पीएम विश्वकर्मा योजना में मिल रहा दैनिक स्टाइपेंड और आर्थिक संबल, जानिए पात्रता और फायदे

Published on 17 अग॰ 2026

PM Vishwakarma Yojana: हमारे समाज में सदियों से पारंपरिक हुनर और हाथों की कला से अपनी आजीविका चलाने वाले कामगार देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रहे हैं. मिट्टी के बर्तन बनाने वाले से लेकर लोहे को आकार देने वाले और सिलाई-कढ़ाई करने वाले तक, ये सभी मेहनतकश अपने कौशल से स्थानीय बाजार को जीवंत बनाए रखते हैं. इन हुनरमंद हाथों को आधुनिक पहचान और वित्तीय मजबूती देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना का संचालन कर रही है. यह योजना न केवल पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षण देती है, बल्कि कारीगरों को आधुनिक तकनीक और पर्याप्त पूंजी से जोड़कर उनके कारोबार को विस्तार देने का अवसर भी प्रदान करती है.

पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तराशना

इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे प्रमुख पहलू यह है कि इसमें कारीगरों के पुस्तैनी हुनर को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा जाता है. सरकार का मानना है कि पारंपरिक कारीगरों के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक मशीनों और उन्नत तरीकों की जानकारी न होने से वे बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते हैं. इसी कमी को दूर करने के लिए योजना के तहत लाभार्थियों को बुनियादी और एडवांस स्तर का विशेष कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की सबसे अच्छी बात यह है कि प्रशिक्षण के दौरान कारीगर की दैनिक मजदूरी का नुकसान न हो, इसके लिए प्रतिदिन पांच सौ रुपये का स्टाइपेंड भी सरकार सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है.

आधुनिक औजारों की खरीद के लिए मिलता है अनुदान

हुनर सीखने के साथ ही काम को गति देने के लिए आधुनिक उपकरणों का होना बेहद जरूरी होता है. कई बार आर्थिक तंगी के कारण छोटे कामगार जरूरी टूलकिट नहीं खरीद पाते हैं. पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक पात्र कामगार को पंद्रह हजार रुपये का टूलकिट प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है. इस आर्थिक मदद से लाभार्थी अपने व्यवसाय के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक औजार खरीद सकते हैं. जब काम में आधुनिक औजारों का उपयोग होता है, तो काम की गति बढ़ जाती है और उत्पाद की फिनिशिंग भी बाजार के मानकों के अनुकूल बेहतर हो जाती है.

कम ब्याज दर पर आसान लोन से शुरू करें अपना काम

अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए पूंजी सबसे बड़ी आवश्यकता होती है. छोटे कारीगरों को अक्सर बैंक से बिना गारंटी के लोन मिलना कठिन होता है. इस समस्या का समाधान करते हुए सरकार इस योजना में कोलेटरल फ्री यानी बिना किसी गारंटी के बहुत ही सस्ती ब्याज दर पर तीन लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराती है. यह सहायता दो चरणों में प्रदान की जाती है. पहले चरण में कामगार को एक लाख रुपये का लोन दिया जाता है, जिसे अठारह महीनों की आसान किस्तों में चुकाना होता है. इस लोन का समय पर पुनर्भुगतान करने के बाद दूसरे चरण में दो लाख रुपये का अतिरिक्त लोन मिल जाता है, जिसे तीस महीनों की अवधि में वापस करना होता है.

योजना के दायरे में शामिल हैं कई पारंपरिक कार्य क्षेत्र

इस योजना का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों के कामगारों तक पहुंचाने के लिए अठारह प्रमुख पारंपरिक ट्रेड को इसके दायरे में शामिल किया गया है. लकड़ी का काम करने वाले बढ़ई, नाव बनाने वाले और लोहे को आकार देने वाले लोहार इस योजना के लिए पूरी तरह पात्र हैं. इसके अलावा ताला बनाने वाले, पारंपरिक अस्त्रकार, हथौड़ा और टूलकिट बनाने वाले कारीगर भी इसका पूरा फायदा उठा सकते हैं. निर्माण क्षेत्र से जुड़े राजमिस्त्री, पत्थर तोड़ने वाले और पत्थर तराशकर शानदार मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकारों को भी इस योजना के तहत व्यापक लाभ दिया जाता है.

रोजमर्रा की सेवाएं देने वाले कारीगर भी हैं पूरी तरह पात्र

गांव और शहरों में दैनिक स्तर पर अपनी सेवाएं देने वाले अनगिनत मेहनतकश लोग भी इस योजना का हिस्सा बन सकते हैं. बाल काटने वाले नाई, कपड़े धोने वाले धोबी और सिलाई का काम करने वाले दर्जी इस योजना में आवेदन कर आर्थिक सहायता ले सकते हैं. चमड़े का काम करने वाले मोची और जूता बनाने वाले कारीगरों के साथ-साथ टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले दस्तकार भी इसके दायरे में आते हैं. वहीं माला बनाने वाले मालाकार, पारंपरिक गुड़िया और खिलौना निर्माता तथा मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले कारीगर भी योजना के जरिए अपने कार्य को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं.

हुनरमंदों के उज्ज्वल भविष्य की राह

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सही मायनों में उन मेहनतकश हाथों का सम्मान है, जो अपनी मेहनत से समाज को सुंदर और उपयोगी वस्तुएं प्रदान करते हैं. वित्तीय सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण, मुफ्त टूलकिट अनुदान और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं मिलकर कारीगरों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराती हैं. यह योजना न केवल कारीगरों की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर देश के आर्थिक विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित कर रही है. पात्र व्यक्ति अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र के माध्यम से इस कल्याणकारी योजना में आसानी से आवेदन कर सकते हैं.

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