‘मेरा एनकाउंटर किया जा सकता है’, सोनम वांगचुक ने क्यों कही ये बात? अमित शाह का नाम लेकर भी बड़ा दावा

Published on 25 सित॰ 2026

‘मेरा एनकाउंटर किया जा सकता है’, सोनम वांगचुक ने क्यों कही ये बात? अमित शाह का नाम लेकर भी बड़ा दावा

Time Published: Friday, September 25, 2026, 10:57 [IST]

Sonam Wangchuk Latest News: लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी पर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपने लिए जान का खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ बोलने की वजह से उन्हें एनकाउंटर में मारा जा सकता है।

इसी कार्यक्रम में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी की। सोनम वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 की लेह हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग उठाई।

Sonam Wangchuk Encounter

'जेल भेजा गया, अब एनकाउंटर का डर', वांगचुक ने ऐसा क्यों कहा?

सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें पहले भी जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। उनका दावा है कि कुछ लोग उन्हें चेतावनी देते हैं कि उन्हें मुठभेड़ में मारा जा सकता है। उन्होंने कहा,

"मुझे जेल में डाला गया। अब यह डर भी है कि कहीं मुझे किसी मुठभेड़ में न मार दिया जाए। लोग कहते हैं कि मेरा एनकाउंटर कर दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो होने दें, शायद इससे देश जाग जाए।"

यह बयान उन्होंने 24 सितंबर 2025 की लेह हिंसा की पहली बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में दिया। उस हिंसा के दौरान लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। सरकारी जांच के लिए बाद में न्यायिक आयोग बनाया गया था।

अमित शाह के इस्तीफे की मांग क्यों उठाई?

सोनम वांगचुक ने पिछले साल की हिंसा में हुई मौतों की राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा,

"आज लद्दाख से मैं कह रहा हूं कि अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए। लद्दाख में जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी होगी।"

वांगचुक का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने स्थानीय युवाओं पर एके-47 जैसे स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया और बाद में इन्हीं युवाओं को राष्ट्र-विरोधी बताया गया।

हालांकि ये सोनम वांगचुक के आरोप हैं। पिछले साल की घटना की जांच के लिए केंद्र ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनाया था। आयोग को हिंसा, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत की परिस्थितियों की जांच करनी थी।

उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में 24 सितंबर की रात लिखा,

''अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए...आज लद्दाख में बिना हथियार वाले नौजवानों पर AK 47 से अंधाधुंध फायरिंग की पहली बरसी मनाई गई, जिसमें 4+1 लोग मारे गए, 80+ घायल हुए और 80+ के खिलाफ FIR दर्ज की गई। यह सब बिना किसी फायरिंग ऑर्डर के हुआ। एक साल बाद भी, ज्यूडिशियल इन्क्वायरी कमीशन की रिपोर्ट दबा दी गई है और मरने वालों के लिए 15 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों के लिए 3 लाख रुपये का मामूली मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। लद्दाख के नौजवान हमेशा सभी लड़ाइयों में देश के लिए खड़े रहे हैं, अब समय आ गया है कि देश उनके लिए खड़ा हो। जय हिंद।''

राहुल गांधी का समर्थन, फिर उन्हीं से सवाल

सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी की अमित शाह के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। लेकिन साथ ही उन्होंने लद्दाख की घटना पर राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर सवाल भी उठाया।

उन्होंने कहा,

"राहुल गांधी ने छात्रों पर ऐसे हथियारों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया और अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। मैं इसका समर्थन करता हूं। लेकिन लद्दाख में जो हुआ, उस पर सवाल क्यों नहीं उठाया गया? यहां एके-47 के इस्तेमाल का आरोप है और लोगों की जान गई।"

न्यायिक जांच रिपोर्ट कहां है? वांगचुक ने दी 'पीपुल्स ट्रिब्यूनल' की चेतावनी

सोनम वांगचुक की दूसरी बड़ी मांग न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की है। उन्होंने कहा कि अगर रिपोर्ट सामने नहीं आती है तो पुलिस फायरिंग की जांच के लिए स्वतंत्र 'पीपुल्स ट्रिब्यूनल' बनाया जाएगा। केंद्र ने अक्टूबर 2025 में न्यायिक जांच के लिए जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में आयोग बनाया था।

सोनम वांगचुक इस पूरे विवाद को लद्दाख की पुरानी मांगों से भी जोड़ रहे हैं। इनमें राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा शामिल है। उनका आरोप है कि लोगों से किए गए वादे बाद में पूरे नहीं हुए।

लेह-कारगिल बंद, कार्यक्रम में कम भीड़ क्यों पहुंची?

24 सितंबर को हिंसा की पहली बरसी पर लेह, कारगिल और लद्दाख के कुछ दूसरे हिस्सों में बंद रहा। दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर भी सामान्य दिनों के मुकाबले कम आवाजाही दिखी। कुछ लोगों ने इस दिन को शहीद दिवस के तौर पर मनाया।

वांगचुक ने आरोप लगाया कि भारी सुरक्षा और जगह-जगह बैरिकेड की वजह से बरसी के कार्यक्रम में कम लोग पहुंचे। उन्होंने कहा कि गांवों और रास्तों पर सशस्त्र जवान तैनात थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कम भीड़ को आंदोलन की हार नहीं माना जाना चाहिए।

लेकिन लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। पुलिस ने उन्हें झूठा, बेबुनियाद और भ्रामक बताया। पुलिस के मुताबिक, लेह के एनडीएस मैदान में सभा की अनुमति दी गई थी और किसी को कार्यक्रम में जाने से नहीं रोका गया। पुलिस ने बताया कि मैदान की क्षमता 10 हजार लोगों की है, जबकि कार्यक्रम में 800 से कम लोग पहुंचे। शहर में बैरिकेड ट्रैफिक और भीड़ संभालने के लिए लगाए गए थे।

'भारत को लोकतंत्र की वजह से चुना', वांगचुक ने क्या कहा?

सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख ने भारत के साथ रहना इसलिए चुना क्योंकि लोगों को यहां लोकतंत्र और सम्मान के साथ जीवन की उम्मीद थी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात ने लोगों में डर पैदा किया है। उन्होंने कहा, "एक तरफ चीन था और दूसरी तरफ भारत। लद्दाख ने भारत को इसलिए चुना क्योंकि हमें भरोसा था कि यहां लोकतंत्र है और हम सम्मान के साथ रह सकेंगे।" वांगचुक ने 2014 से 2019 के बीच देश के हालात को बेहतर बताते हुए मौजूदा केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए।

इस पूरे मामले में अब दो बातें साथ-साथ सामने हैं। वांगचुक न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस कार्यक्रमों में रोक-टोक के उनके आरोपों को खारिज कर रही है। ऐसे में 2025 की हिंसा की न्यायिक जांच का निष्कर्ष इस विवाद में सबसे अहम दस्तावेज बना हुआ है।