जमुई के मड़वा पहाड़ी पर नाबालिग छात्रा से बदसलूकी के मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद अब जिला प्रशासन ने न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. प्रशासन ने स्पीडी ट्रायल से जुड़ी आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को 15 से 20 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए उप विकास आयुक्त IAS चौधरी शिप्रा विजयकुमार और SDPO IPS दीप्ति मोनाली को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है.
पुलिस जांच और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी
जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने संयुक्त रूप से मामले में अब तक हुई कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया की जानकारी दी. बताया कि प्रशासन की कोशिश है कि जांच से संबंधित जरूरी प्रक्रिया पूरी कर मामले को अदालत में तेजी से आगे बढ़ाया जाए.
दीप्ति मोनाली पहले से ही मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व कर रही हैं. अब स्पीडी ट्रायल से जुड़ी प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी. वहीं डीडीसी चौधरी शिप्रा विजयकुमार को प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की जिम्मेदारी दी गयी है. इस तरह पुलिस जांच और प्रशासनिक समन्वय, दोनों स्तरों पर जिम्मेदारी तय की गयी है.
कौन हैं IAS चौधरी शिप्रा और IPS दीप्ति मोनाली
चौधरी शिप्रा विजयकुमार वर्तमान में जमुई की उप विकास आयुक्त सह जिला परिषद की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हैं. उन्हें स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया में प्रशासनिक समन्वय के लिए नोडल पदाधिकारी बनाया गया है और हाल में जमुई में पदस्थापित हुई हैं.
दीप्ति मोनाली जमुई में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के पद पर तैनात हैं. वह मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व कर रही हैं. स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया में उनकी जिम्मेदारी पुलिस जांच से संबंधित आवश्यक समन्वय और कार्रवाई को आगे बढ़ाने की होगी.
मुख्य आरोपित गिरफ्तार, अब अदालत की प्रक्रिया पर फोकस
मामले में मुख्य आरोपित नंदन यादव, हरेराम यादव व मिथिलेश चौधरी की गिरफ्तारी हो चुकी है. प्रशासन का फोकस अब जांच से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर मामले को न्यायालय में तेजी से आगे बढ़ाने पर है. अधिकारियों ने 15 से 20 दिनों के भीतर स्पीडी ट्रायल से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है.
पुलिस के अनुसार मामले में एक अन्य संदिग्ध की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया भी जारी है. सत्यापन के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
अब प्रशासन और पुलिस की निगाहें जांच को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने, जरूरी दस्तावेज तैयार करने और न्यायालय के साथ समन्वय स्थापित करने पर हैं. इस संवेदनशील मामले में दो महिला अधिकारियों को नोडल जिम्मेदारी दिए जाने के बाद स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ी है.