देश में फेस्टिव सीजन शुरू होने वाला है, ग्लोबल टेंशन के बीच महंगाई का जोखिम बरकरार है, लेकिन इस बीच सरकार ने बड़ा फैसला ले लिया है. मोदी सरकार ने कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों पर लागू मूल आयात शुल्क में कटौती (Govt Cuts Import Duty) कर दी है. फेस्टिव सीजन के पहले लिए गए इस फैसले से खाने के तेलों की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है. सरकार की ओर से बुधवार देर रात अधिसूचना जारी कर इस राहत का ऐलान किया गया है.
कच्चे खाद्य तेल पर आधी इंपोर्ट ड्यूटी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब फेस्टिव सीजन में ताड़ का तेल, सोया तेल और सूरजमुखी का तेल समेत अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आ सकती है. फेस्टिव सीजन में कीमतों को कम करके लोगों को राहत देने के प्रयास में सरकार ने इन पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी है. सरकारी अधिसूचना पर नजर डालें, तो कच्चे पाम तेल और कच्चे सोया तेल पर मूल आयात शुल्क अब 10% से घटाकर आधा यानी 5% कर दिया गया है. इसके अलावा रिफाइंड पाम तेल और सोया तेल पर आयात शुल्क 32.5% से कम करके 27.5% किया गया है.
इस खाने के तेल पर आयात शुल्क 'Zero'
इसके अलावा कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क को 10% से घटाकर अब सरकार ने जीरो कर दिया गया है, जबकि रिफाइंड सूरजमुखी ऑयल पर इसे 32.5% से 22.5% किया गया है. कच्चे ताड़ के तेल और कच्चे सोयाबीन ऑयल पर कुल आयात शुल्क 11% होगा, जो अब तक 16.5% लग रहा था.
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त्योहारों पर मिली बड़ी राहत
भारत में वनस्पति तेल की कीमतों में पिछले एक साल में लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में सरकार की ओर से आयात शुल्क में की गई इस बड़ी कटौती से कीमतों में कमी आने की उम्मीद है. यानी सितंबर से नवंबर तक के प्रमुख धार्मिक त्योहारों के दौरान मिठाई, नमकीन और तले हुए खाद्य पदार्थों की खपत में इजाफा देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट में व्यापारियों के हवाले से कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, भारत में बढ़ती मांग से मलेशियाई पाम तेल और अमेरिकी सोयाबीन तेल के वायदा भाव को समर्थन मिलेगा.
देश में डिमांड का दो-तिहाई आयात
भारत अपनी वनस्पति तेल की लगभग दो-तिहाई मांग आयात के माध्यम से पूरी करता है. खासतौर पर मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से ताड़ का तेल, सोया तेल और सूरजमुखी का तेल आयात होता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में पतंजलि फूड्स लिमिटेड (PAFO.NS) के उपाध्यक्ष आशीष आचार्य ने कहा कि शुल्क में कटौती से सूरजमुखी के तेल को सबसे अधिक लाभ होगा, जिससे यह रिफाइनरों के लिए अधिक आकर्षक बन जाएगा और संभावित रूप से सोयाबीन तेल और ताड़ के तेल की मांग में कुछ कमी आएगी.
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