CBI-अदालत का अफसर बन किया डिजिटल अरेस्ट, कारोबारी से ऐंठे 7 करोड़; कोलकाता से मास्टर हैंडलर को ED ने दबोचा

Published on 1 अक्टू॰ 2026

डिजिटल अरेस्ट के जरिए लुधियाना के कारोबारी एसपी ओसवाल से 7 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने 28 सितंबर को पश्चिम बंगाल में तीन ठिकानों पर छापेमारी की और कोलकाता से सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया. कोर्ट ने उसे सात दिन की ED हिरासत में भेज दिया है। वह 6 अक्टूबर तक ED की कस्टडी में रहेगा.

ED के मुताबिक, यह मामला लुधियाना साइबर क्राइम थाने में दर्ज FIR से शुरू हुआ था. जांच के दौरान इसी गिरोह से जुड़े डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के नौ अन्य मामलों को भी जांच में शामिल किया गया.

CBI और कोर्ट का अफसर बनकर किया था डिजिटल अरेस्ट

जांच में सामने आया कि ठगों ने खुद को CBI और न्यायपालिका का अधिकारी बताकर एसपी ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट किया था. इसके बाद उनसे करीब 7 करोड़ रुपये ऐंठ लिए गए. ठगी की रकम पहले रिग्गलो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों में पहुंचाई गई.

ED को जांच में पता चला कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में भेजा जाता था. इसके लिए ‘AMMFORWARD’ नाम का APK एप्लिकेशन इस्तेमाल किया गया था.

नेपाल बैठे साथियों को OTP तक पहुंचा

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में सोहेल अख्तर की अहम भूमिका थी. वह कथित तौर पर लोगों को जोड़कर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ के तौर पर करवाता था. ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को आगे भेजने के लिए किया जाता था.

ED के अनुसार, कुछ मोबाइल फोन में पहले से APK फाइल डाउनलोड रहती थी. इनमें बैंक खातों से जुड़े सिम लगाए जाते थे. APK एक्टिवेट होने के बाद नेपाल में बैठे गिरोह के साथी इन मोबाइल से OTP और बैंक के SMS तक हासिल कर लेते थे. इससे ठगी की रकम को कुछ ही समय में दूसरे खातों में ट्रांसफर करना आसान हो जाता था.

क्रिप्टो में मिलता था कमीशन

ED की जांच में यह भी सामने आया कि सोहेल और उसके सहयोगी विदेशी लोगों को कई म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे. इसके बदले उन्हें क्रिप्टोकरेंसी के रूप में कमीशन मिलता था. यह रकम सोहेल के Binance खाते या उसके सहयोगियों के Binance खातों में भेजी जाती थी.

ठगी की रकम को कई बैंक खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में भेजा जाता था. इनमें से कुछ खातों से 2 से 5 लाख रुपये तक की रकम तुरंत कैश निकाल ली जाती थी. इसके बाद नकदी से वर्चुअल डिजिटल एसेट खरीदे जाते थे और कमीशन काटकर ये क्रिप्टो विदेशी लोगों के खातों में भेज दी जाती थी.

नौकरी और लोन का झांसा देकर खुलवाते थे खाते

ED के मुताबिक, गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी या लोन दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था. इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से मिली रकम को छिपाने और आगे भेजने में किया जाता था.

जांच में कई करोड़ रुपये की रकम को शेल कंपनियों और दूसरे बैंक खातों के जरिए घुमाने और विदेश भेजने की बात भी सामने आई है. इसके लिए ट्रेड बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा लिए जाने का आरोप है. गिरोह के सदस्य एक-दूसरे से म्यूल खातों की जानकारी साझा करने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मोबाइल मैसेजिंग ऐप का भी इस्तेमाल करते थे.

अब तक तीन गिरफ्तार, 1.76 करोड़ की संपत्ति अटैच

ED इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. सोहेल अख्तर उर्फ राजू को 28 सितंबर 2026 को, रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 और अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था.

ED ने 14 फरवरी 2026 को करीब 1.76 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने का आदेश भी जारी किया था. इसके अलावा 19 फरवरी 2026 को रूमी कलिता, अर्पित राठौर, आनंद चौधरी, अतनु चौधरी और उनकी कंपनी फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई थी. मामले में ED की आगे की जांच जारी है.

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जितेन्द्र कुमार शर्मा

जितेन्द्र कुमार शर्मा

साल 2002 से क्राइम और इन्वेस्टिगेशन रिपोर्टिंग का अनुभव। नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, शाह टाइम्स के अलावा टीवी मीडिया में BAG Films के नामी शो सनसनी और रेड अलर्ट में काम किया। उसके बाद न्यूज 24, इंडिया टीवी में सेवाए दी और टीवी 9 भारतवर्ष के साथ सफर जारी है।

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