अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से ज्यादा समय से युद्ध चल रहा है। मंगलवार को तनाव फिर बढ़ गया। अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को तबाह कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसैनिक जहाज को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी।
अमेरिकी युद्धपोत दोनों हमलों से बच गया और गश्त जारी रखी। इन हमलों में कोई अमेरिकी सैनिक घायल नहीं हुआ। इसके जवाब में अमेरिका ने पांच टैंकरों को निशाना बनाया। किविक, चार्मिनार, होराइजन-1 और रिस्को टैंकर गल्फ ऑफ ओमान में थे। पांचवां जहाज डेर्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खर्ग द्वीप के पास था। अमेरिका ने इन्हीं जहाजों को निशाना बनाया है।
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ईरान ने अमेरिका को कैसे दिया जवाब?
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, उसने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। जॉर्डन अमेरिकी सहयोगी है और वहां अमेरिकी सैनिक भी तैनात हैं। जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया। दो अन्य मिसाइलें ऐसे इलाकों में गिरीं, जहां कोई आबादी नहीं थी। जॉर्डन ने किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी है। वहीं, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन के पास मौजूद तेल टैंकरों को तुरंत हटने को कहा है। इतना ही नहीं, ईरान ने दोनों देशों पर अमेरिकी सेना को ठिकाने देने और हमलों में मदद करने का आरोप लगाया।
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आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि उसने अल-अजराक एयर बेस में अमेरिकी सेना के एफ-35, एफ-16 और एफ-15 लड़ाकू विमानों की मरम्मत, रखरखाव, तैयारी और तैनाती के लिए इस्तेमाल होने वाले एक हैंगर को निशाना बनाया। इसके अलावा, अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए बने एक शेल्टर पर भी हमला किया गया। आईआरजीसी ने दावा किया कि इस हमले में 'दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया गया।'
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन की सेना ने बुधवार को कहा कि उसके वायु रक्षा सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार, बाकी दो मिसाइलें सुनसान इलाकों में गिरीं और किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का सबसे बड़ा आर्थिक मोर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता था। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है। इससे ईरान के तेल निर्यात पर दबाव बढ़ा है। अमेरिका कुछ जहाजों को ओमान की तरफ से होर्मुज के रास्ते निकालने में मदद कर रहा है। वहीं ईरान चाहता है कि जहाज उसके बताए रास्ते से गुजरें।
इसका असर तेल बाजार पर कैसे पड़ा?
- मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 99.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
- बढ़ती ऊर्जा कीमतें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक परेशानी बढ़ा सकती हैं।
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ट्रंप सरकार ने आर्थिक दबाव क्यों बढ़ाया?
अमेरिका केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को ईरान के विमानन क्षेत्र पर भी नए प्रतिबंध लगाए। इसमें दो दर्जन से ज्यादा वाणिज्यिक और निजी एयरलाइंस तथा विदेशी कार्गो सेवा देने वाली कंपनियां शामिल हैं। मकसद ईरान को उसके बचे हुए व्यापारिक साझेदारों से अलग-थलग करना है। इससे साफ है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान के अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमलों को अनदेखा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'ईरान अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश करता रहेगा, तो हर बार उसे टैंकर गंवाने पड़ेंगे।' उन्होंने यह बात मंगलवार को कोलंबिया यात्रा के दौरान कही।
क्या टैंकरों पर हमले से भड़क सकता है युद्ध?
ईरान पहले ही कह चुका है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों के लिए नया 'बहिष्करण क्षेत्र' घोषित करेगा। शनिवार को भी अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को तबाह किया था। अमेरिका का कहना था कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और विध्वंसक जहाज पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की थी। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। ईरान मामलों के विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविच ने चेताया कि ऐसे जवाबी हमले अमेरिका और ईरान को ऐसी स्थिति में धकेल सकते हैं, जिसे बाद में नियंत्रित करना मुश्किल होगा। उनके मुताबिक, होर्मुज की समस्या का सैन्य समाधान नहीं है और हर ऐसी कोशिश वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और दबाव डाल सकती है।