सुभाष चंद्रा के आरोप पर रिलायंस ने दी सफाई, कहा- मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी के नुकसान के लिए नहीं किया
Reliance Clarification: जी मीडिया ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस ने अपनी सफाई पेश कर दी है. रिलायंस ने चंद्रा के आरोपों का खंडन किया है. कंपनी ने साफ किया कि उसने मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी के नुकसान के लिए नहीं किया.
Reliance Clarification: जी मीडिया ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस ने अपनी सफाई पेश कर दी है. रिलायंस ने चंद्रा के आरोपों का खंडन किया है. कंपनी ने साफ किया कि उसने मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी के नुकसान के लिए नहीं किया.
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Reliance clarification on Subhash Chandra allegations
Reliance Clarification: जी मीडिया ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस ने अपनी सफाई पेश की है. रिलायंस ने चंद्रा के आरोपों का खंडन किया है. रिलायंस कंपनी ने साफ किया कि उसने मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी के नुकसान के लिए नहीं किया.
दरअसल, हाल ही में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में उनके 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज को घटाकर मात्र 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान पर निपटाने की मंजूरी दी है. इसके बाद यह मामला काफी तूल पकड़ गया. सुभाष चंद्रा पर कई आरोप भी लगे. इस दौरान सुभाष चंद्रा ने आरोप लगाया था कि रिलायंस की ओर से उन पर गलत आरोप लगाते हुए फेक खबरें प्लांट की जा रहीं हैं.
RIL Media Statement pic.twitter.com/rxieVAF9Ek
— Reliance Industries Limited (@RIL_Updates) August 28, 2026
रिलायंस ने खारिज किया आरोप
रिलायंस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि रिलायंस ग्रुप ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की बेबुनियाद टिप्पणियों पर निराशा जताई है. कहा कि हम रिलायंस ग्रुप का हिस्सा रहे मीडिया संस्थानों पर लगाए गए आरोपों और इशारों का पुरजोर खंडन करते हैं.
रिलायंस प्रवक्ता ने कहा कि हमारे मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी भी किसी पर हमला (नुकसान) करने के लिए नहीं किया गया है और न ही कभी किया जाएगा. हम एक बिजनेसमैन और एंटरप्रेन्योर के तौर पर सुभाष चंद्रा का बहुत सम्मान करते हैं. हम उनके अच्छे भविष्य की कामना करते हैं.
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क्या है पूरा मामला?
एस्सेल ग्रुप (जी ग्रुप) के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले में एनसीएलटी के फैसले को लेकर विवाद बढ़ा. एनसीएलटी ने करीब ₹22,006 करोड़ के कर्ज दावों के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाले सेटलमेंट प्लान को मंजूरी दी. इस फैसले के बाद कर्जदाताओं को करीब 99.97% का हेयरकट लेना पड़ा है. यानी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उनके दावे की तुलना में बहुत छोटी रकम ही वापस मिलने की उम्मीद है. बताया जा रहा है कि 80% से ज्यादा कर्जदाताओं की सहमति के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली.
इस मामले में सुभाष चंद्रा की दलील है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर बैंकों से ₹22 हजार करोड़ का कर्ज नहीं लिया था. उनका कहना है कि उन्होंने एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए पर्सनल गारंटी दी थी. उनके मुताबिक, कंपनियां पहले ही कर्ज का बड़ा हिस्सा चुका चुकी हैं, इसलिए उनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर किया गया दावा काफी कम होना चाहिए. हालांकि, कुछ बड़े कर्जदाताओं ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है. HDFC Bank, LIC Housing Finance और Canara Bank जैसे संस्थानों ने इतनी कम रिकवरी का विरोध किया है.
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