फर्जी दस्तावेज मामले में पूर्व पार्षद अंसारी की जमानत खारिज: इंदौर में कोर्ट ने कहा- आरोपी से पूछताछ जरूरी, जांच प्रभावित होने की आशंका - Indore News

Published on 1 सित॰ 2026

इंदौर में शासकीय उर्दू कन्या उप महाविद्यालय, हाथीपाला स्कूल परिसर में बसें खड़ी करने की अनुमति से जुड़े फर्जी दस्तावेज के मामले में जिला कोर्ट ने 68 वर्षीय आरोपी इफ्तेखार उर्फ मुन्ना अंसारी की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि मामले में आरोपी से पूछताछ जरूरी है और उसे अग्रिम जमानत पर छोड़े जाने से जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मामला वर्ष 2021 में दर्ज FIR से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ थाना सेंट्रल कोतवाली में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अंतिम प्रतिवेदन भी पेश किया था।

डिप्टी कलेक्टर के हस्ताक्षर वाला पत्र देने का आरोप

अभियोजन के अनुसार 14 सितंबर 2019 को शिकायतकर्ता असफाक अंसारी ने डीआईजी इंदौर को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि शासकीय उर्दू कन्या उपमहाविद्यालय, हाथीपाला स्कूल परिसर में चार बसें खड़ी करने के लिए तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर व सीईओ के हस्ताक्षर वाला एक पत्र दिया गया था। इन बसों के नंबर MP09-F6095 से 6098 बताए गए थे। बाद में शिकायतकर्ता को जानकारी मिली कि डिप्टी कलेक्टर द्वारा ऐसा कोई पत्र जारी ही नहीं किया गया था।

जांच के दौरान पत्र को जब्त कर फोरेंसिक जांच कराई गई। पुलिस के अनुसार, यह मूल दस्तावेज नहीं बल्कि कलर फोटो कॉपी पाई गई। आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से तैयार किए गए। इस फर्जी दस्तावेज को वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल कर लाभ लेने का प्रयास किया गया।

आरोपी बोला पुरानी रंजिश के कारण झूठा केस

आरोपी की ओर से एडवोकेट ने तर्क दिया कि उसके खिलाफ राजनीतिक और पुरानी रंजिश के चलते झूठा मामला दर्ज कराया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी 68 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक है और पूर्व में पार्षद भी रह चुके हैं। उनका यह भी तर्क था कि फर्जी दस्तावेज की मूल प्रति जांच में बरामद नहीं हुई है और दस्तावेज तैयार करने में उनकी भूमिका का कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है और पुलिस को नमूना हस्ताक्षर भी दिए हैं। साथ ही, मामले में पहले की गई जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए।

शिकायतकर्ता ने जताई गवाहों को प्रभावित करने की आशंका

शिकायतकर्ता और अन्य आपत्तिकर्ताओं की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। उनका कहना था कि आरोपी पहले की अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद से फरार है और गिरफ्तारी से बच रहा है। आरोप लगाया कि वह राजनीतिक प्रभाव के आधार पर कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहा है और शिकायतकर्ता और उसके परिवार पर समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

अभिोयोजन की ओर से एजीपी योगेश जायसवाल ने अग्रिम जमानत के आवेदन का मौखिक रूप से विरोध करते हुए बताया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाए।

कोर्ट: आरोपी से पूछताछ के बिना अहम तथ्य सामने नहीं आएंगे

कोर्ट ने केस डायरी और आपराधिक प्रकरण का अवलोकन करने के बाद माना कि मामले में पत्र फर्जी दस्तावेज है और जांच के दौरान इसकी मूल प्रति बरामद नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आरोपी से यह पूछताछ करना जरूरी है कि रंगीन फोटो कॉपी से संबंधित मूल दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं अथवा उन्हें नष्ट किया गया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस के पास अंतिम प्रतिवेदन पेश किए जाने के बाद भी आरोपी से पूछताछ कर अतिरिक्त जांच करने और पूरक अभियोग-पत्र पेश करने का अधिकार है। ऐसी स्थिति में आरोपी को अग्रिम जमानत देने से जांच पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।