बेहतर भविष्य की राह, युद्ध का अन्त, एआई का कारगर प्रबन्धन – महासचिव का आहवान

Published on 22 सित॰ 2026

बेहतर भविष्य की राह, युद्ध का अन्त, एआई का कारगर प्रबन्धन – महासचिव का आहवान

महासचिव के सम्बोधन के अहम बिन्दु

  • कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) संचालन व्यवस्था पर बाध्यकारी अन्तरराष्ट्रीय सहयोग का आग्रह. साथ ही जीवन-मृत्यु से जुड़े निर्णयों को मशीन के भरोसे न छोड़ने की चेतावनी.
  • सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग, स्थाई अफ़्रीकी प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति जारी रहने पर क्षोभ.  
  • यूएन के इतिहास में पहली बार, वरिष्ठ नेतृत्व व कर्मचारी पदों पर पूर्ण लैंगिक समता हासिल.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के कार्यकाल में अब लगभग 100 दिन का समय शेष है. उन्होंने मंगलवार को महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान अपने सम्बोधन में कहा कि विश्व भर में नज़र आ रहे संकट कोई अलग-अलग समस्याएँ नहीं हैं, बल्कि उसी मूल संघर्ष की अलग-अलग अभिव्यक्ति हैं कि शक्ति का इस्तेमाल किसके द्वारा और किस तरह से किया जाए. 

उन्होंने संगठन की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि “महानतम शक्ति, दबदबा हासिल करने की ताक़त नहीं है. यह एक ऐसे भविष्य का निर्माण करने की है, जोकि सर्वजन के लिए काम करे.”

महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय मानकों व नियमों को पहुँच रही ठेस पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि युद्ध के दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, मानवीय सहायताकर्मियों की जान जा रही है, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून को दरकिनार किया जा रहा है और राष्ट्रों के बीच भरोसा दरक रहा है.

उनके अनुसार, ताक़त में बुनियादी रूप से तीन प्रकार के बदलाव दिखाई दे रहे हैं:

  • नई राज्यसत्ता शक्तियों का उभार हो रहा है 
  • सरकारों में निहित अधिकार अब निजी कॉरपोरेशन और व्यक्तियों को हस्तांतरित हो रहे हैं
  • एआई और स्वचालित हथियारों की ऐसे निर्णयों में भूमिका बढ़ रही है, जिन्हें कभी केवल मनुष्यों द्वारा ही लिया जाता था.

यूएन प्रमुख ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में बिखराव को स्वीकार करते जाने के बजाय, सहयोग को प्रोत्साहन देना होगा और परस्पर निर्भरता व साझा मूल्यों पर आधारित एक वैश्विक नैटवर्क को आकार देना होगा. इसके समानान्तर, प्रतिद्वंद्विता पर आधारित अलग-अलग आर्थिक व सुरक्षा व्यवस्था के गर्त में धँसने से बचा जाना होगा. 

बेअसर युद्धविराम

यूएन प्रमुख ने मध्य पूर्व, यूक्रेन, सूडान और म्याँमार में धधकते संकटों पर कहा कि वहाँ युद्धविराम के केवल इतने मायने हैं कि अब पहले से कम गोलाबारी हो रही है, जबकि आम नागरिक इसका ख़ामियाज़ा अब भी भुगत रहे हैं.

उन्होंने ग़ाज़ा के संबंध में में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन पर बल दिया और आगाह किया कि इसराइली क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में बस्तियों के विस्तार से दो-राष्ट्र समाधान की आशाएँ धूमिल हो रही हैं. 

महासचिव गुटेरेश ने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को यूएन चार्टर का एक स्पष्ट उल्लंघन क़रार देते हुए उसकी निन्दा की. 

साथ ही, उन्होंने सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग दोहराते हुए कहा कि स्थाई अफ़्रीकी प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति, न्यायसंगत नहीं है और इसका किसी भी तरह से बचाव नहीं किया जा सकता है. उनके अनुसार, 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद की नींव, अतीत के भूराजनैतिक दौर में रखी गई थी और अब स्थिति बदल चुकी है. 

निर्धनता व असमानता

यूएन प्रमुख ने रिकॉर्ड वैश्विक सम्पदा और भोजन, स्वच्छ जल, शिक्षा व स्वास्थ्य देखभाल से वंचित अरबों लोगों के बीच व्याप्त खाई पर गहरा क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि असमानता, महज़ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह अवसर, संसाधन और स्व-निर्धारण से जुड़ा सवाल भी है.

उन्होंने दोहराया कि वर्तमान अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र में विकासशील देश, कर्ज़ के बोझ में दबे हुए हैं और बहुत से देश उन जलवायु आपदाओं को भी झेल रहे हैं, जिसके लिए वे ज़िम्मेदार भी नहीं हैं. 

एंतोनियो गुटेरेश ने लैंगिक असमानता पर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने वरिष्ठ नेतृत्व, मुख्यालय में कर्मचारी पदों और पेशेवर भूमिकाओं में पहली बार, पूर्ण लैंगिक समता को हासिल कर लिया है.

“समानता, कोई सपना नहीं है; यह एक निर्णय है.” उनके अनुसार, यूएन में हुई प्रगति एक साक्ष्य है कि भीतर तक रचे-बसे शक्ति तंत्रों में भी बदलाव संभव है.

जलवायु व एआई, दोहरी चुनौतियाँ

यूएन प्रमुख ने गहराते जलवायु संकट पर चिन्ता जताते हुए कहा कि वैश्विक तापमान वृद्धि में 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा का पार होना लगभग निश्चित नज़र आ रहा है.

उन्होंने प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार देशों से भुगतान करने की मांग की और कहा कि विकसित देशों को जलवायु अनुकूलन प्रयासों के लिए सहायता धनराशि में तीन गुना वृद्धि करनी होगी. 

वहीं, एआई के मुद्दे पर उन्होंने आगाह किया कि शक्ति अब डेटा, कंप्यूटिंग क्षमता और ऐल्गोरिथम में केन्द्रित होती जा रही है और यह नियमों के दायरे में संचालित करने की मानव क्षमता से भी तेज़ी से हो रहा है.

“ख़तरा टैक्नॉलॉजी नहीं है. असल ख़तरा, बिना जवाबदेही के टैक्नॉलॉजी से है.”

यूएन प्रमुख ने कहा कि एआई के इस्तेमाल के इर्दगिर्द बचाव उपायों को भी अपनाया जाना होगा, और जीवन-मरण से जुड़े प्रश्नों को कभी टैक्नॉलॉजी के भरोसे नहीं छोड़े जा सकता है.