प्रेषक: डॉ योगेंद्र कौशिक ,पूर्व रीजनल एडवाइजरी मेंबर नाबार्ड -मध्य प्रदेश
29 अगस्त 2026, भोपाल: नाबार्ड के आईने में ग्रामीण-शहरी आय का अंतर और युवा किसान का भविष्य – लगभग 5-6 वर्ष पूर्व मुझे नाबार्ड के राज्य स्तरीय सलाहकार समूह में किसान प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ था। उस दौरान नाबार्ड की State Focus Paper और PLP बुकलेट में ग्रामीण-शहरी आय के तुलनात्मक आंकड़े पढ़ने को मिले थे, उसी अनुभव के आधार से वर्तमान समय के आंकड़ों पर लिख रहा हूँ।

नाबार्ड के नवीनतम NAFIS सर्वे 2021-22 के अनुसार ग्रामीण भारत के एक परिवार की औसत मासिक आय ₹12,698 हो गई है, जो 2016-17 में ₹8,059 थी। यानी 5 वर्षों में 57.6% की वृद्धि। यह आंकड़ा उत्साहजनक है, परंतु सिक्के का दूसरा पहलू भी देखना होगा।
डॉ कौशिक ने बताया कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के उपभोग व्यय सर्वे 2023-24 के अनुसार आज भी शहरी व्यक्ति का मासिक खर्च ₹6,996 है, जबकि ग्रामीण व्यक्ति का ₹4,122 है। स्पष्ट है कि शहरी आय-क्षमता आज भी ग्रामीण से लगभग 70% अधिक है। राष्ट्रीय औसत प्रति व्यक्ति आय ₹17,000 महीना के आसपास है, जबकि गांव में यह ₹3,000 के आसपास ही है।
सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं, नीतियों का है– प्रदेश का युवा आज खेती से विमुख होकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर एवं आदि शहरों की ओर पलायन कर रहा है, क्योंकि खेती में लागत ज्यादा और मुनाफा कम है । क्यों कि उनको उनकी कई उपज का मंडियों में समर्थन मूल्य से कम मूल्य मिलता है ।
सरकार से विनम्र अपील – कृषि नीतियां केवल दिल्ली-भोपाल में न बनें, बल्कि जमीनी स्तर पर राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर किसानों से चर्चा करके बनाई जाएं। युवा किसानों को भी उद्योगपतियों की तरह सहूलियत दी जाए। जिस तरह उद्योगों को सस्ती जमीन, बिजली, लोन और सब्सिडी मिलती है, वैसी ही पारदर्शी व्यवस्था खेती के लिए भी हो। खेती के इनपुट लागत, पॉलीहाउस, नेट हाउस, डेयरी, बकरी पालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी फसलों,औषधीय, फल-फूल के बगीचे और कृषि यंत्रों पर मिलने वाला अनुदान सहजता से राशि किसान के खाते तक पहुंचे। और बैंकों के ऋण में सरकार तुरन्त अनुदान राशि जमा करें ताकि किसानों को केवल अनुदान के बाद बची हुई राशि का ही ब्याज बैंकों को देना पड़े ।एक बड़ा सवाल -उत्तर प्रदेश सरकार डेयरी योजना पर किसानों को 50% तक अनुदान दे रही है, तो मध्य प्रदेश में वही अनुदान 25% क्यों है? मध्य प्रदेश के युवा किसान को भी 50% अनुदान मिलना चाहिए। योजनाएं कागजों पर नहीं, धरातल पर दिखें। पूरी पारदर्शिता के साथ अनुदान सीधे किसान के खाते में आए और उनके बैंक ऋण में तुरंत जमा हो जाए। ताकि युवा का शहरों की ओर पलायन रुके और वह गर्व से कहे – “मैं किसान हूँ। ” डॉ कौशिक ने कहा कि अगर युवा किसान को उद्योगपति जैसा सम्मान और आर्थिक सहूलियत मिलेगी, तो ही ग्रामीण-शहरी आय का अंतर घटेगा और धरातल पर ”विकसित भारत 2047 ‘ का सपना गांव से ही पूरा होगा।
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