दफ्तरों व कंपनियों में इस समय दो अलग-अलग पीढ़ियों मिलेनियल्स (1981-1996 के बीच जन्मे) और जेन जी (1997-2012 के बीच जन्मे) के काम करने के तरीके और सोच में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। मिलेनियल्स जहां अनुभव, एक जगह टिककर काम करने और तय नियमों को प्राथ
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सोच और प्राथमिकताओं के इस अंतर से ऑफिस में आपस में तालमेल बैठाना एक बड़ी चुनौती बन रहा है। एचआर एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस अंतर को सही समय पर न संभाला गया, तो मिलकर काम करने की क्षमता और कंपनी के काम पर असर पड़ता है। इसी वजह से अब एचआर विभाग की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। कंपनियां जेन जी कर्मचारियों को अलग से सलाह, गाइडेंस और दोनों पीढ़ियों के बीच बेहतर समझ बनाने के लिए खास ट्रेनिंग दे रही हैं।
एक-दूसरे को सिखाएं...
आजकल मिलेनियल्स और जेन जी की सोच व काम की शैली में अंतर से दफ्तरों में काम के घंटे और सीनियर-जूनियर के नियमों को लेकर अक्सर विवाद और असंतोष की समस्या से बचाव के लिए एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझना जरूरी है।
कमियां निकालने के बजाय बातचीत बढ़ाएं। पुराने कर्मचारी नए युवाओं से आधुनिक डिजिटल टूल्स व तकनीक सीखें, वहीं नई पीढ़ी सीनियर्स से काम का गहरा अनुभव हासिल करे। थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी और परस्पर सम्मान से ही दफ्तर में सकारात्मक माहौल बनेगा।
दो पीढ़ियों का तालमेल : मतभेद सुलझाने के तीन केस
केस 1 : पर्सनल लाइफ बनाम देर तक काम पर मतभेद :एक कंपनी के मिलेनियल टीम लीडर का कहना है कि जब काम ज्यादा हो, तो देर तक रुकना सामान्य बात है, लेकिन उनकी टीम के नए जेन जी कर्मचारी शाम को समय खत्म होते ही काम बंद कर देते हैं और कोई मैसेज या मेल नहीं देखते। वे अपनी पर्सनल लाइफ और मानसिक शांति से समझौता नहीं करते। एचआर ने बीच-बचाव कर काम के घंटे तय कर मामला सुलझाने का प्रयास किया।
केस 2 : तुरंत जवाब की चाहत और सीनियर-जूनियर के नियमों की अनदेखी :एक कंपनी के एचआर प्रमुख ने बताया, जेन जी कर्मचारी सीनियर-जूनियर के पारंपरिक नियमों को मानने के बजाय सीधे बड़े अफसरों से बात करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनके काम की तुरंत तारीफ हो और तुरंत मंजूरी मिले। वहीं पुराने सीनियर मैनेजर्स को लगता है कि तय नियम और तरीके से ही काम होना चाहिए। इस दूरी को कम करने के लिए कंपनी ने हर हफ्ते बातचीत करने की व्यवस्था शुरू की है।
केस 3 : जेन जी की तेजी, मिलेनियल्स का अनुभव :डिजिटल एजेंसी में जेन जी कर्मचारी नए सॉफ्टवेयर और एआई टूल्स का इस्तेमाल करके बहुत तेजी से काम निपटाते हैं, लेकिन पुराने मिलेनियल सीनियर उनके काम की गहराई और गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त नहीं हो पाते। एचआर ने इसके हल के लिए दोनों को एक-दूसरे से सीखने का मौका दिया। इसमें जेन जी कर्मचारी सीनियर्स को नए डिजिटल टूल्स सिखाते हैं और सीनियर्स उन्हें काम की गहराई और अनुभव समझाते हैं।
काम का तरीका अलग, सोच जुदा, अनुभव व वर्क-लाइफ बैलेंस के बीच फंस रहा कॉर्पोरेट कल्चर
सुयाश गुप्ता, कॉर्पोरेट काउंसलर