मुंबई: MPSC paper leak: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। 22 मार्च को आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितता के आरोप सामने आने के बाद आयोग ने यह फैसला लिया। मामले की जांच के दौरान मुंबई पुलिस की अपराध जांच शाखा को प्रथम दृष्टया संकेत मिले कि परीक्षा से पहले एक अभ्यर्थी तक प्रश्नपत्र पहुंचा था और उसने इसका फायदा उठाया।
आयोग का बड़ा फैसला
MPSC ने मंगलवार को भर्ती प्रक्रिया रद्द कर नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया। आयोग के मुताबिक, यह कदम सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष और समान अवसर देने के साथ परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी था। इस फैसले का असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ेगा, जो पहले परीक्षा में सफल हुए और इंटरव्यू तक पहुंचे थे। यानी पहले जारी परिणाम और उसके आधार पर हुई चयन प्रक्रिया अब मान्य नहीं रहेगी। हालांकि, पात्र अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। नई परीक्षा के लिए उनसे कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।
506 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए हुए थे पात्र
ड्रग इंस्पेक्टर पदों की भर्ती प्रक्रिया 29 जुलाई 2025 को जारी विज्ञापन के साथ शुरू हुई थी। इसके तहत 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह संभागीय मुख्यालयों पर ऑफलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा कराई गई थी। परीक्षा का परिणाम 12 जून को जारी किया गया था। इसके बाद कुल 506 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए योग्य पाए गए। इनमें से 488 अभ्यर्थी एक से 22 जुलाई के बीच आयोजित साक्षात्कार में शामिल हुए। इंटरव्यू पूरा होने के बाद आयोग ने 488 उम्मीदवारों की अस्थायी सामान्य मेरिट सूची भी जारी की थी। इस सूची में 485 अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए पात्र, जबकि तीन को अपात्र घोषित किया गया था। अब पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद इन उम्मीदवारों को भी नई परीक्षा में शामिल होना होगा।
जुलाई में सामने आईं पेपर लीक की शिकायतें
परीक्षा को लेकर अनियमितता की शिकायतें 22 से 26 जुलाई के बीच आयोग के पास पहुंचीं। कुछ अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों ने ई-मेल के जरिए आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उसमें शामिल प्रश्नों की जानकारी मिल गई थी। शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि परीक्षा से संबंधित सामग्री बाद में सोशल मीडिया और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर उपलब्ध पाई गई। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने मामले की जांच कराने का फैसला किया।
MPSC ने मुंबई पुलिस से मांगी जांच
आयोग ने 27 जुलाई को मुंबई पुलिस आयुक्त से मामले की जांच करने का अनुरोध किया। इसके बाद मुंबई पुलिस की अपराध जांच शाखा ने प्रारंभिक जांच शुरू की। अपराध जांच शाखा के पुलिस उपायुक्त ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट आयोग को सौंपी। रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया यह संकेत मिला कि परीक्षा से पहले एक अभ्यर्थी को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था और उसने इसका लाभ उठाया। इसी जांच के आधार पर भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए। इसके बाद आयोग ने पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया।
छह लोग गिरफ्तार
पेपर लीक मामले की जांच के दौरान मुंबई पुलिस ने बुधवार को छह लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के तीन अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र किस तरह बाहर पहुंचा और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। आयोग की ओर से दोबारा परीक्षा कराने का फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब भर्ती प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका था। नई परीक्षा के जरिए आयोग अब सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की कोशिश करेगा।
पारदर्शिता पर जोर
पेपर लीक की शिकायतों ने न केवल इस भर्ती प्रक्रिया बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। MPSC ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा दोबारा कराने का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह के संदेह को दूर करना और उम्मीदवारों का आयोग पर भरोसा बनाए रखना है। अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पेपर लीक का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र किस स्तर पर लीक हुआ। वहीं, नई परीक्षा की तारीख और अन्य जरूरी जानकारी आयोग की ओर से अलग से जारी की जाएगी।