सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं? जानें धार्मिक कारण - Haribhoomi

Published on 19 सित॰ 2026

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं? जानें धार्मिक कारण

ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं? जानें इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता, सूतक काल का महत्व और इस दौरान क्या करें-क्या न करें।

Grahan ke dauran puja niyam

ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं? (Ai IMage)

  • Published: 19 Sep 2026, 01:34 PM IST
  • Last Updated: 19 Sep 2026, 01:34 PM IST

Grahan ke dauran puja niyam: हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि ग्रहण काल को अशुभ समय माना जाता है, इसी वजह से इस दौरान पूजा-पाठ और भगवान के दर्शन पर रोक लगा दी जाती है। यही कारण है कि ग्रहण शुरू होने से पहले ही देशभर के प्रमुख मंदिरों में कपाट बंद करने की तैयारी कर ली जाती है।

सूतक काल से जुड़ी धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण से कुछ घंटे पहले ही "सूतक काल" शुरू हो जाता है, जिसे अशुद्धता का समय माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य ग्रहण में सूतक काल ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले, जबकि चंद्र ग्रहण में लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इसी वजह से सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-अर्चना रोक दी जाती है।

कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के दौरान राहु और केतु से जुड़ी घटना को ग्रहण का कारण माना जाता है, इसी वजह से इस समय को नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव वाला समय बताया गया है।

ग्रहण के दौरान क्या करने की मनाही होती है?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान भोजन करने, सोने और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान की मूर्ति को छूना भी वर्जित माना जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह पूरी तरह पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।

ग्रहण के दौरान क्या करना माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप, ध्यान और भगवान का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय किया गया जाप सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी होता है। इसके अलावा ग्रहण के दौरान दान करने का संकल्प लेना और ग्रहण समाप्त होने के बाद दान करना भी विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद की परंपरा
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले स्नान करने की परंपरा है, जिसे शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद पूरे घर और मंदिर परिसर में गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध किया जाता है। मंदिरों में भी ग्रहण खत्म होने के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान कराकर, नए वस्त्र पहनाकर और विधिवत श्रृंगार करने के बाद ही कपाट दोबारा खोले जाते हैं।

आज भी हर ग्रहण पर निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही विज्ञान ने ग्रहण की खगोलीय प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से समझा दिया हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से मंदिरों के कपाट बंद करने और सूतक काल का पालन करने की यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आज भी हर सूर्य और चंद्र ग्रहण के अवसर पर देशभर के प्रमुख मंदिरों में इस नियम का सख्ती से पालन किया जाता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। स्वास्थ्य या गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी सलाह के लिए कृपया चिकित्सक से ही परामर्श लें।