तुर्की नाटो मेंबर है, फिर पाकिस्तान-सऊदी के रक्षा समझौते में क्यों शामिल हुआ?

Published on 9 अग॰ 2026

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, इजराइल-ईरान के बीच संभावित युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच तीन बड़े मुस्लिम देशों सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर दस्तखत किए हैं. शुक्रवार को सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में ‘मक्का जॉइंट डेररेंस एग्रीमेंट’ पर मुहर लगी. इस समझौते पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साइन किए. इस समझौते की सबसे खास बात इसकी वह शर्त है जो नाटो (NATO) की याद दिलाती है, किसी एक देश पर सशस्त्र हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा.

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तुर्की नाटो मेंबर है, फिर इस समझौते में क्यों?

तुर्की पहले से ही नाटो का अहम सदस्य है, उसके पास नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना है. ऐसे में उसका इस नए समझौते में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं.

  • तुर्की और सऊदी अरब, दोनों ही अमेरिका पर अपनी सुरक्षा निर्भरता कम करना चाहते हैं. उनका मानना है कि अब सिर्फ अमेरिकी भरोसे नहीं रहा जा सकता.
  • ईरान युद्ध और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की नीतियों से खाड़ी देशों को अमेरिकी सुरक्षा पर संदेह बढ़ा है
  • NATO कमजोर पड़ने की स्थिति में यह समझौता तुर्किये को वैकल्पिक सुरक्षा ढांचा दे सकता है. तुर्की मिडिल ईस्ट और इस्लामी दुनिया में अपनी पकड़ और कूटनीतिक ताकत को मजबूत करना चाहता है.
  • तुर्की की डिफेंस इंडस्ट्री (ड्रोन और हथियार) तेजी से बढ़ रहा है. सऊदी अरब एक बड़ा खरीददार है, जो हथियारों के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम करके तुर्की और खुद की मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रहा है.
  • खाड़ी देशों के पास पैसा और हथियार हैं, लेकिन परमाणु क्षमता नहीं. इजराइल के पास परमाणु हथियार है, इसलिए सऊदी और तुर्किये पाकिस्तान को साथ लेकर दिखाना चाहते हैं कि वह भी परमाणु हमले का जवाब दे सकते हैं.
  • मक्का एग्रीमेंट में पाकिस्तान का न्यूक्लियर शील्ड शामिल नहीं है, फिर भी पाकिस्तान अरब देशों को न्यूक्लियर शील्ड देने की बात कर चुका है.

समझौते में क्या-क्या शामिल है?

यह समझौता सिर्फ सैन्य मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तीनों देशों की अलग-अलग ताकतों का एकीकरण है.

  1. सऊदी अरब: दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक, जिसके पास अपार वित्तीय ताकत और कूटनीतिक प्रभाव है.
  2. तुर्की: नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना और एडवांस रक्षा-औद्योगिक क्षमता .
  3. पाकिस्तान: दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न मुस्लिम देश, जिसके पास विशाल और अनुभवी सेना है.

समझौते के तहत खुफिया जानकारी साझा करने, रक्षा उत्पादन में सहयोग, और आतंकवाद से निपटने पर भी जोर दिया गया है.

क्या यह इस्लामिक नाटो है?

इस समझौते को नाटो-स्टाइल कहा जा रहा है, लेकिन यह नाटो के बराबर नहीं है. नाटो के आर्टिकल 5 की तरह इसमें भी एक पर हमला, सब पर हमला का नियम है. नाटो के पास दशकों पुरानी मिलिट्री प्लानिंग, एक स्थायी कमांड स्ट्रक्चर और स्पष्ट सैन्य प्रतिक्रिया तंत्र है. मक्का समझौते में अभी तक यह साफ नहीं है कि हमले की स्थिति में कौन सा देश कितनी और किस तरह की सैन्य टुकड़ी भेजेगा.

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यह समझौता अभी क्यों हुआ?

इस समझौते की बातचीत 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमास के हमले और गाजा युद्ध के बाद शुरू हुई थी. हाल ही में अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के बढ़ते टकराव ने इसे और रफ्तार दी. सऊदी अरब, जो अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करता है, खुद पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (यमन) और इराक के चरमपंथियों के हमलों का खतरा महसूस कर रहा है.

ईरान और इजराइल की प्रतिक्रिया

  1. आधिकारिक तौर पर ईरान चुप है, लेकिन ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने तंज कसते हुए कहा कि सऊदी को समझना चाहिए कि कागजी समझौता सुरक्षा नहीं दे सकता. उन्हें दूसरों से सुरक्षा की भीख मांगने के बजाय अपनी नीतियां सुधारनी चाहिए.
  2. इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने कोई टिप्पणी नहीं की है. हालांकि, पूर्व इजराइली PM नफ्ताली बेनेट पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि तुर्की नया ईरान बन रहा है और सऊदी को इजराइल के खिलाफ भड़का रहा है.

यह समझौता स्पष्ट करता है कि मिडिल ईस्ट के देश अब यह समझ चुके हैं कि उनके क्षेत्र की सुरक्षा को अमेरिका, इजराइल और ईरान की आपसी दुश्मनी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. भारत के नजरिए से भी यह पैक्ट अहम है, क्योंकि भारत के सऊदी अरब के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं, लेकिन पाकिस्तान और तुर्की का भारत विरोधी रुख अक्सर सामने आता रहा है.

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शुभेंदु प्रताप भूमंडल

शुभेंदु प्रताप भूमंडल

पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.

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