
संचिता प्रधान और ममता बनर्जीImage Credit source: TV9 Bangla/PTI
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया. ममता गुट ने पिछले हफ्ते ही संचिता को नंदीग्राम से अपना उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन अब उनके नाम वापस लेने के बाद नंदीग्राम चुनाव में ममता गुट का कोई उम्मीदवार नहीं बचा है. संचिता प्रधान ने शुक्रवार को अपने पति सत्यजीत के साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया. उन्होंने हल्दिया SDO के ऑफिस जाकर नंदीग्राम उपचुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया. इस घटना के बाद से वो काफी चर्चा में आ गई हैं.
संचिता प्रधान डे नंदीग्राम के बोयाल की रहने वाली हैं और बोयाल प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं. वह कई सालों से राजनीति में सक्रिय हैं और स्थानीय TMC राजनीति में कोई नई नहीं हैं. वह साल 2008 से तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी हुई हैं. साल 2013 और 2018 में टीएमसी के टिकट पर वह नंदीग्राम पंचायत समिति के लिए चुनी गई थीं. अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने महिला और बाल कल्याण कर्माध्यक्ष के तौर पर काम किया था और दूसरे कार्यकाल के दौरान वह शिक्षा कर्माध्यक्ष से जुड़ी थीं. उसके बाद उन्होंने 2018-2023 तक पंचायत समिति सदस्य के तौर पर काम किया था.
स्थानीय TMC संगठन से संबंध हुए खराब
संचिता प्रधान के राजनीतिक इतिहास का एक अहम हिस्सा 2023 की घटना है. टीएमसी ने उन्हें साल 2023 के पंचायत समिति चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया. इसके बाद पार्टी नेतृत्व से नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं. इस वजह से स्थानीय TMC संगठन के कुछ हिस्सों के साथ उनके संबंध खराब हो गए.
टीचर-भर्ती मामले से हुईं प्रभावित
संचिता उन टीचरों में भी शामिल थीं, जो 2014 के TET-संबंधित भर्ती मामले से प्रभावित हुए थे. कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2022 में 269 प्राइमरी टीचरों की नौकरी खत्म करने का आदेश दिया था और संचिता उनमें से एक थीं. खबरों के मुताबिक, बाद में इस आदेश पर रोक लगा दी गई और वह लगभग चार महीने बाद फिर से पढ़ाने लगीं. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उनकी नौकरी वापस मिल गई. यह उनके पब्लिक प्रोफाइल का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि वह भर्ती से जुड़े कानूनी मामले से प्रभावित टीचर से एक राजनीतिक उम्मीदवार बनीं.
ममता के खेमे में कैसे लौटीं वापस?
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी में बागी नेता के तौर पर रहने के बाद कुणाल घोष ने उन्हें ममता बनर्जी के खेमे के करीब लाने में भूमिका निभाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के लिए मुश्किल दौर में वह शीर्ष नेतृत्व के करीब आ गईं. इसी वजह से उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव के लिए चुना गया. यह चुनाव अहम था, क्योंकि नंदीग्राम ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और यहां से सुवेंदु अधिकारी प्रतिनिधित्व करते रहे हैं.
ममता की अगुवाई वाली TMC ने 13 सितंबर 2026 को संचिता को अपना उम्मीदवार घोषित किया था. रिपोर्ट्स में उन्हें राज्य-स्तर की बड़ी नेता के बजाय जमीनी स्तर की कार्यकर्ता और स्कूल शिक्षिका बताया गया है. नंदीग्राम के बोयाल से उनकी स्थानीय जड़ें, पंचायत समिति का पिछला अनुभव और TMC में उनका इतिहास उनके राजनीतिक प्रोफाइल के अहम पहलू रहे हैं.
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सोनू शर्मा
TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. यहां न्यूज डेस्क पर काम करते हैं. इससे पहले ट्रेंडिंग टीम में थे. न्यूज चैनल और डिजिटल मीडिया में 10 साल से अधिक का अनुभव है. पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता स्थित NSHM कॉलेज से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. उसके बाद IBN7 (अब न्यूज18 इंडिया) में इंटर्नशिप की. फिर बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर सुदर्शन न्यूज चैनल से जुड़े. यहां स्पोर्ट्स टीम के साथ काम किया. फिर बिहार के पटना स्थित आर्यन न्यूज (बतौर प्रोड्यूसर), दिल्ली स्थित नेड्रिक न्यूज (बतौर सब एडिटर) और अमर उजाला जैसे संस्थानों में काम किया. अमर उजाला डिजिटल में बतौर सब एडिटर नेशनल और इंटरनेशनल बीट के साथ-साथ ट्रेंडिंग, ऑड, स्पोर्ट्स, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट पर काम किया. यहां शिफ्ट हेड की भूमिका भी निभाई. उसके बाद TV9 भारतवर्ष से जुड़े. ट्रेंडिंग के साथ-साथ ऑड न्यूज, हेल्थ, साइंस और रिसर्च में बेहतरीन पकड़ है. किताबें पढ़ने का शौक है.
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