Raksha Bandhan Kab Hai: ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा ने इस साल राखी को लेकर हो रही सभी कंफ्यूजन को दूर कर दिया है. रक्षाबंधन हर वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. मगर इस वर्ष पूर्णिमा तिथि दो दिन के मौके पर पड़ रही है. आज यानी 27 अगस्त 2026 को पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ हो चुका है. इस तिथि की शुरुआत सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर हुआ था. लेकिन आज के दिन राखी नहीं बांधी जाएगी. उदया तिथि के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 को शुक्रवार के दिन राखी बांधी जाएगी.
रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं डालेगा बाधा
28 अगस्त को बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती है. इस दिन पूर्णिमा तिथि रहेगी लेकिन भद्रा समाप्त हो चुका है. दरअसल, राखी के मौके पर भद्रा के समय का ध्यान रखना सबसे जरूरी होता है. इस साल 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव सुबह 9:08 से लेकर रात 9:32 तक रहेगा. इसलिए, इस दिन ही भद्रा समाप्त हो रहा है. यानी की राखी के दिन आप बिना किसी बाधा के राखी पूरे दिन बांध सकते हैं.
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रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त (Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat)
द्रिक पंचांग के अनुसार, राखी बांधने का पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक होगा. वहीं, सुबह 10:12 मिनट से लेकर दोपहर 12:20 तक राहुकाल का समय रहेगा. इसलिए, आपको इस समय राखी नहीं बांधनी चाहिए. यदि आप सुबह राखी नहीं बांध पा रहे हैं तो अभिजीत मुहूर्त और शाम के समय राखी बांध सकते हैं.
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:25 से सुबह 05 बजकर 11 मिनट तक
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11:50 से दोपहर 12:40 तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:33 से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक
- अमृत काल- शाम 07:44 से रात 09:23 तक
- शुभ चौघड़िया- दोपहर 12:28 से 2:03 तक
- अपराह्न काल- दोपहर 1:44 से शाम 4:16 तक
- चर चौघड़िया- शाम 5:13 से शाम 6:48 तक
रक्षाबंधन पर बन रहे हैं कई शुभ योग
इस वर्ष रक्षाबंधन पर ज्योतिषीय दृष्टि से खास संयोग बन रहे हैं. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस साल राखी पर करीब 11 संयोगों को निर्माण हो रहा है. इस दिन शतभिषा नक्षत्र के साथ अतिगंड, शोभन, शिव और विजय जैसे योगों का निर्माण हो रहा है. इसके अलावा, चंद्रादि, बुधादित्य, विमल, विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी, शकट और सुनफा योग का संयोग बन रहा है.
इन शुभ योगो में राखी बांधने से, पूजा-पाठ करने से, दान और भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र जैसे धार्मिका कार्यों को करना चाहिए. रक्षाबंधन के दिन ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस दिन सूर्य सिंह राशि में रहेंगे, गुरु में कर्क राशि रहेंगे. वहीं, ज्योतिष में सूर्य का आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक होता है. वहीं गुरु को ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि और समृद्धि से जोड़ा जाता है. चंद्रमा कुंभ राशि में है. ऐसे में ग्रहों और नक्षत्रों का संयोग रक्षाबंधन को और पवित्र माना जाता है.
रक्षाबंधन पर पूजा कैसे करें?
रक्षाबंधन पर सबसे पहले आपको सुबह स्नान आदि करना है और फिर घर के मंदिर की सफाई करनी है. इस दिन सबसे पहले सुबह भगवान गणेश, भगवान विष्णु और अपने इष्टदेव को राखी बांध सकते हैं. इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठे, भाई के सिर पर रुमाल रखें और भाई को आसन पर बिठाएं. बहन भाई के माथे पर कुमकुम का टीका लेकर आए और अक्षत लगाए. भाई की दाहिनी कलाई पर मंत्र बोलते हुए रक्षासूत्र बांधे. भाई की आरती करें और उनकी नजर उतारें. इसके बाद मुंह मीठा करें और छोटे भाई को आशीर्वाद दें. अगर भाई बड़ा है तो उनके चरण स्पर्श कर लें. भाई बहन को सुरक्षा का वचन दें.
रक्षासूत्र बांधते समय मंत्र जाप करें
हिंदू धर्म में रक्षाबंधन की मान्यता बहुत खास होती है. ऐसे में आप जब अपने भाई को राखी बांधते है तो उस समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए. येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)