490 दिन बाद भी नहीं मिटा निशान, सरगोधा एयरबेस पर ब्रह्मोस से बना गड्ढा मरम्मत के लिए खोला गया

Published on 18 सित॰ 2026

पाकिस्तान के पंजाब में स्थित पीएएफ बेस मुशाफ यानी सरगोधा एयरबेस पर भारत के हमले का निशान अभी तक पूरी तरह नहीं मिटा है. 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए हमले के करीब 490 दिन बाद नई सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि क्षतिग्रस्त हिस्से को फिर से खोला गया है. इंडिया टुडे की OSINT टीम द्वारा जांची इन तस्वीरों में ताजा मरम्मत का काम साफ नजर आ रहा है. 

पहले कम रेजोल्यूशन वाली तस्वीरों में एक्स यूजर @Deltadoves ने इस गतिविधि को पहचाना था. बाद में स्पेस टेक कंपनी वैंतोर की हाई रेजोल्यूशन तस्वीरों से इसकी पुष्टि हुई. हमले के कुछ हफ्तों बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को अस्थाई पैच से ढक दिया गया था. अब एक साल से ज्यादा समय बाद वह पैच हटा दिया गया है. प्रभाव क्षेत्र फिर से खुला और साफ दिखाई दे रहा है.

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Sargodha airbase

बेस की रणनीतिक अहमियत 

सरगोधा एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यह किराना हिल्स से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित है. किराना हिल्स को लंबे समय से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़ा जाता रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन पहाड़ियों के पास संभावित हमलों की खबरें आई थीं. 

अगस्त में पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन में इस्तेमाल एक लॉइटिंग म्यूनिशन ने संभवतः उस इलाके की किसी पहाड़ी को निशाना बनाया हो. यह बेस पाकिस्तान के सेंट्रल एयर कमांड का मुख्यालय है. यहां F-16, JF-17, मिराज-III/5 और F-7पी/पीजी जैसे फ्रंटलाइन फाइटर स्क्वॉड्रन तैनात रहे हैं. यहां कॉम्बैट कमांडर्स स्कूल भी है जो सामरिक विकास और पायलट ट्रेनिंग के लिए है.

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Sargodha airbase

अस्थायी पैचवर्क क्यों किया गया 

मई 2025 के हमलों में दो बड़े गड्ढे बने थे. इन पर आयताकार पैच लगाए गए थे जो करीब 50 फीट चौड़े थे. विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान वायुसेना ने तुरंत मरम्मत का रास्ता चुना क्योंकि संचालन जारी रखना, समय और लागत महत्वपूर्ण थे. रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डॉ. डीके पांडे के अनुसार रैपिड रनवे रिपेयर आम प्रोसेस है जिससे 10 से 12 घंटे में हवाई संचालन बहाल किया जा सकता है. 

पूरी रनवे की रीसरफेसिंग में 80 से 100 लाख डॉलर खर्च हो सकते हैं. 30 से 45 दिन लग सकते हैं. इससे हवाई गतिविधियां प्रभावित होती हैं. मॉनसून ने भी जल्दी जमने वाले कंक्रीट को प्रभावित किया हो सकता है. पूरी तरह से चिकनी और उपयुक्त रनवे योजनाबद्ध उड़ानों के लिए जरूरी होती है. वर्तमान रीसरफेसिंग के दौरान उड़ानें संभव नहीं होंगी. हेलीकॉप्टर कुछ संचार मिशन चला सकते हैं. पांडे के अनुसार यह पैचवर्क भारतीय वायुसेना के सटीक हमलों की प्रभावशीलता का प्रमाण है.

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Sargodha airbase

अन्य ठिकानों से तुलना 

इंडिया टुडे की ओएसआईएनटी टीम पाकिस्तान के विभिन्न एयरबेस पर मरम्मत के समय को ट्रैक कर रही है. सरगोधा में एक साल चार महीने बाद भी काम चल रहा है. नूर खान में छह महीने में बहाली हुई और नए हैंगर बने. जैकोबाबाद सात महीने में ठीक हुआ. रहीम यार खान में दस महीने में गड्ढा भरा गया. 

सुक्कुर में 12 महीने में साफ किया गया लेकिन हैंगर नहीं बना. मुरीद में 12 महीने से ज्यादा हो गए, साफ तो किया लेकिन दोबारा निर्माण नहीं. भोलारी में 15 महीने बाद एक हैंगर की छत का काम दिख रहा है. सरगोधा की स्थिति बताती है कि शुरुआती अस्थाई मरम्मत पर्याप्त नहीं साबित हुई.अब स्थायी काम चल रहा है जिसमें और एक महीना लग सकता है.

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ये सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि भारतीय हमले का असर लंबे समय तक बना रहा. अस्थाई समाधान के बाद स्थायी मरम्मत की जरूरत पड़ना सटीक निशानेबाजी और क्षति की गंभीरता को रेखांकित करता है. एयरबेस की रणनीतिक स्थिति और परमाणु संवेदनशील इलाके के पास होने से यह घटना और महत्वपूर्ण हो जाती है. पाकिस्तान को संचालन जारी रखने के लिए त्वरित उपाय करने पड़े लेकिन लंबे समय में पूर्ण मरम्मत अपरिहार्य साबित हुई. यह विश्लेषण सैन्य तैयारियों और बुनियादी ढांचे की मजबूती दोनों पर प्रकाश डालता है.

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