विधानसभा चुनाव से पहले इस राज्य में पूर्व सीएम ने भाजपा की कार्यशैली पर उठाए सवाल, कांग्रेस में शामिल होने पर दिया ये जवाब

Published on 25 सित॰ 2026

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज होती जा रही है. इसी बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाकर नई बहस छेड़ दी है. जिसके बाद उनकी कांग्रेस में वापसी की अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है. एक अखबार को इंटरव्यू देते हुए पूर्व सीएम ने कई सवालों पर बेबाकी से जवाब दिए. 

Captain Amarinder Singh को लेकर पूरा विवाद शुरू कहां से हुआ?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पंजाब भाजपा में हाल ही में हुए एक बड़े संगठनात्मक बदलाव से यह विवाद जुड़ा है. बीते महीनों में पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों को राज्य का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था, जिन्होंने सुनील जाखड़ की जगह ली है. बता दें जाखड़ को पार्टी का एक प्रमुख हिंदू चेहरा माना जाता था और उनकी जगह हुई इस नियुक्ति ने ही आगे चलकर विवाद की नींव रख दी.

कैप्टन अमरिंदर सिंह की नाराजगी की असली वजह क्या है?

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया. एक ऐसे नेता के लिए जो खुद पंजाब का मुख्यमंत्री रह चुका है और अपने फैसलों को लेकर हमेशा दृढ़ रहा है यह बात किसी अपमान से कम नहीं है. बता दें यही वजह है कि उन्होंने पार्टी की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाना शुरू कर दिया. 

इस नाराजगी के बाद कैप्टन ने क्या कदम उठाया?

पार्टी सूत्रों की मानें तो अपनी नाराजगी जाहिर करने के कुछ समय बाद ही कैप्टन अमरिंदर सिंह दिल्ली पहुंचे. जहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की. इस मुलाकात में पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भेंट सिर्फ औपचारिक नहीं थी बल्कि इसके पीछे उनकी नाराजगी को शांत करने की कोशिश भी छिपी थी.

क्या कैप्टन ने कांग्रेस को लेकर भी कुछ कहा है?

भाजपा में रहते हुए भी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुलेआम कहा कि वे आज भी कांग्रेस को याद करते हैं. उनका कहना था कि कांग्रेस उनके लिए किसी परिवार जैसी रही है और जब भी उन्होंने वहां के नेताओं को फोन किया वे हमेशा उनसे मिलते और बात करते रहे. यह बयान भाजपा में रहते हुए किसी वरिष्ठ नेता की तरफ से आना अपने आप में असामान्य माना जा रहा है.

I have gained nothing by joining BJP, it has never consulted me on Punjab: @capt_amarinderhttps://t.co/edNsSlACzG@thetribunechd@jomalhotra@BJP4India@RahulGandhi@BhagwantMannpic.twitter.com/iVKHbSAtdP

— jupinderjit singh (@japs99) September 25, 2026

तो क्या कैप्टन कांग्रेस में वापसी करने वाले हैं?

फिलहाल कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस में औपचारिक वापसी को लेकर कोई सीधी घोषणा नहीं की है. लेकिन उनके हालिया बयानों और भाजपा नेतृत्व के प्रति बढ़ती नाराजगी को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वे आने वाले समय में अपनी पुरानी पार्टी में वापसी कर सकते हैं. कैप्टन में अपने इंटरव्यू में साफ कहा है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी अपनी मर्जी से नहीं छोड़ी थी बल्कि उन्हें ऐसा करने के लिए कहा गया था. वहीं, वापसी को लेकर उनका कहना है कि पिछले कई साल से उनकी पार्टी नेतृत्व से कोई बात नहीं हुई है. आगे उन्होंने ये भी कहा कि बीजेपी में बने रहने के अलावा उनके पास विकल्प ही क्या हैं, वे आकाली में जाएंगे नहीं.

कैप्टन अमरिंदर सिंह का सियासी सफर कैसा रहा है?

कैप्टन अमरिंदर सिंह का सियासी करियर पांच दशकों से भी ज्यादा लंबा रहा है. वे करीब 50 साल तक कांग्रेस के साथ जुड़े रहे और दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री भी बने. 2021 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाई थी, जिसका बाद में उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर लिया था. ऐसे में उनकी कांग्रेस को लेकर यह ताजा टिप्पणियां उनके अब तक के सियासी सफर को देखते हुए और भी दिलचस्प हो जाती हैं.

Met Union Minister of Health and Family Welfare Shri J.P. Nadda Ji in New Delhi today and discussed various issues concerning Punjab.@JPNaddapic.twitter.com/WLWADBq4rV

— Capt.Amarinder Singh (@capt_amarinder) June 6, 2026

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह वाकई कांग्रेस में वापसी करते हैं तो इसका सीधा असर पंजाब भाजपा की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है. खासकर हिंदू और शहरी मतदाताओं के बीच जहां कैप्टन की अब भी अच्छी पकड़ मानी जाती है. वहीं, दूसरी तरफ अगर वे भाजपा में ही बने रहते हैं तो पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी को दूर करना नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.

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