील्स स्क्रॉल करता बच्चा और चिंतित मां की सांकेतिक तस्वीर (AI Generated)
Screen Time Addiction: बच्चे का मोबाइल देखने का समय कैसे कम करें? जानिए स्क्रीन टाइम की आदत से बच्चों को दूर रखने के तरीके.
Screen Time Addiction: पहले बच्चे छुपन-छुपाई, लूडो, कैरम जैसे खेल खेलते थे. इसके अलावा बच्चे दोस्तों के साथ बाहर जाकर क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन जैसे गेम्स भी खेलते थे. लेकिन आजकल के पेरेंट्स की यह शिकायत रहती है कि उनका बच्चा दिनभर मोबाइल में घुसा रहता है. वह न तो कोई इंटरेस्टिंग टॉपिक देखता है, बल्कि दिनभर रील्स देखकर अपना टाइम बर्बाद करता है. अगर बच्चे से मोबाइल छीन लो तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अचानक बच्चे के हाथ से मोबाइल छीनने पर उनका गुस्सा होना डोपामिन लूप और स्क्रीन की लत की ओर साफ इशारा करता है.
डिजिटल दुनिया बच्चे को कर रही कंट्रोल
शोध बताते हैं कि लगातार मोबाइल देखने से अगर बच्चे को खुशी और अच्छा महसूस होने लगता है, तो इससे दिमाग में डोपामाइन नाम का हॉर्मोन बनता है. यह प्रक्रिया फोन छीनने से टूट जाती है, इस वजह से बच्चे को बेचैनी, निराशा और गुस्सा आता है. ऐसे में कहीं न कहीं डिजिटल दुनिया बच्चे को कंट्रोल कर रही होती है. इसलिए कभी भी बच्चे के हाथ से जबरदस्ती फोन न छीनें. बच्चे को 10 मिनट पहले बता दें कि अब वह फोन रखकर अपनी पढ़ाई शुरू करें या फिर उसे कोई दूसरा काम दें. इससे बच्चे को अचानक फोन बंद करने का दबाव महसूस नहीं होगा और वह धीरे-धीरे अपनी आदत बदल सकेगा.
स्क्रीन टाइम सीमित करें और आउटडोर गेम्स से जोड़ें
बच्चे को मोबाइल की जगह आउटडोर गेम्स, ड्राइंग या फिर किसी और क्रिएटिव काम में व्यस्त रखें. दिनभर में स्क्रीन टाइम समय निश्चित कर दें, एक घंटा स्क्रीन टाइम किसी भी बच्चे के लिए काफी है. बच्चे को पार्क में खेलने, साइकिल चलाने या दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए भी प्रोत्साहित करें. इससे उसकी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव आएगा और वह मोबाइल से दूर रह सकेगा.
डांटने के बजाय समझें बच्चे की 'मन की बात'
अक्सर पेरेंट्स अपने बिजी शेड्यूल में यहां तक भूल जाते हैं कि क्या उन्होंने आज अपने बच्चे से ठीक से बातचीत की है. उसके स्कूल में क्या चल रहा है, वह किन चीजों को लेकर परेशान है, यह भी पता नहीं होता है. इसलिए बच्चे को डांटने से पहले खुद से जरूर सोचें, उनसे बातचीत करें एवं उनकी प्रॉब्लम्स को समझें. इससे खुद-ब-खुद कई बातें सामने आएंगी, जिनका समाधान करने की जरूरत होगी. इससे बच्चे को सपोर्ट मिलेगा और वह फोन की जगह आपसे बातें शेयर करने में ज्यादा समय देगा, जिससे उसका स्क्रीन टाइम काफी हद तक कम होगा.
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