भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस के 70 प्रत्याशियों के सिंबल में से 17 सिंबल तय समय तक निर्वाचन अधिकारी के पास नहीं पहुंच सके। इसके चलते संबंधित प्रत्याशी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव नहीं लड़ सके।
घटनाक्रम को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य मनोज पालीवाल ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और स्थानीय स्तर पर देहात कांग्रेस के कथित महासचिव महेश सोनी को जिम्मेदार ठहराया है। पालीवाल ने इसे प्रदेश नेतृत्व की गंभीर लापरवाही और सिंबल प्रबंधन में हुई बड़ी चूक बताया है।

पालीवाल का आरोप है कि पार्टी की ओर से सिंबल सौंपने जाते समय कांग्रेस जिलाध्यक्ष के साथ विवादित व्यक्ति को भी भेजा गया और सिंबल की लिस्ट भी सीलबंद नहीं थी।
70 में से सिर्फ 53 सिंबल समय पर पहुंचे पालीवाल ने मंगलवार को एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने भीलवाड़ा नगर निगम के सभी 70 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पूरी की थी। ऑनलाइन आवेदन मंगवाने के बाद पैनल तैयार किए गए और जिला नेताओं से चर्चा के बाद प्रदेश नेतृत्व ने प्रत्याशियों के नाम अंतिम किए।
नामांकन की अंतिम तारीख 31 अगस्त थी और दोपहर 3 बजे तक पार्टी के अधिकृत सिंबल निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचना जरूरी था।
पालीवाल के अनुसार, निर्धारित समय तक 70 में से केवल 53 सिंबल ही निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जा सके। बाकी 17 सिंबल समय पर नहीं पहुंच पाए, जिसके कारण संबंधित प्रत्याशियों के नामांकन पार्टी प्रत्याशी के रूप में मान्य नहीं हो सके।
बोले- 17 प्रत्याशियों के नुकसान पर जिम्मेदारी तय हो पालीवाल ने कहा कि इस चूक का सीधा खामियाजा कांग्रेस के 17 संभावित पार्षद प्रत्याशियों को भुगतना पड़ा। उनका आरोप है कि यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि सिंबल प्रबंधन में हुई ऐसी चूक है, जिसने पार्टी को चुनावी नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि अधिकृत सिंबल निर्वाचन अधिकारी तक तय समय में पहुंचाना पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में 17 सिंबल का समय पर नहीं पहुंचना गंभीर मामला है और इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

तस्वीर सोमवार रात की है। निर्वाचन अधिकारी के रूम के बाहर धरना देते कांग्रेस के पदाधिकारी।
'सिंबल सीलबंद पैकेट में नहीं, खुले में भेजे गए' पालीवाल ने सिंबल भेजने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि सभी 70 सिंबल सीलबंद पैकेट में भेजने के बजाय खुले में भेजे गए और इन्हें देहात कांग्रेस का एक कथित पदाधिकारी लेकर घूमता रहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी के अधिकृत सिंबल किसी स्थानीय पदाधिकारी के पास किस अधिकार से रहे? जब इन्हें निर्धारित समय के भीतर निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाना था, तो 17 सिंबल आखिर समय पर क्यों नहीं पहुंचे?
डोटासरा पर लगाया भेदभाव का आरोप पालीवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि यह घटना सिर्फ प्रशासनिक या तकनीकी चूक मानकर नजरअंदाज नहीं की जा सकती, क्योंकि इससे सीधे तौर पर चुनाव लड़ रहे कार्यकर्ताओं का राजनीतिक भविष्य प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सिंबल समय पर नहीं पहुंचने से 17 उम्मीदवार चुनावी मुकाबले से बाहर हो गए। ऐसे में इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
खड़गे को भेजा पत्र, राष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग पालीवाल ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के स्तर पर हुई कथित लापरवाही की राष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने के लिए जांच कमेटी गठित करने और दोषी पाए जाने वालों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की मांग की है।
पालीवाल का कहना है कि भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को इस घटनाक्रम से बड़ा चुनावी नुकसान हुआ है। 17 प्रत्याशियों का अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान से बाहर होना संगठन के लिए मामूली घटना नहीं है।
सिंबल वितरण से जमा होने तक पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग पीसीसी सदस्य ने मांग की कि सिंबल वितरण से लेकर उन्हें निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि 70 सिंबल किसे सौंपे गए, उन्हें निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी और निर्धारित समय तक 17 सिंबल क्यों नहीं पहुंच सके।
पालीवाल ने चेतावनी दी कि यदि इतने बड़े मामले में जांच और जवाबदेही तय नहीं की गई तो कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाएगा कि चुनावी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के बावजूद संगठन में किसी की जिम्मेदारी तय नहीं होती।