इटखोरी |श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इटखोरी के प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर के पुजारी सतीश उर्फ मंटू बाबा के पुत्र शेखर कुमार भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में नजर आए। कृष्ण की मनमोहक वेशभूषा धारण कर हाथों में बांसुरी लिए शेखर ने जब कृष्णलीला
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इटखोरी | इटखोरी कृषि फार्म के पुराने अखाड़ा स्थल पर संकट मोचन सेवा समिति के सौजन्य से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भव्य माहौल में मनाई गई। बजरंगबली मंदिर सहित पूरे परिसर को सुगंधित फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी, दूधिया लाइटों से सजाया गया। परिसर में भव्य पंडाल बना। आकर्षक सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया। पंडाल में देर रात तक धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम चले। भजन-कीर्तन हुआ। प्रवचन हुआ। बच्चों ने कृष्णलीला, रासलीला, मनमोहक झांकियां पेश कीं। भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक हुआ। विधिवत पूजन हुआ। मंगल आरती हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद बांटा गया। फिर विशाल भंडारा हुआ। देर रात तक भीड़ जुटी रही। भंडारे में स्थानीय व्यवसायियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों ने सहयोग किया। अन्नदान किया। आयोजन का खास क्षण तब आया, जब व्रत रखीं 101 श्रद्धालु महिलाओं ने एक साथ सामूहिक पूजन-अर्चना की। समिति के अनुसार इटखोरी में ऐसा सामूहिक पूजन पहली बार हुआ। पूरे आयोजन के दौरान कृषि फार्म का पुराना अखाड़ा स्थल श्रद्धा, भक्ति के रंग में डूबा रहा। देर रात तक भजन-कीर्तन, भंडारा चलता रहा। एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण का जयघोष करते हुए एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। जन्मोत्सव के बाद भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और अन्य प्रसाद अर्पित किया गया। जन्माष्टमी को लेकर शहर के विभिन्न मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगी लाइटिंग, फूलों और सजावटी सामग्री से मंदिरों की खूबसूरती देखते ही बन रही थी। रात में रोशनी से जगमगाते मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे। मंदिरों में देर रात तक भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा।
रात 12 बजते ही गूंज उठा मंदिर परिसर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य आकर्षण रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव रहा। रात करीब नौ बजे से ही शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। जैसे-जैसे मध्यरात्रि का समय नजदीक आता गया, मंदिरों में भक्तों की संख्या बढ़ती गई। रात 12 बजते ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में मंदिरों में आरती शुरू हुई। इस दौरान ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की...’ जैसे सोहर गीतों और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठे।