'खान सरनेम देखा तो और पीटा', कौन हैं शाहीन और नफीसा? साकेत थाने में पत्रकारों के साथ सच में हुई मारपीट?

Published on 4 सित॰ 2026

'खान सरनेम देखा तो और पीटा', कौन हैं शाहीन और नफीसा? साकेत थाने में पत्रकारों के साथ सच में हुई मारपीट?

Time Published: Friday, September 4, 2026, 14:19 [IST]

देश की राजधानी दिल्ली से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 3 सितंबर 2026 को साकेत इलाके में एक अस्पताल के उद्घाटन समारोह में रिपोर्टिंग करने गईं दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रोती हुई पत्रकारों ने दावा किया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री से सवाल पूछने और 'साइकिल घोटाले' पर रिपोर्टिंग करने पर उन्हें जबरन साकेत थाने ले जाया गया और बंद कमरे में बेरहमी से पीटा गया। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए वीवीआईपी रूट पर गैर-कानूनी पार्किंग और हंगामा करने की बात कही है।

Delhi Police Assault Women Journalists Saket

कौन हैं शाहीन खान और नफीसा खान?

शाहीन खान और नफीसा खान एक डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म 4PM न्यूज नेटवर्क के साथ काम करती हैं। दोनों स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर रिपोर्टिंग भी करती हैं। 3 सितंबर 2026 को वे दक्षिण दिल्ली के साकेत में एक निजी अस्पताल के नए विंग के उद्घाटन कार्यक्रम को कवर करने पहुंची थीं।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद थीं। इसी कार्यक्रम के दौरान शाहीन ने दिल्ली सरकार से जुड़े कथित साइकिल घोटाले पर सवाल उठाने की कोशिश की। इसके बाद दोनों को वहां से हटाकर साकेत थाने ले जाने का आरोप लगाया गया।

ये मुसलमान है। ये महिला है। ये पत्रकार है। ये Gen-Z है।

जुर्म इतना है कि देशभक्त महिला पत्रकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछ लिया। फिर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से इस बहन की पिटाई कर दी।

मोदी जी के अमृतकाल वाले कथित न्यू इंडिया में अब मुसलमान होना,… pic.twitter.com/DWoI2GGCLK

— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) September 3, 2026

'सवाल पूछने पर थाने ले गए, फिर बंद कमरे में पीटा'

शाहीन खान ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में पूरे घटनाक्रम का अपना पक्ष बताया। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मी उन्हें जबरन थाने ले गए और एक कमरे में रखा। शाहीन के मुताबिक, वहां सादी वर्दी में मौजूद एक महिला पुलिसकर्मी ने डंडे और थप्पड़ों से दोनों की पिटाई की।

उन्होंने आरोप लगाया, "हमें जबरन थाने लाया गया। कमरे में बंद करके डंडे और थप्पड़ों से मारा गया। मेरा फोन भी ले लिया गया। जब मेरे भाई का फोन आया और पुलिसकर्मियों ने उसके नाम में 'खान' देखा, तो हमारे साथ मारपीट और बढ़ा दी गई।"

शाहीन ने यह भी आरोप लगाया कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस का रवैया और सख्त हो गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों महिलाओं के शरीर पर चोट के निशान दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इनपुट में नहीं है।

संपादक संजय शर्मा ने क्या कहा?

4PM न्यूज नेटवर्क के प्रधान संपादक संजय शर्मा ने कहा कि उन्होंने दोनों पत्रकारों से बात की है। उनके मुताबिक, शाहीन और नफीसा ने पुलिस की ओर से डंडे और थप्पड़ों से मारपीट किए जाने की बात बताई है।

संजय शर्मा ने आरोप लगाया कि साइकिल घोटाले से जुड़ी रिपोर्टिंग और आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज के इंटरव्यू के बाद उनके मंच को सरकारी दबाव का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि संगठन पहले भी कानूनी रास्ता अपना चुका है। शर्मा ने यह भी कहा कि वे मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगे और थाने के सभी संबंधित कमरों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग करेंगे।

पुलिस का दावा बिल्कुल अलग, 'मारपीट के आरोप गलत'

दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों के आरोपों को "पूरी तरह गलत, भ्रामक और बेबुनियाद" बताया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने वीवीआईपी सुरक्षा मार्ग के पास अपनी स्कूटी खड़ी कर दी थी। उन्हें कई बार वाहन हटाने को कहा गया, लेकिन उन्होंने निर्देश नहीं माना।

पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मौके पर हंगामा किया और एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई भी की। इसके बाद दोनों को पूछताछ के लिए साकेत थाने ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि थाने पहुंचने के 5 से 10 मिनट के भीतर दोनों जाने के लिए स्वतंत्र थीं। किसी ने उनके हाथ नहीं पकड़े थे और उन्हें रोका नहीं गया था।

दक्षिण दिल्ली के पुलिस उपायुक्त अनंत मित्तल ने भी कहा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की वजह से मारपीट किए जाने का दावा गलत और भ्रामक है। उन्होंने लोगों से बिना पुष्टि वाली जानकारी साझा नहीं करने की अपील की।

पत्रकार संगठनों ने मांगी जांच, प्रेस क्लब भी आया सामने

मामले के सामने आने के बाद कई पत्रकार संगठनों ने जांच की मांग की। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वुमेन्स प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने संयुक्त बयान जारी किया।

संगठनों ने आरोपों को गंभीर बताते हुए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने प्रेस परिषद से भी मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने साकेत थाने के संबंधित पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

साइकिल घोटाले का सवाल कहां से आया?

यह विवाद दिल्ली सरकार की ओर से कक्षा 9 की छात्राओं के लिए 1.3 लाख साइकिल खरीदने की करीब 90 करोड़ रुपये की योजना से जुड़ी राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। आम आदमी पार्टी ने अगस्त 2026 में इस खरीद में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। पार्टी ने कीमतों, निविदा की शर्तों और साइकिलों की तय मानकों से अलग आपूर्ति पर सवाल उठाए थे।

दिल्ली सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि खरीद जेम प्रक्रिया के तहत हुई और ठेका सबसे कम बोली लगाने वाले योग्य पक्ष को दिया गया। फिलहाल पूरे मामले में दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं। पत्रकारों का आरोप पुलिस हिरासत में मारपीट और पहचान के आधार पर भेदभाव का है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने और कथित बदसलूकी के बाद हुई। ऐसे में अब सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और स्वतंत्र जांच इस विवाद की असली तस्वीर साफ करने में अहम हो सकते हैं।