कनपट्टीमार शंकरिया: हर कत्ल के बाद बीड़ी पीने वाला राजस्थान का खौफनाक सीरियल किलर

Published on 8 अग॰ 2026

कनपट्टीमार शंकरिया: हर कत्ल के बाद बीड़ी पीने वाला राजस्थान का खौफनाक सीरियल किलर

राजस्थान के अपराध इतिहास में कनपट्टीमार शंकरिया का नाम सबसे खतरनाक अपराधियों में गिना जाता है। 1970 के दशक में राजस्थान और आसपास के इलाकों में उसके नाम से डर का माहौल था। उसके हत्या करने के तरीके के कारण उसे "कनपट्टीमार" कहा गया।

कौन था कनपट्टीमार शंकरिया?

शंकरिया राजस्थान का रहने वाला था और कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में उतर गया। 1977-78 के दौरान उसकी आपराधिक गतिविधियों ने पुलिस और आम लोगों को परेशान कर दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, उस पर बड़ी संख्या में हत्याओं के आरोप लगे और उसे भारत के चर्चित सीरियल किलर्स में शामिल किया गया।

क्यों पड़ा नाम "कनपट्टीमार"?

शंकरिया अपने शिकारों पर खास तरीके से हमला करता था। वह कथित तौर पर हथौड़े से सिर के पास कनपटी के हिस्से पर वार करता था। इसी वजह से लोग उसे "कनपट्टीमार" कहने लगे। कई मामलों में उसके शिकार सोते हुए लोग थे, जिससे पुलिस के लिए उसे पकड़ना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था।

हर कत्ल के बाद बीड़ी पीने की कहानी

कई अपराध कथाओं और मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जाता है कि शंकरिया हत्या के बाद बीड़ी पीता था। यह आदत उसके अपराधों से जुड़ी चर्चित कहानियों का हिस्सा बन गई। हालांकि, इस बात की विस्तृत आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है कि वह हर हत्या के बाद निश्चित रूप से बीड़ी पीता था।

अपराध मनोविज्ञान के नजरिए से देखें तो कई सीरियल अपराधियों में अपराध के बाद कुछ विशेष व्यवहार या आदतें देखी जाती हैं, जिन्हें वे अपनी मानसिक स्थिति, तनाव कम करने या अपराध से जुड़े एक निजी "रिवाज" के रूप में दोहरा सकते हैं। लेकिन शंकरिया के मामले में बीड़ी पीने वाली बात मुख्य रूप से लोक चर्चाओं और अपराध कथाओं में ज्यादा सामने आती है।

राजस्थान में फैली थी दहशत

उस समय राजस्थान के कई इलाकों में लोगों में डर का माहौल था। रात के समय अकेले निकलने से लोग घबराने लगे थे। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हत्याओं के बीच कोई स्पष्ट संबंध दिखाई नहीं देता था।

गिरफ्तारी और सजा

लंबी जांच के बाद पुलिस ने शंकरिया को गिरफ्तार किया। अदालत में मुकदमे के बाद उसे दोषी ठहराया गया और उसे फांसी की सजा दी गई। 16 मई 1979 को उसे फांसी दिए जाने की जानकारी कई रिपोर्टों में मिलती है।

अपराध इतिहास का एक भयावह अध्याय

कनपट्टीमार शंकरिया की कहानी आज भी राजस्थान के अपराध इतिहास में एक डरावने अध्याय के रूप में याद की जाती है। उसका मामला यह दिखाता है कि कैसे एक अपराधी का तरीका और मानसिकता उसे समाज में भय का प्रतीक बना सकती है।

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