सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा जीरो करने की दिशा में काम कर रहा राजमार्ग मंत्रालय, नितिन गडकरी ने बताया प्लान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या शून्य करने की दिशा में काम कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक इसे आधा करन ...और पढ़ें

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी।
HighLights
सरकार का लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतें आधी करना।
2025 में 5.13 लाख दुर्घटनाओं में 1.83 लाख से अधिक मौतें।
दोपहिया वाहन चालकों की मौतें सर्वाधिक, हेलमेट पहनना अनिवार्य।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या जीरो पर लाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसके लिए अधिक दुर्घटनाओं वाले 100 जिलों की पहचान कर वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या आधी करना है। साथ ही कहा कि सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराना सबसे बड़ी चुनौती है।
एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 5.3 प्रतिशत बढ़कर 5.13 लाख से अधिक हो गई। इन दुर्घटनाओं में 1,83,382 लोगों की मौत हुई यानी औसतन हर घंटे 21 लोगों की जान गई। इस दौरान देश में हर घंटे औसतन 59 सड़क दुर्घटनाएं हुईं।
गडकरी ने कहा कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस विभागों ने देशभर में 2,85,770 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़े मामलों में हुईं। इसके बाद कार, टैक्सी, वैन और अन्य हल्के मोटर वाहनों तथा ट्रकों का स्थान रहा।
गडकरी ने कहा कि यदि दोपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनना सुनिश्चित करें तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि कुल मौतों में दोपहिया वाहन चालकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 46.2 प्रतिशत रही। इसके बाद पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी 20.6 प्रतिशत रही।
गडकरी ने कहा कि जब उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री का पद संभाला था तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि देश में वाहन उद्योग ने अब तक 4.50 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है और यह जीएसटी के रूप में केंद्र और राज्य सरकारों को सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों में शामिल है।