क्योटी जलप्रपात के प्रवेश द्वार पर लगा कचरे का ढेर: पार्किंग में कई ट्रक कचरा डंप, गंदगी से पर्यटक परेशान
प्रवेश द्वार से महज 50 मीटर दूर पार्किंग में लगे कचरे के ढेर, बारिश में बहकर आसपास फैलने का खतरा; प्रशासन की वेबसाइट पर लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में दर्ज है क्योटी जलप्रपात
प्रवेश द्वार से महज 50 मीटर दूर पार्किंग में लगा कचरे का ढेर।
- Published: 29 Aug 2026, 12:00 PM IST
- Last Updated: 29 Aug 2026, 12:00 PM IST
Rewa Kyoti Waterfall: बारिश के मौसम में जहां रीवा का क्योटी जलप्रपात अपनी खूबसूरती से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, वहीं इसके प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। पर्यटकों के वाहनों के लिए बनाई गई पार्किंग में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं और कई ट्रक कचरा डंप किया गया है। खास बात यह है कि यह जगह जलप्रपात के प्रवेश द्वार से महज 50 मीटर दूर है। यानी जिस स्थान से पर्यटकों को क्योटी की प्राकृतिक सुंदरता का पहला अनुभव होना चाहिए, वहीं उनका सामना कचरे के ढेर से हो रहा है।
क्योटी जलप्रपात के गेट पर कचरे का अंबार
बारिश के दिनों में क्योटी जलप्रपात का नजारा देखते ही बनता है। चट्टानों के बीच से गिरता पानी, चारों तरफ हरियाली और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। मानसून के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
लेकिन इस खूबसूरत पर्यटन स्थल की पहली तस्वीर ही इन दिनों सवाल खड़े कर रही है। प्रवेश द्वार के पास बनी पार्किंग में पर्यटकों के वाहनों के बजाय कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं। यहां कई ट्रक कचरा डंप किए जाने की बात सामने आई है।
जहां खड़े होने चाहिए वाहन, वहां डंप हो रहा कचरा
क्योटी जलप्रपात के प्रवेश द्वार से करीब 50 मीटर की दूरी पर पर्यटकों की पार्किंग बनाई गई है। सामान्य तौर पर इस जगह का इस्तेमाल यहां आने वाले पर्यटकों के वाहनों को खड़ा करने के लिए होना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति में पार्किंग का एक हिस्सा कचरा डंपिंग की जगह बनता नजर आ रहा है।
कचरे की बड़ी मात्रा को देखते हुए आसपास के पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बारिश के दौरान पानी के बहाव के साथ कचरा आसपास के इलाके में फैल सकता है। इससे न केवल पर्यटन स्थल की स्वच्छता प्रभावित होगी, बल्कि प्राकृतिक वातावरण पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन की वेबसाइट पर लोकप्रिय पर्यटन स्थल, जमीन पर कचरे के ढेर
क्योटी जलप्रपात को रीवा जिला प्रशासन की वेबसाइट पर प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल किया गया है। प्रशासन के मुताबिक क्योटी भारत के प्रमुख ऊंचे जलप्रपातों में शामिल है और यहां सूर्योदय तथा सूर्यास्त का दृश्य भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यह रीवा शहर से करीब 37 किलोमीटर दूर स्थित है।
ऐसे में पर्यटन स्थल के प्रवेश द्वार पर कचरे का जमावड़ा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। एक तरफ पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी व्यवस्था ही सवालों के घेरे में है।
गंदगी से नहीं, प्राकृतिक खूबसूरती से हो क्योटी की पहचान
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्योटी की सबसे बड़ी पहचान यहां का प्राकृतिक सौंदर्य है। बारिश के मौसम में इसकी खूबसूरती देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। ऐसे में जलप्रपात से कुछ ही दूरी पर कचरा डंप होना समझ से परे है।
लोगों की मांग है कि प्रशासन तत्काल कचरा हटाए और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में पर्यटन स्थल के आसपास किसी भी तरह की डंपिंग न हो। उनका कहना है कि पर्यटकों को क्योटी पहुंचते ही कचरे के ढेर नहीं, बल्कि झरने और हरियाली का अनुभव होना चाहिए।
कलेक्टर बोले- होगी कार्रवाई
मामले में जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से पक्ष जानने पर उन्होंने कार्रवाई की बात कही है। अब सवाल यह है कि जलप्रपात के प्रवेश द्वार से महज 50 मीटर दूर पार्किंग में जमा कई ट्रक कचरा आखिर कब हटेगा और इसे यहां डंप करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी।
क्योटी जलप्रपात जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थल की खूबसूरती बनाए रखने के लिए केवल पर्यटन को बढ़ावा देना पर्याप्त नहीं है। साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, पार्किंग और पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। तभी क्योटी आने वाले पर्यटकों के सामने इस पर्यटन स्थल की पहली तस्वीर कचरे के ढेर की बजाय उसकी प्राकृतिक खूबसूरती की होगी।