क्रॉपलाइफ इंडिया ने रैलिस इंडिया के डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला को चेयरमैन चुना

Published on 24 सित॰ 2026

बायर के राजवीर राठी और BASF के गिरिधर रणुवा वाइस चेयरमैन नियुक्त; खाद्य सुरक्षा, किसान आय और क्लाइमेट-रेजिलिएंट फार्मिंग पर जोर

24 सितंबर 2026, नई दिल्ली: क्रॉपलाइफ इंडिया ने रैलिस इंडिया के डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला को चेयरमैन चुना – क्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India) ने रैलिस इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला को अपने बोर्ड का नया चेयरमैन चुना है। वहीं, बायर क्रॉप साइंस के हेड ऑफ एग्रीकल्चरल अफेयर्स एंड पॉलिसी राजवीर राठी और BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस इंडिया के बिजनेस डायरेक्टर गिरिधर रणुवा को वाइस चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

इन नियुक्तियों की घोषणा नई दिल्ली में आयोजित क्रॉपलाइफ इंडिया की 46वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के दौरान की गई।

क्रॉपलाइफ इंडिया भारत में क्रॉप प्रोटेक्शन सेक्टर की 17 रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) आधारित कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला इंडस्ट्री एसोसिएशन है। संगठन के अनुसार, इसके सदस्य भारत के घरेलू क्रॉप प्रोटेक्शन मार्केट का लगभग 75 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं और देश में पेश किए गए क्रॉप प्रोटेक्शन मॉलिक्यूल्स में करीब 95 प्रतिशत से जुड़े हैं।

डॉ. शुक्ला अक्टूबर 2025 से क्रॉपलाइफ इंडिया के वाइस चेयरमैन के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्होंने क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के अंकुर अग्रवाल का स्थान लिया है, जिन्होंने 2024 से दो टर्म तक संगठन का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल के दौरान क्रॉपलाइफ इंडिया ने ड्राफ्ट पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 सहित विभिन्न रेगुलेटरी मुद्दों पर भारत सरकार के साथ संवाद किया।

बोर्ड ने आउटगोइंग वाइस चेयरमैन बायर क्रॉपसाइंस के मोहन बाबू बोप्पना के योगदान की भी सराहना की।

कृषि उद्योग का व्यापक अनुभव

डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला के पास क्रॉप प्रोटेक्शन और सीड्स सेक्टर में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने भारत के अलावा एशिया-पैसिफिक और अफ्रीका के बाजारों में भी काम किया है।

राजवीर राठी के पास रेगुलेटरी और गवर्नमेंट अफेयर्स में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वह क्रॉपलाइफ इंडिया की एडवोकेसी एंड कम्युनिकेशंस कमेटी की स्थापना के बाद से इसका नेतृत्व कर रहे हैं।

गिरिधर रणुवा के पास एग्रीकल्चर इंडस्ट्री में 23 वर्षों का अनुभव है, जिसमें BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस के साथ विभिन्न क्षेत्रों में 16 वर्ष का अनुभव शामिल है। वर्तमान में वह भारत में BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस के बिजनेस का नेतृत्व कर रहे हैं।

नए नेतृत्व ने एग्रीकल्चरल इनोवेशन, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, प्रोडक्ट स्टीवर्डशिप, क्लाइमेट रेजिलिएंस और किसानों तक नई तकनीकों की तेज पहुंच को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया है।

डॉ. शुक्ला ने कहा, “अगले दशक में भारत को लगभग उसी भूमि से काफी अधिक खाद्य उत्पादन करना होगा। इस अंतर को कम करने के लिए साइंस, इनोवेशन और बड़े पैमाने पर तेजी से एडॉप्शन की आवश्यकता होगी।”

उन्होंने कहा कि भारत को केवल भविष्य की एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी विकसित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ये टेक्नोलॉजी किसानों तक तेजी से पहुंचें।

डॉ. शुक्ला ने नए प्रोडक्ट्स के रजिस्ट्रेशन के लिए कंपनियों द्वारा तैयार किए जाने वाले सेफ्टी और एफिकेसी डेटा की सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, प्रस्तावित पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत करने का अवसर प्रदान कर सकता है।

क्रॉप प्रोटेक्शन में सेफ यूज और ट्रेसेबिलिटी पर जोर

राजवीर राठी ने कहा कि क्रॉपलाइफ इंडिया क्रॉप प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स के जिम्मेदार उपयोग और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल में प्रोडक्ट ट्रेसेबिलिटी को प्राथमिकता देना जारी रखेगा।

उन्होंने कहा, “फार्म पर सेफ यूज ही यह सुनिश्चित करता है कि प्लेट तक फूड सुरक्षित पहुंचे।”

राठी के अनुसार, किसानों को यह भरोसा होना चाहिए कि वे गांव के डीलर से खरीदें या मोबाइल ऐप के माध्यम से, उन्हें मिलने वाला क्रॉप प्रोटेक्शन प्रोडक्ट वास्तविक और फैक्ट्री से फार्म तक ट्रेसेबल है।

उन्होंने कहा कि साइंस और स्टीवर्डशिप संगठन के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और इसी आधार पर रेगुलेटर्स के साथ संवाद जारी रहेगा।

क्लाइमेट चेंज बदल रहा है पेस्ट मैनेजमेंट का परिदृश्य

गिरिधर रणुवा ने एग्रीकल्चर में क्लाइमेट चेंज के कारण पेस्ट प्रेशर में हो रहे बदलाव को प्रमुख चुनौती बताया।

उन्होंने कहा, “क्लाइमेट चेंज पेस्ट कैलेंडर को बदल रहा है।” उनके अनुसार, पेस्ट अब पहले दिखाई दे सकते हैं, लंबे समय तक बने रह सकते हैं और उन क्षेत्रों में भी पहुंच सकते हैं जहां पहले उनकी मौजूदगी नहीं थी।

रणुवा ने कहा कि आने वाले समय में किसानों को क्रॉप प्रोटेक्शन के लिए विभिन्न टेक्नोलॉजी के इंटीग्रेटेड उपयोग की आवश्यकता होगी। इसमें केमिस्ट्री आधारित क्रॉप प्रोटेक्शन के साथ बायोलॉजिकल्स, ड्रोन और डिजिटल एडवाइस शामिल हो सकते हैं।

विशेष रूप से स्मॉलहोल्डर फार्मर्स के लिए समय पर और प्रभावी क्रॉप प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी तथा प्रोडक्ट्स की व्यापक उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि क्लाइमेट वेरिएबिलिटी के साथ पेस्ट और डिजीज पैटर्न भी बदल रहे हैं।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि वह भारतीय एग्रीकल्चर में प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और सेफ एवं सस्टेनेबल क्रॉप प्रोटेक्शन प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए सरकार, साइंटिफिक कम्युनिटी और किसानों के साथ सहयोग जारी रखेगा।

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