आगरा में मेट्रो रेल परियोजना के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने एक और बेहद अहम मील का पत्थर पार कर लिया है। गुरुवार को ताजनगरी में आगरा मेट्रो के दूसरे डिपो के निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ किया गया। शहर के फूल सैयद चौराहे के नजदीक प्रस्तावित इस नए डिपो के बन जाने से आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के सुचारू संचालन, ट्रेनों की देखरेख और ओवरऑल परिचालन व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिलने की पूरी संभावना है।
इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य की शुरुआत के अवसर पर आगरा मेट्रो के परियोजना निदेशक अरविंद राय समेत यूपीएमआरसी के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियर और अन्य कर्मचारी पूरी तन्मयता के साथ मौजूद रहे। डिपो निर्माण से जुड़े शुरुआती कार्यों का श्रीगणेश कराते हुए अधिकारियों ने इस पूरी परियोजना की प्रगति की बारीकी से समीक्षा भी की।
पुरानी मंडी डिपो से पहले से संचालित हो रही है मेट्रो
गौरतलब है कि आगरा मेट्रो का पहला डिपो पुरानी मंडी स्थित 15वीं वाहिनी पीएसी परिसर के भीतर स्थापित किया गया है, जो वर्तमान समय में पूरी तरह फंक्शनल और ऑपरेशनल है। इसी मुख्य डिपो के जरिए प्राथमिक सेक्शन पर मेट्रो ट्रेनों का सफलतापूर्वक संचालन सुचारू रूप से किया जा रहा है। अब जबकि फूल सैयद चौराहे के पास दूसरे नए डिपो का काम भी धरातल पर उतर चुका है, तो इससे आगरा मेट्रो के आगामी विस्तार को एक नई और तेज गति मिलने जा रही है।
यूपीएमआरसी के मुताबिक, इस दूसरे डिपो के निर्माण के साथ-साथ कॉरिडोर-2 के विभिन्न स्टेशनों के निर्माण कार्यों में भी तेजी लाई जा रही है। इसके साथ ही, कॉरिडोर-1 के बचे हुए भूमिगत (अंडरग्राउंड) हिस्से में भी बहुत जल्द मेट्रो सेवाओं के विस्तार की योजना पर काम चल रहा है।
दोनों डिपो के बीच स्थापित किया जाएगा विशेष कनेक्शन
इस आगामी दूसरे डिपो की सबसे अनूठी और तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे पहले डिपो के बेहद करीब विकसित किया जा रहा है और दोनों डिपो को आपस में जोड़ने का प्लान तैयार किया गया है। इस इंटरकनेक्शन से आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के बीच ट्रेनों की आपसी आवाजाही और दैनिक परिचालन प्रबंधन बहुत ज्यादा आसान और सुगम हो जाएगा। शुरुआत में इस दूसरे डिपो को कालिंदी विहार क्षेत्र में बनाए जाने का विचार था। यदि डिपो उस स्थान पर बनाया जाता, तो दोनों कॉरिडोर के ट्रेन ऑपरेशंस में आपसी तालमेल बिठाने के लिए एक अलग से जटिल व्यवस्था करनी पड़ती। इसके अलावा, ट्रेनों के रखरखाव (मेंटेनेंस) के वास्ते अलग-अलग स्थानों पर तमाम संसाधन और भारी मशीनरी जुटाने की आवश्यकता पड़ती, जिससे प्रोजेक्ट की ऑपरेशनल कॉस्ट और मेंटेनेंस का खर्च काफी बढ़ जाता।
एक ही सेटअप से हो सकेगा सभी 28 ट्रेनों का बेहतर उपयोग
आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के लिए कुल 28 आधुनिक मेट्रो ट्रेनें प्रस्तावित की गई हैं। यदि दोनों डिपो अलग-अलग जगहों पर होते, तो ट्रेनों का इस्तेमाल संबंधित कॉरिडोर तक ही सीमित रखने की मजबूरी पैदा हो सकती थी। पूर्व निर्धारित आंकड़ों के अनुसार, लगभग 16 ट्रेनें कॉरिडोर-2 और 12 ट्रेनें कॉरिडोर-1 के हिस्से में आनी थीं। लेकिन अब इन दोनों डिपो को आपस में लिंक करने की इस मास्टरप्लान योजना के कारण सभी 28 ट्रेनों को जरूरत के हिसाब से दोनों ही कॉरिडोर में बेझिझक इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे किसी भी रूट या कॉरिडोर पर यात्री दबाव या परिचालन आवश्यकता बढ़ने पर ट्रेनों की उपलब्धता का प्रबंधन बेहद शानदार तरीके से किया जा सकेगा।
रखरखाव होगा आसान और नियंत्रण में रहेगी लागत
दोनों डिपो को आपस में जोड़ने का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ ट्रेनों के रख-रखाव और तकनीकी मरम्मत से जुड़ा हुआ है। अगर दोनों कॉरिडोर के लिए अलग-अलग जगहों पर डिपो बनते, तो दोनों ही परिसरों में मेंटेनेंस से जुड़ी महंगी मशीनरी और अन्य साजो-सामान का दोहराव करना पड़ता, जिससे वित्तीय बोझ और अधिक बढ़ जाता। नए डिपो को पहले वाले डिपो के नजदीक स्थापित कर आपस में जोड़ने से तमाम मेंटेनेंस संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे न केवल पूरी परिचालन प्रणाली अत्यधिक लचीली बनेगी, बल्कि कुल लागत को नियंत्रित रखने में भी बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
कॉरिडोर-2 के निर्माण को मिलेगी अभूतपूर्व तेजी
इस नए डिपो के निर्माण का श्रीगणेश ऐसे समय में हुआ है जब आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 के स्टेशनों और ट्रैक से जुड़े अन्य निर्माण कार्यों को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। कॉरिडोर-2 के मुकम्मल होने से शहर के कई नए और घनी आबादी वाले हिस्से सीधे मेट्रो के आधुनिक नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, कॉरिडोर-1 के शेष भूमिगत सेक्शन में भी मेट्रो सेवाओं के विस्तार से जुड़ी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
यूपीएमआरसी का यह स्पष्ट लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से आगरा में मेट्रो सेवा का दायरा बढ़ाया जाए ताकि शहरवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को एक तीव्र, सुरक्षित और अत्याधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का लाभ मिल सके।
यूपीएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि दोनों डिपो को आपस में जोड़ने की यह अभिनव व्यवस्था आने वाले समय में ट्रेन संचालन और रखरखाव के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगी। इससे मेट्रो के दोनों कॉरिडोर को एकीकृत परिचालन व्यवस्था का जबरदस्त लाभ मिलेगा और आगरा में विश्वस्तरीय मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।