एन. रघुरामन का कॉलम: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी नेचुरल इंटेलिजेंस को खत्म कर रही है?

Published on 18 अग॰ 2026

एन. रघुरामन का कॉलम:क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी नेचुरल इंटेलिजेंस को खत्म कर रही है?

23 मिनट पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

वह ग्रेजुएट नहीं था, लेकिन स्मार्टफोन चलाने में माहिर था। उसके पास हर सवाल का जवाब था, क्योंकि वह एआई पर निर्भर था। एक दिन उसे अपनी बेरोजगारी का जवाब भी मिल गया। एआई के जरिए उसकी समस्या के बारे में जानने वाले किसी व्यक्ति ने उसे 1200 डॉलर की मासिक सैलरी पर विदेश में डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी ऑफर की।

उसे दो लाख रुपए का कर्ज लेकर एजेंट को देने के लिए मजबूर किया गया। उसने पत्नी की आखिरी ज्वेलरी बेचकर ऐसा किया। वह 2023 की शुरुआत में बैंकॉक पहुंचा। श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों के लोगों समेत करीब 40 युवक-युवतियां उसके साथ थे और उन्हें तुरंत पश्चिमी थाईलैंड के शहर माए सोत भेज दिया गया। वहां उन्होंने खुद को चीनी बोलने वाले गैंग-मास्टर्स द्वारा संचालित कैंप में पाया, जिसके चारों तरफ ऊंची दीवारें, कंटीले तार और हथियारबंद गार्ड तैनात थे।

24 साल का वह व्यक्ति बेहतर जिंदगी चाहता था, लेकिन म्यांमार के जंगल में फंस गया। अकेले और अमीर लोगों को तथाकथित रोमांस स्कैम में फंसा कर उनसे बड़ी रकम ऐंठने से उसने इनकार किया तो उसे टॉर्चर किया गया। उन्होंने उसके कपड़े उतरवा लिए और कुर्सी पर बैठा कर इलेक्ट्रिक शॉक दिए।

उसे लगा कि अब जिंदगी खत्म है। उनकी बात न मानने के कारण उसे 16 दिन कोठरी में काटने पड़े। वे उसे सिर्फ पानी देते थे। कुछ समय पहले कुछ लोगों को बचाया गया। फिर भी संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि करीब तीन लाख लोग इस ‘पिग बुचरिंग’ इन्वेस्टमेंट स्कैम में कार्यरत हैं। इस शब्द का भावार्थ है कि ठग कैसे पहले अपने शिकार का भरोसा जीतते हैं और फिर उसे सारा पैसा फर्जी निवेश में लगाने के लिए राजी कर लेते हैं।

सोमवार को मैंने यह कहानी कॉलेज लाइफ में प्रवेश कर रहे स्टूडेंट्स से साझा की। हॉल में बैठे हुए वे उनसे पूछी जा रही हर जानकारी के लिए गूगल सर्च कर रहे थे। वे सोशल मीडिया से राय ले रहे थे और सारे विषय विशेषज्ञ उन्हें यूट्यूब पर ही मिल रहे थे।

उन्हें लगता था कि वे बहुत ज्यादा जानते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें नहीं पता था कि ‘वे कितना कम जानते हैं।’ क्या वे कम इंटेलिजेंट थे? बिल्कुल नहीं, क्योंकि स्कूल परीक्षा में वे अच्छे अंकों से पास हुए थे। तो ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने हर काम के लिए एआई की मदद लेना शुरू कर दिया?

इंटेलिजेंस को कहीं और खोजकर उन्होंने अपनी नेचुरल इंटेलिजेंस को काम से बचने का मौका दे दिया। और उसने भी खुशी-खुशी इसे स्वीकार कर लिया- इसे लत कहते हैं। वे सोचने लगे कि जब ऐसे काम करने के लिए गूगल है तो कोई भी चीज क्यों याद रखी जाए।

मैंने उन्हें सलाह दी कि नॉलेज के लिए सूचना के साथ माथापच्ची करनी पड़ती है। उस पर सवाल उठाने पड़ते हैं, कनेक्ट करना पड़ता है, उसके अंशों को खारिज करना पड़ता है, तर्क करने पड़ते हैं, उसे अनुभव करना पड़ता है। कभी-कभी तो सामने आता है कि कल तक जिसे लेकर आप पूरी तरह आश्वस्त थे, वह तो बकवास थी। एआई इस माथापच्ची को बहुत घटा देती है।

फिर मैंने उनसे 22 मिनट की डॉक्यूमेंट्री ‘स्कैम स्लेव : फ्रॉम हेल टु होम’ देखने को कहा। यह एक अवॉर्ड विनिंग शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री है, जिसे टिमोथी ब्लैकवुड ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया है। इसमें युगांडा के एक बेहद गरीब गांव के 25 वर्षीय युवक गिडियन म्वेसेजी की दिल दहलाने वाली रियल-लाइफ स्टोरी है।

वह मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी का शिकार बना। फिल्म ने एंथम फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री का ग्रैंड प्राइज जीता। इस साल 5 अगस्त को रोड आइलैंड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसका ईस्ट कोस्ट प्रीमियर हुआ था।

फिर मैंने उनसे कहा कि जब असल जिंदगी कोई अस्पष्ट-सी परिस्थिति पैदा करती है तो एआई पर निर्भर अधिकतर लोग घिर जाते हैं। जैसे, कोई नैतिक दुविधा, अधूरी जानकारी, विरोधाभासी साक्ष्य या ऐसी समस्या- जिसका सामना पहले किसी ने नहीं किया। इसलिए एआई के दौर में असली स्किल यह जानना है कि कब प्रॉम्प्ट नहीं करना है।

फंडा यह है कि कभी-कभार पूरी किताब पढ़िए, किसी चीज का हिसाब दिमाग में लगाइए और तुरंत सर्च किए बगैर भी किसी मुश्किल स्थिति का जवाब सोचिए। अपने दिमाग को मशक्कत करने दीजिए, ताकि आप अपनी नेचुरल इंटेलिजेंस को खत्म न कर दें।

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