आलू बेचकर रुपए इकट्ठा किए, दोस्त के नोटस से पढ़ा: अब अल्ताफ डॉक्टर बनेगा, नीट के काउंसलिंग प्रोसेस में ले रहा हिस्सा - Kota News
Published on 26 अग॰ 2026
आलू बेचकर रुपए इकट्ठा किए, दोस्त के नोटस से पढ़ा:अब अल्ताफ डॉक्टर बनेगा, नीट के काउंसलिंग प्रोसेस में ले रहा हिस्सा
कोटा2 घंटे पहले
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नीट का रिजल्ट आने के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है। वहीं रिजल्ट आने के बाद कई स्टूडेंटस के प्ररेणादायक किस्से भी सामने आ रहे हैं। ऐसा ही किस्सा सामने आया है उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की नवाबगंज तहसील के रहने वाले अल्ताफ हुसैन का, जिसने 8वें प्रयास में नीट क्रेक की है। उसके 563 नंबर आए हैं। इसके साथ ही उसने डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर लिया है।
12वीं पास करने के बाद अल्ताफ अपने पिता के साथ सड़क किनारे आलू की फड़ पर बैठने लगे थे। जिंदगी सामान्य ढर्रे पर चल रही थी, लेकिन एक रात मंडी से आलू लाते वक्त उनके बड़े भाई का भीषण एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे ने अल्ताफ को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि जिंदगी को यूं ही सीमित नहीं रखा जा सकता और इसी मोड़ से उनके मन में डॉक्टर बनने की अलख जगी।
अल्ताफ हुसैन का जिसने 8वें प्रयास में नीट क्रेक की है। उसके 563 नंबर आए है।
दोस्तों के नोट्स से पढ़ाई, कोटा जाने के लिए बेचे आलू
आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि सीधे किसी बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट की फीस दी जा सके। अल्ताफ ने 2019 में पहली बार बिना किसी कोचिंग के नीट का पेपर दिया और 323 नंबर आए। इसके बाद उसने लगातार अपनी तैयारी जारी रखी। कस्बे के जो स्टूडेंट्स कोटा से पढ़कर जाते उनसे स्टडी मैटेरियल, नोट्स लेकर और ऑनलाइन लेक्चर देखकर पढ़ाई करता रहा।
साल 2022 में उसने 516 नंबर हासिल किए, जबकि 2023 और 2024 में नंबर बढ़कर 590 तक पहुंच गए। हालांकि, उस समय कटऑफ ज्यादा रहने से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल सका। 2025 में 501 अंक प्राप्त हुए। यूपी बोर्ड से 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए।
नीट रिजल्ट के बाद अब काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है। अल्ताफ काउंसलिंग में भाग ले रहा है।
2 कमरों का मकान और 12 सदस्यों का परिवार
अल्ताफ की पारिवारिक पृष्ठभूमि संघर्षों से भरी है। उनके पिता इकबाल हुसैन अंसारी केवल 9वीं तक पढ़े हैं और मां कुबरा निरक्षर (पढ़ी नहीं) हैं। 2015 तक परिवार कच्चे मकान में रहता था। बाद में बने 2 कमरों के पक्के मकान में परिवार के 12 सदस्य रहते थे। आठ बहनों की शादी और सीमित आमदनी के कारण पिता कभी बचत नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने बेटे के सपने को टूटने नहीं दिया।
अल्ताफ के पिता इकबाल हुसैन ने भावुक होते हुए कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा डॉक्टर बनेगा। हम आलू बेचकर गुजारा करते हैं। अल्ताफ ने मेहनत की और हमने जितना बन पड़ा, सहयोग किया।
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