विकसित छत्तीसगढ़ का डिजिटल विजन : सेवा सेतु से ई-ऑफिस तक, साय सरकार ने आसान किया आमजन का काम
सेवा सेतु, ई-ऑफिस, ई-प्रगति और भारतनेट जैसी डिजिटल पहलों से छत्तीसगढ़ में सरकारी सेवाएं तेज, पारदर्शी और आमजन के लिए आसान हो रही हैं।
डिजिटल सेवाओं से बदल रही सुशासन की तस्वीर
- Published: 31 Aug 2026, 05:15 PM IST
- Last Updated: 31 Aug 2026, 05:15 PM IST
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के विजन को डिजिटल तकनीक के माध्यम से तेजी से जमीन पर उतार रही है। प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित सेवा वितरण के साथ अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित कई महत्वपूर्ण पहलें लागू की जा रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (CHiPS) के माध्यम से संचालित इन पहलों ने शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सेवा सेतु बना डिजिटल नागरिक सेवाओं का बड़ा मंच
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 29 अप्रैल 2026 को ‘सेवा सेतु’ पोर्टल का शुभारंभ किया था। यह राज्य का एकीकृत नागरिक सेवा मंच बनकर उभरा है, जहां 35 से अधिक विभागों की 564 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। पोर्टल पर अब तक 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 78 लाख से अधिक आवेदनों का समयबद्ध निराकरण किया जा चुका है। आय, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं डिजिटल हस्ताक्षर के साथ सीधे मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। AI आधारित सहायता, व्हाट्सऐप इंटीग्रेशन, आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजीलॉकर और क्यूआर कोड वेरिफिकेशन जैसी सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया है।

ई-ऑफिस से प्रशासन हुआ पेपरलेस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 24 अगस्त 2024 को मंत्रालय से पहली डिजिटल फाइल आगे बढ़ाकर ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत की थी। इसके बाद मंत्रालय, संचालनालय, संभागीय कार्यालय और सभी जिला कलेक्टोरेट पेपरलेस कार्यप्रणाली की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। फाइलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होने से प्रशासनिक कामकाज अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हुआ है। वहीं ‘प्रोजेक्ट दक्ष’ के माध्यम से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल तकनीक तथा एआई आधारित प्रणालियों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार
दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य में 5,000 से अधिक नए मोबाइल टावर स्थापित करने और फाइबर नेटवर्क के विस्तार का अभियान चलाया जा रहा है। भारतनेट-3 परियोजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 3,942 करोड़ रुपये की सहायता से राज्य की 11,682 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल सरकारी सेवाओं की पहुंच मजबूत हो रही है।
दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक आसान मोबाइल कनेक्टिविटी और तेज इंटरनेट सिर्फ संवाद का जरिया नहीं होंगे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ऑनलाइन सेवाएं, डिजिटल भुगतान और रोजगार के नए अवसर गांव-गांव तक पहुंचेंगे।
डिजिटल छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम बढ़ाते हुए भारतनेट-3 योजना के तहत प्रदेश की… pic.twitter.com/nnbGPVOxRw
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) May 12, 2026
ई-प्रगति से बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी
विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘ई-प्रगति’ पोर्टल की शुरुआत की है। इसके माध्यम से 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की सैटेलाइट और जीआईएस आधारित निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जा रही है। इस व्यवस्था से बड़े विकास कार्यों की प्रगति पर प्रभावी नजर रखने के साथ परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल रही है।
गांव के नजदीक मिल रही सरकारी सेवाएं
पहले आय, निवास, जाति और अन्य छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों के लिए ग्रामीणों को तहसील, जनपद या जिला मुख्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सेवा सेतु केंद्रों के माध्यम से गांवों के नजदीक ही अधिकांश शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र प्राप्त करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध होने से ग्रामीणों के समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
सुशासन का अर्थ है - जनता का समय बचे, सुविधा बढ़े और हर सेवा सहजता से मिले।
इसी सोच के साथ सेवा सेतु पोर्टल पर जन्म प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, पेंशन सहित 36 विभागों की 520 सेवाएं अब घर बैठे ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
सरल प्रक्रिया, पारदर्शी व्यवस्था और डिजिटल सुशासन -… pic.twitter.com/1P5VJKEfBt
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) July 1, 2026
अटल डिजिटल सुविधा केंद्र बना ग्रामीण सशक्तिकरण का मॉडल
कोंडागांव जिले के बड़ेकनेरा स्थित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देखा कि सेवा सेतु के माध्यम से ग्रामीणों को एक ही स्थान पर कई सरकारी और डिजिटल सेवाएं मिल रही हैं। ग्रामीण महिलाओं ने महतारी वंदन योजना, पेंशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी दी। केंद्र के सेवा सेतु प्रबंधक के अनुसार यहां हर महीने लाखों रुपये का डिजिटल लेनदेन हो रहा है। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

वंदना को एक ही दिन में मिला निवास प्रमाण पत्र
बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के ग्राम तड़केल निवासी वंदना हेमला ने सेवा सेतु केंद्र नेलेसनार में स्थानीय निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। आवेदन के उसी दिन उनका प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। वंदना के अनुसार पहले सरकारी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई बार कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों खर्च होते थे। अब सेवा सेतु केंद्र के जरिए पूरी प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और समयबद्ध हो गई है। उन्होंने इसे ग्रामीणों के लिए बेहद सुविधाजनक पहल बताया।

समय पर मिला आय प्रमाण पत्र
कोरबा जिले की पाली तहसील के नानबांका निवासी रनसिंह नेटी ने अपने पुत्र सुनील कुमार के लिए आय प्रमाण पत्र का आवेदन किया था। करीब एक सप्ताह के भीतर प्रमाण पत्र जारी हो गया। परिवार के अनुसार पहले इस तरह के कार्यों के लिए कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। सेवा सेतु के माध्यम से अब प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हो गई है। इससे ग्रामीण परिवारों को सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में काफी सुविधा मिल रही है।

डिजिटल तकनीक से मजबूत हो रहा सुशासन
छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक का विस्तार केवल सरकारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य नागरिकों को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह शासन उपलब्ध कराना है। सेवा सेतु से लेकर ई-ऑफिस, ई-प्रगति, स्मार्ट पंजीयन कार्यालय और भारतनेट तक की पहलें ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के डिजिटल विजन को मजबूत आधार दे रही हैं।
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