इस साल किस दिन रखा जाएगा जीवित्पुत्रिका व्रत? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पारण का सही समय
Published: Monday, September 21, 2026, 18:45 [IST]
Jitiya Vrat 2026 Date and Timing: हिंदू धर्म में जितिया व्रत को संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ा खास व्रत माना जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की सलामती, लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना से पूरे दिन और रात निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता।
हिंदू पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में इस व्रत को खास तौर पर रखा जाता है। इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और तीन दिनों तक चलने वाली इस परंपरा में व्रत, पूजा और फिर पारण किया जाता है। आइए जानते हैं 2026 में जितिया व्रत कब रखा जाएगा और पूजा के लिए कौन से समय बताए गए हैं।
2026 में कब रखा जाएगा जितिया व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 4 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 4 अक्टूबर 2026 की सुबह 2 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि को मानते हुए इस बार जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा।
ये भी पढ़ें: Anant Chaturdashi 2026 Date: 24 या 25 सितंबर, कब है अनंत चतुर्दशी? जानें सही तारीख-पूजा का शुभ मुहूर्त
यह व्रत संतान की सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से किया जाता है। मान्यता है कि व्रत के पुण्य से संतान को लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
जितिया व्रत के पूजा मुहूर्त
3 अक्टूबर को जितिया व्रत के दिन अलग-अलग शुभ समय इस तरह बताए गए हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 6:14 बजे से 7:03 बजे तक
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 6:38 बजे से 7:53 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 1:16 बजे से 2:02 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 3:35 बजे से शाम 4:21 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:26 बजे से 7:50 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम 7:26 बजे से रात 8:40 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 12:35 बजे से 2:05 बजे तक
जितिया में किसकी पूजा होती है?
जितिया व्रत की पूजा में जीमूतवाहन का खास महत्व बताया गया है। व्रती महिलाएं कुशा से जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करती हैं। इसके साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की प्रतिमा बनाई जाती है और उनका भी पूजन किया जाता है।
तीन दिन चलती है व्रत की परंपरा
जितिया व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इसके बाद दूसरे दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत करीब 24 घंटे तक चलता है। इस दौरान जल, अन्न, फल और दूध का सेवन नहीं किया जाता।
व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करने की भी परंपरा बताई गई है। तीसरे दिन सूर्योदय के बाद सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इसी के साथ निर्जला उपवास पूरा होता है।
राहुकाल में पूजा से बचें
ज्योतिष के अनुसार राहुकाल को पूजा-पाठ और शुभ कामों के लिए उचित समय नहीं माना जाता। जितिया व्रत के दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक रहेगा। मान्यता के अनुसार, इस समय पूजा या कोई मांगलिक काम करने से बचना चाहिए। इसलिए व्रती महिलाएं पूजा का समय तय करते समय राहुकाल का ध्यान रख सकती हैं।
4 अक्टूबर को होगा व्रत का पारण
जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 6 बजे के बाद किया जाएगा। हिंदू परंपरा के अनुसार, निर्जला व्रत का पारण सूर्योदय के बाद किया जाता है। यानी व्रती महिलाएं 4 अक्टूबर की सुबह सूर्योदय होने के बाद, 6 बजे के बाद व्रत खोल सकती हैं। पारण से पहले सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा भी बताई गई है। इसके बाद अन्न-जल ग्रहण करके व्रत पूरा किया जाता है।
इस तरह 2026 में जितिया व्रत की शुरुआत नहाय-खाय की परंपरा से होगी, 3 अक्टूबर को निर्जला व्रत रखा जाएगा और 4 अक्टूबर को सुबह 6 बजे के बाद सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2026: क्यों बप्पा को नहीं चढ़ाई जाती तुलसी दल? जानें इसके पीछे छिपा भयंकर श्राप!