
'आई फॉर एन आई' ऑपरेशन (Getty Image)Image Credit source: getty image
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. ईरान ने दावा किया है कि उसने ‘आंख के बदले आंख’ (Eye for an Eye) नाम से सैन्य अभियान शुरू करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं. ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है. इस दावे के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंका फिर तेज हो गई है. अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक बार फिर खुले सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है.
अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है. दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि अमेरिका इस हमले का क्या जवाब देता है और क्या यह घटनाक्रम बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है. ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस अभियान के तहत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.
नुकसान की ऑफिशियल कंफर्मेशन नहीं
ईरान ने दावा किया कि उसका उद्देश्य उन ठिकानों को जवाब देना था, जहां से उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई थी. हालांकि, इस खबर के सामने आने तक अमेरिका की ओर से हमलों के नुकसान की ऑफिशियल कंफर्मेशन नहीं की गई है. कहा जा रहा है कि अगर दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ेगा. होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग पहले ही तनाव के केंद्र में हैं.
- ईरान ने Eye for an Eye ऑपरेशन शुरू करने का दावा किया.
- खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों की बात कही गई.
- अमेरिका की ओर से नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
- तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.

तनाव बढ़ने से क्या होगा? (Getty Image)
क्या है ‘आंख के बदले आंख’ ऑपरेशन?
ईरान ने इस सैन्य कार्रवाई को Eye for an Eye नाम दिया है. इस नाम का सीधा संदेश है कि वह अपने खिलाफ हुई हर सैन्य कार्रवाई का जवाब देगा. ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि अगर उसकी देश की सुरक्षा या उसके सैन्य ठिकानों पर हमला होगा, तो वह जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. इसी नीति के तहत उसने पहले भी कई बार जवाबी कार्रवाई की घोषणा की है. इस दावे के बाद मध्य पूर्व में तनाव फिर बढ़ गया है और आशंका जताई जा रही है.
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
ईरानी मीडिया का दावा है कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन-किन ठिकानों पर हमला हुआ और कितना नुकसान हुआ. अमेरिका की ओर से भी फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. ऐसे मामलों में शुरुआती दावों और वास्तविक नुकसान के बीच अंतर हो सकता है, इसलिए आगे आने वाले आधिकारिक बयानों पर नजर रहेगी.
अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि उसने ‘आई फॉर एन आई’ (आंख के बदले आंख) अभियान के तहत जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. IRGC के मुताबिक, पहले चरण में जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए. दूसरे चरण में बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर हमला कर हेलीकॉप्टर और ड्रोन सुविधाओं को निशाना बनाया गया. तीसरे चरण में कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस और अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर हमले का दावा किया गया. ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है और अभियान अभी जारी है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य ठिकाने (Paula Bronstein/Getty Images)
क्यों बढ़ी इस मामले में चिंता?
खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम केंद्र माना जाता है. यहीं से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है. अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है. भारत जैसे देश, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी से पूरा करते हैं, वे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं.
पहले भी हो चुकी हैं जवाबी कार्रवाइयां
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने बदले के लिए सैन्य कार्रवाई का दावा किया हो. जनवरी 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं. अप्रैल 2024 में दमिश्क स्थित ईरानी दूतावास पर हमले के बाद भी ईरान ने पहली बार सीधे अपनी जमीन से इजराइल पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे. इससे साफ है कि ईरान अपनी सुरक्षा नीति में जवाबी कार्रवाई को महत्वपूर्ण रणनीति मानता है.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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