Madhya Pradesh: सरकारी कर्मचारियों के पेंशन निराकरण के लिए सख्त समय-सीमा तय

Published on 29 अग॰ 2026

भोपाल, 29 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश शासन ने सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों के वित्तीय हितों को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक प्रशासनिक हस्तक्षेप किया है। संचालनालय पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा द्वारा जारी हालिया आदेश क्रमांक/संफेभनिबी/छ:/स्था/2026/1592 (दिनांक 27/08/2026) के माध्यम से पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए "जीरो टॉलरेंस" की नीति संज्ञापित की गई है। 

MP Government Employees’ Pension Claims to Be Resolved Within Strict Time Limit

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन लाभों में होने वाला विलंब न केवल लोक सेवा गारंटी के सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि यह विभागीय दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन भी है। यह आदेश 01 अप्रैल 2026 से लागू की गई ऑनलाइन व्यवस्था की हालिया समीक्षा के बाद एक सुधारात्मक कदम के रूप में अधिरोपित किया गया है। इस प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के मूल में एक त्रि-स्तरीय (Creator-Verifier-Approver) जवाबदेही ढांचा है, जिसे अब समय-सीमा के कड़े अनुशासनात्मक दायरे में बांध दिया गया है।

नई समय-सीमा का तकनीकी ढांचा और उत्तरदायित्व

पेंशन प्रक्रियाओं के सरलीकरण और मानवीय हस्तक्षेप से उत्पन्न होने वाले विलंब को समाप्त करने के लिए कार्यों का विभाजन 'क्रिएटर', 'वेरीफायर' और 'एप्रूवर' के बीच किया गया है। यह तीन-स्तरीय सत्यापन व्यवस्था एक 'इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट ट्रेल' निर्मित करती है, जिससे किसी भी स्तर पर लंबित फाइल की पहचान तत्काल संभव है। शासन ने इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक चरण के लिए अधिकतम कार्य दिवस निर्धारित कर दिए हैं ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित की जा सके। 

विभागीय समीक्षा के उपरांत निर्धारित की गई नवीन समय-सीमा का विवरण निम्नानुसार है:

नवीन पेंशन प्रकरणों का निराकरण: क्रिएटर 5, वेरीफायर 4 और एप्रूवर के लिए 5 कार्य दिवस।

पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों का निराकरण: क्रिएटर 5, वेरीफायर 3 और एप्रूवर के लिए 3 कार्य दिवस।

वेतन निर्धारण प्रकरणों का निराकरण: क्रिएटर 5, वेरीफायर 3 और एप्रूवर के लिए 3 कार्य दिवस।

समय-सीमा का यह कठोर निर्धारण उन प्रशासनिक विफलताओं का प्रत्यक्ष प्रत्युत्तर है, जो हाल ही में संभागीय और जिला स्तर पर दर्ज की गई थीं। 

संभागीय और जिला कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर शासन की नाराजगी

शासन द्वारा की गई उच्च स्तरीय अनुश्रवण बैठक के निष्कर्षों ने प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती को उजागर किया है। समीक्षा में यह पाया गया कि विशेष रूप से संभागीय और जिला कार्यालयों में कार्यरत 'राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल' (SCPPC) की इकाइयों द्वारा प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

आदेश में आधिकारिक तौर पर "अतिराकृत स्थिति" (Overdue Status) पर गहरी अप्रसन्नता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कतिपय स्तरों पर प्रकरणों का लंबे समय तक लंबित रहना राज्य शासन के उन लोक-कल्याणकारी संकल्पों के विपरीत है, जिनके तहत कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के दिन ही समस्त लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। इसी गतिरोध को तोड़ने के लिए SCPPC की भूमिका को पुनः परिभाषित किया गया है।

SCPPC - राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल की रणनीतिक भूमिका

उल्लेखनीय है कि वित्त विभाग द्वारा 09 जून 2025 को गठित SCPPC ने 01 अप्रैल 2026 से राज्य में पूर्णतः ऑनलाइन पेंशन प्रबंधन की कमान संभाली थी। यह वर्तमान आदेश उसी व्यवस्था को और अधिक धारदार बनाने के लिए जारी किया गया है। SCPPC को अब यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि तकनीकी बाधाओं के नाम पर किसी भी कर्मचारी का हक न रुकने पाए।

SCPPC के तीन प्रमुख विधिक उत्तरदायित्व निम्नलिखित हैं:

नवीन पेंशन प्रकरण: नवीन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामलों का शून्य-विलंब के साथ निष्पादन।

पुनरीक्षित पेंशन स्वीकृति: पेंशन संशोधन से जुड़े जटिल मामलों का त्वरित समाधान।

वेतन निर्धारण अनुमोदन: सेवानिवृत्ति से दो वर्ष पूर्व तक की अवधि के लिए सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए वेतन निर्धारण की विधिक पुष्टि।

आगामी सेवानिवृत्ति (अग्रिम प्रकरणों) के लिए गैर-परक्राम्य निर्देश

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण अंश उन कर्मचारियों से संबंधित है जिनकी सेवानिवृत्ति आगामी माह में संभावित है। शासन ने इन्हें 'अग्रिम प्रकरण' की श्रेणी में रखते हुए वित्त विभाग के पत्र क्रं./एफ/3/2026/नियम/चार/ दिनांक 13/03/2026 का संदर्भ दिया है।

इसके अंतर्गत यह स्पष्ट रूप से आदेशित है कि सेवानिवृत्ति के मुहाने पर खड़े कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों की स्वीकृति 'कंडिका 4(ग)III' के प्रावधानों के अनुसार अनिवार्य समय-सीमा में ही पूर्ण की जाए। इस खंड का उल्लंघन वित्तीय अनियमितता और अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाएगा, जिसके लिए संबंधित एप्रूवर सीधे तौर पर उत्तरदायी होंगे।

मध्य प्रदेश शासन का यह कदम प्रशासनिक उत्तरदायित्व और सुशासन (Good Governance) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का परिचायक है। पेंशन निराकरण के लिए 'डे-काउंट' (Day-Count) आधारित इस समय-सीमा ने नौकरशाही को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति किसी भी प्रकार की शिथिलता अक्षम्य होगी। अनिवार्य समय-सीमा का यह नया अनुशासन न केवल कर्मचारियों के आर्थिक तनाव को दूर करेगा, बल्कि यह राज्य की कार्य-संस्कृति में जवाबदेही के एक नए युग का सूत्रपात भी है। रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी।