Sikandra Rao Assembly Caste Equations: सिकंदराराऊ विधानसभा के जातिगत समीकरण, 2026 में 3.31 लाख वोटर

Published on 8 अग॰ 2026

Sikandra Rao Assembly Caste Equations को समझने के लिए केवल किसी एक जाति की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। हाथरस जिले की विधानसभा संख्या 80 सिकंदराराऊ में पुराने चुनावी आकलन क्षत्रिय/ठाकुर मतदाताओं को सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूहों में रखते हैं। इनके साथ बघेल-धनगर, यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण, वैश्य, लोधी, जाटव और दूसरे दलित-पिछड़े समुदाय चुनावी संतुलन तैयार करते हैं। वर्ष 2026 की अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक सिकंदराराऊ में अब 3,31,988 मतदाता हैं। इनमें 1,81,769 पुरुष, 1,50,210 महिला और 9 अन्य मतदाता हैं।

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।

विशेष पुनरीक्षण से पहले इस सीट पर 3,74,881 मतदाता थे। अंतिम सूची में संख्या घटकर 3,31,988 रह गई, यानी 42,893 मतदाताओं की शुद्ध कमी हुई। यह पुराने मतदाता आधार का करीब 11.44 प्रतिशत है। यह बदलाव इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 विधानसभा चुनाव भाजपा ने केवल 8,104 वोट से जीता था। नई सूची में कुल बदलाव पिछली जीत के अंतर से पांच गुना से भी ज्यादा है।

सिकंदराराऊ विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।

सिकंदराराऊ विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभासिकंदराराऊ
विधानसभा संख्या80
जिलाहाथरस
लोकसभा क्षेत्रहाथरस (SC)
विधानसभा आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकबीरेन्द्र सिंह राणा
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
विधायक की सामाजिक पहचानक्षत्रिय
2026 कुल मतदाता3,31,988
पुरुष मतदाता1,81,769
महिला मतदाता1,50,210
अन्य मतदाता9
SIR से पहले मतदाता3,74,881
मतदाता कमी42,893
कमी प्रतिशतकरीब 11.44%
2022 विजेताबीरेन्द्र सिंह राणा, BJP
2022 उपविजेताडॉ. ललित प्रताप बघेल, SP
2022 जीत का अंतर8,104 वोट
2024 लोकसभा खंड BJP वोट शेयर44.58%
2024 लोकसभा खंड SP वोट शेयर33.20%
2024 लोकसभा खंड BSP वोट शेयर20.55%
प्रमुख सामाजिक समूहक्षत्रिय/ठाकुर, बघेल, यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण, वैश्य, लोधी, जाटव

वर्तमान विधायक बीरेन्द्र सिंह राणा भाजपा से लगातार दो बार सिकंदराराऊ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह पहली बार मार्च 2017 और दूसरी बार मार्च 2022 में विधानसभा पहुंचे। उनका जन्म 1 नवंबर 1958 को हुआ, शिक्षा इंटरमीडिएट है और व्यवसाय कृषि तथा शीतगृह भंडारण से जुड़ा दर्ज है।

Sikandra Rao Assembly Caste Equations में सबसे पहले क्षत्रिय/ठाकुर सामाजिक प्रभाव की चर्चा होती है। पुराने विधानसभा-स्तरीय चुनावी आकलन सिकंदराराऊ को क्षत्रिय प्रभाव वाली सीट बताते हैं। इसके बाद यादव, मुस्लिम, बघेल, ब्राह्मण, वैश्य, लोधी और जाटव समुदायों की महत्वपूर्ण उपस्थिति बताई गई है।

सिकंदराराऊ की खासियत यह है कि उपलब्ध पुराने विश्वसनीय आकलनों में सभी जातियों की सटीक संख्या नहीं दी गई है। इसलिए यहां मनमाने तरीके से प्रत्येक जाति के हजारों वोटर तय करना उचित नहीं होगा।

सिकंदराराऊ का संकेतात्मक सामाजिक समीकरण

सामाजिक समूहचुनावी स्थिति
क्षत्रिय/ठाकुरपुराने आकलन में सबसे प्रभावशाली समूह
बघेल/धनगरमजबूत OBC सामाजिक आधार
यादवमहत्वपूर्ण पिछड़ा वर्ग वोट
मुस्लिमकई क्षेत्रों में प्रभावशाली वोट ब्लॉक
ब्राह्मणमहत्वपूर्ण सवर्ण समूह
वैश्यकस्बाई व व्यापारी राजनीति में प्रभाव
लोधीमहत्वपूर्ण गैर-यादव OBC समूह
जाटव व अन्य SCबड़ा दलित वोट आधार
अन्य OBC/SC समुदायगांववार निर्णायक
2026 आधिकारिक कुल मतदाता3,31,988

2011 जनगणना आधारित विधानसभा-स्तरीय जनसांख्यिकीय आकलन में सिकंदराराऊ की कुल आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 23.62 प्रतिशत बताई गई है। यह आबादी का अनुपात है, मतदाताओं का नहीं। इसी आकलन में क्षेत्र को करीब 85.66 प्रतिशत ग्रामीण और 14.34 प्रतिशत शहरी बताया गया है।

इसलिए सिकंदराराऊ को केवल “ठाकुर सीट” कहना भी अधूरा होगा। क्षत्रिय मतदाताओं का बड़ा प्रभाव जरूर है, लेकिन OBC और दलित आबादी की संयुक्त ताकत उससे कहीं बड़ी राजनीतिक भूमिका निभाती है।

सिकंदराराऊ वोटर लिस्ट 2026: अब 3,31,988 मतदाता

2026 की अंतिम सूची में सिकंदराराऊ विधानसभा के 1,81,769 पुरुष, 1,50,210 महिला और 9 अन्य मतदाता दर्ज हैं। कुल मतदाता 3,31,988 हैं। अप्रैल 2026 में प्रकाशित अंतिम निर्वाचन नामावली सिकंदराराऊ विधानसभा संख्या 80 के लिए लागू है।

हाथरस जिले की विधानसभा-वार वोटर लिस्ट 2026

विधानसभाSIR से पहले2026 अंतिम मतदाताकमी
हाथरस4,12,9053,69,86543,040
सादाबाद3,75,7393,41,53334,206
सिकंदराराऊ3,74,8813,31,98842,893
जिला कुल11,63,52510,43,3861,20,139

सिकंदराराऊ में करीब 11.44 प्रतिशत मतदाता कम हुए। संख्या के लिहाज से हाथरस सदर के बाद जिले में दूसरी सबसे बड़ी शुद्ध कमी इसी सीट पर हुई है।

2022 में जीत का अंतर 8,104 था, जबकि मतदाता आधार में बदलाव 42,893 का है। यानी नई सूची में हुआ कुल बदलाव पिछले चुनावी अंतर का लगभग 5.3 गुना है।

इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि हटे या जुड़े मतदाता किसी विशेष पार्टी अथवा जाति के थे। इसका वास्तविक चुनावी असर तभी समझा जा सकता है जब राजनीतिक दल नई मतदाता सूची को बूथवार 2022 और 2024 के परिणामों से मिलाकर देखें।

2012 से 2026 तक कैसे बदला मतदाता आधार?

सिकंदराराऊ विधानसभा में 2012 के चुनाव के समय 3,18,067 मतदाता थे। 2017 तक संख्या बढ़कर 3,50,277 पहुंची। 2024 लोकसभा चुनाव के समय करीब 3,74,214 मतदाता दर्ज थे। अब 2026 की अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 3,31,988 रह गई है।

वर्षकुल मतदाता
20123,18,067
20173,50,277
2024 लोकसभा3,74,214
SIR से पहले 20263,74,881
2026 अंतिम सूची3,31,988

2024 के मुकाबले भी मौजूदा वोटर बेस लगभग 42 हजार छोटा है। इसलिए पुराने मतदान प्रतिशत और बूथवार बढ़त को 2027 के चुनाव पर सीधे लागू करना उचित नहीं होगा।

क्षत्रिय/ठाकुर वोट सिकंदराराऊ की सबसे बड़ी धुरी क्यों?

पुराने चुनावी विश्लेषण में सिकंदराराऊ को क्षत्रिय प्रभाव वाली विधानसभा बताया गया है। सीट का उम्मीदवार चयन भी लंबे समय से इस सामाजिक प्रभाव को दर्शाता रहा है। मौजूदा विधायक बीरेन्द्र सिंह राणा स्वयं क्षत्रिय समुदाय से हैं।

2012 में मुख्य मुकाबला बसपा के रामवीर उपाध्याय और सपा के यशपाल सिंह चौहान के बीच हुआ।

2017 में भाजपा ने बीरेन्द्र सिंह राणा को टिकट दिया।

2022 में भाजपा ने फिर राणा को उतारा, जबकि बसपा ने अवधेश कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया।

अलग-अलग पार्टियों द्वारा बार-बार क्षत्रिय पृष्ठभूमि वाले मजबूत चेहरों पर भरोसा करना सीट की सामाजिक बनावट का संकेत देता है।

लेकिन चुनाव परिणामों से यह भी साफ है कि किसी क्षत्रिय प्रत्याशी के लिए केवल जातीय वोट पर्याप्त नहीं है। 2022 में भाजपा विजेता को 98 हजार से ज्यादा वोट मिले, जो किसी एक सामाजिक समुदाय से कहीं बड़ा आंकड़ा है।

2022 में क्षत्रिय बनाम बघेल सामाजिक मुकाबला

2022 में भाजपा ने वर्तमान विधायक बीरेन्द्र सिंह राणा को दोबारा मैदान में उतारा। समाजवादी पार्टी ने डॉ. ललित प्रताप बघेल को प्रत्याशी बनाकर गैर-यादव OBC सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश की।

नतीजा बेहद करीबी रहा।

सिकंदराराऊ विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
बीरेन्द्र सिंह राणाBJP98,09441.63%
डॉ. ललित प्रताप बघेलSP89,99038.19%
अवधेश कुमार सिंहBSP41,78117.73%
NOTA1,1780.50%
छवि वार्ष्णेयकांग्रेस1,1590.49%
मानवेंद्र सिंहनिर्दलीय1,1290.48%
जीत का अंतर8,104

भाजपा और सपा के बीच वोट शेयर का अंतर सिर्फ 3.44 प्रतिशत अंक था। बसपा के 41,781 वोट मुख्य मुकाबले के अंतर से पांच गुना से अधिक थे।

इससे 2027 के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है—BSP का करीब 18 प्रतिशत वाला वोट किस स्तर पर कायम रहता है और SP अपने 2022 के OBC-सामाजिक गठजोड़ को कितना आगे बढ़ाती है?

बघेल-धनगर वोट क्यों बना SP की ताकत?

सिकंदराराऊ में बघेल और धनगर समुदाय की अच्छी मौजूदगी पुराने स्थानीय चुनावी विश्लेषण में दर्ज रही है। 2022 में सपा ने बघेल समुदाय से डॉ. ललित प्रताप बघेल को टिकट दिया और पार्टी 90 हजार वोट के करीब पहुंच गई।

2017 में सपा को 59,740 वोट मिले थे।

2022 में यह बढ़कर 89,990 हो गया।

यानी पांच वर्षों में सपा के वोट में करीब 30,250 की वृद्धि हुई।

इसी दौरान BJP के वोट भी 76,129 से बढ़कर 98,094 हुए, यानी करीब 21,965 की वृद्धि हुई। लेकिन सपा का विस्तार ज्यादा तेज रहा और भाजपा का जीत अंतर 14,772 से घटकर 8,104 रह गया।

2027 में समाजवादी पार्टी के लिए बघेल-धनगर वोट फिर महत्वपूर्ण रहेगा, चाहे पार्टी उसी उम्मीदवार पर भरोसा करे या नया चेहरा उतारे। अगस्त 2026 तक 2027 के प्रत्याशी आधिकारिक रूप से तय नहीं हैं।

यादव मतदाता SP के लिए कोर, लेकिन अकेले पर्याप्त नहीं

पुराने जातीय समीकरण में यादव समुदाय को भी महत्वपूर्ण वोट ब्लॉक के रूप में रखा गया है।

समाजवादी पार्टी के लिए यादव मतदाता उसका मजबूत पारंपरिक आधार माना जाता है। लेकिन सिकंदराराऊ की सामाजिक बनावट ऐसी है कि केवल यादव और मुस्लिम वोट जोड़कर BJP को हराना आसान नहीं होगा।

2022 में सपा ने बघेल उम्मीदवार देकर यही रणनीति अपनाई—पारंपरिक आधार के साथ गैर-यादव OBC में विस्तार।

अगर 2027 में पार्टी यादव + मुस्लिम + बघेल/धनगर + दलित मतदाताओं का बड़ा हिस्सा जोड़ती है तो 2022 के 8,104 वोट के अंतर को खत्म करना संभव हो सकता है।

लेकिन भाजपा गैर-यादव OBC और दलित मतों में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखती है तो सपा के लिए रास्ता मुश्किल रहेगा।

मुस्लिम वोट विपक्षी गठजोड़ की महत्वपूर्ण कड़ी

सिकंदराराऊ में मुस्लिम मतदाता पुराने सामाजिक आकलनों में महत्वपूर्ण समूह के रूप में दर्ज हैं। विधानसभा के अलग-अलग ग्रामीण और कस्बाई हिस्सों में उनकी मौजूदगी है।

यह वोट हाथरस जिले की कुछ दूसरी सीटों की तरह अकेले चुनाव तय करने वाली स्थिति में नहीं माना जाता, लेकिन SP या BSP जैसे दलों के सामाजिक गठजोड़ में इसका महत्व बढ़ जाता है।

2022 में सपा लगभग 90 हजार वोट तक पहुंची थी। अगर मुस्लिम मतदाता का बड़ा हिस्सा सपा के साथ रहा और उसके साथ बघेल-यादव-OBC वोट जुड़ा, तो इसने पार्टी को भाजपा के करीब पहुंचाने में भूमिका निभाई होगी—हालांकि बूथवार जातीय डेटा के बिना किसी समुदाय का पूरा वोट किसी एक दल के खाते में मानना उचित नहीं है।

2027 में अगर विपक्षी वोट SP और BSP के बीच ज्यादा बंटता है तो भाजपा को लाभ मिल सकता है। इसके उलट मुस्लिम और OBC वोट अधिक केंद्रित होता है तो मुकाबला फिर करीबी हो सकता है।

जाटव और अन्य दलित मतदाता: लगभग चौथाई आबादी का सामाजिक संदर्भ

2011 जनगणना आधारित विधानसभा प्रोफाइल में अनुसूचित जाति आबादी की हिस्सेदारी करीब 23.62 प्रतिशत आंकी गई है। इसे वोटर शेयर नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे सिकंदराराऊ में दलित समुदायों के बड़े सामाजिक महत्व का अंदाजा मिलता है।

जाटव और अन्य SC वोट BSP के लिए पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं।

2022 में BSP को 41,781 वोट यानी 17.73 प्रतिशत मत मिले।

2024 लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा खंड में BSP का वोट शेयर बढ़कर 20.55 प्रतिशत दर्ज हुआ।

यानी सिकंदराराऊ में BSP अभी भी ऐसा तीसरा राजनीतिक ध्रुव है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अगर BSP 20 प्रतिशत के आसपास अपना वोट बनाए रखती है तो BJP-SP मुकाबले में तीसरा कोण मजबूत रहेगा।

अगर उसका वोट SP या BJP की ओर खिसकता है तो परिणाम तेजी से बदल सकता है।

ब्राह्मण वोट भी प्रमुख चुनावी संतुलन

पुराने सामाजिक आकलन ब्राह्मण समुदाय को सिकंदराराऊ के महत्वपूर्ण समूहों में रखते हैं।

भाजपा के लिए क्षत्रिय प्रत्याशी के साथ ब्राह्मण वोट का बड़ा हिस्सा जुड़ना एक मजबूत सवर्ण आधार तैयार कर सकता है।

लेकिन 2022 के करीबी मुकाबले से यह साफ है कि सवर्ण वोट की मजबूती के बावजूद OBC और दलित वोट के बिना सीट सुरक्षित नहीं है।

2027 में अगर विपक्ष ब्राह्मण मतदाताओं के कुछ हिस्से में प्रत्याशी, स्थानीय मुद्दे या सामाजिक प्रतिनिधित्व के जरिए सेंध लगाता है तो कुछ हजार वोट का बदलाव भी महत्वपूर्ण होगा।

8,104 वोट के पिछले अंतर वाली सीट पर 4-5 हजार वोट का स्विंग साधारण राजनीतिक घटना नहीं होगा।

वैश्य वोट और सिकंदराराऊ का कस्बाई चरित्र

सिकंदराराऊ मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा है, लेकिन सिकंदराराऊ और पुरदिलनगर जैसे कस्बाई इलाकों में व्यापारी तथा वैश्य समुदाय का अलग प्रभाव है। 2011 आधारित प्रोफाइल क्षेत्र को करीब 85.66 प्रतिशत ग्रामीण और 14.34 प्रतिशत शहरी बताती है।

व्यापारी मतदाताओं के लिए जातीय पहचान के साथ—

स्थानीय बाजार,
सड़क और यातायात,
बिजली,
कानून-व्यवस्था,
व्यापारिक सुविधा और
कस्बाई बुनियादी ढांचा

जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसी वजह से सिकंदराराऊ बस स्टैंड जैसी स्थानीय मांग चुनावी राजनीति में केवल परिवहन का सवाल नहीं, बल्कि कारोबार और कस्बाई अर्थव्यवस्था का मुद्दा भी बन जाती है।

लोधी और दूसरे गैर-यादव OBC किसके साथ?

लोधी समुदाय को भी पुराने सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके साथ बघेल, धनगर और दूसरे गैर-यादव OBC समूह सिकंदराराऊ की ग्रामीण राजनीति में बड़ी भूमिका रखते हैं।

भाजपा की उत्तर प्रदेश राजनीति में गैर-यादव OBC आधार उसकी प्रमुख ताकतों में रहा है।

दूसरी तरफ SP की 2022 रणनीति में बघेल उम्मीदवार के जरिए इसी वोट में सेंध लगाने का प्रयास सफल दिखाई दिया—पार्टी 90 हजार वोट के करीब पहुंच गई।

2027 में यही वर्ग शायद BJP-SP मुकाबले की सबसे बड़ी स्विंग कैटेगरी बने।

अगर भाजपा OBC वोट का बड़ा हिस्सा कायम रखती है तो उसका क्षत्रिय-सवर्ण आधार और मजबूत हो जाएगा।

अगर सपा बघेल, यादव, लोधी और दूसरे पिछड़े मतदाताओं का बड़ा हिस्सा जोड़ती है तो 2022 से बेहतर प्रदर्शन संभव है।

2012 में सिर्फ 1,063 वोट से जीती थी BSP

सिकंदराराऊ में करीबी चुनाव कोई नई बात नहीं है।

2012 विधानसभा चुनाव में BSP के रामवीर उपाध्याय को 94,471 वोट मिले।

समाजवादी पार्टी के यशपाल सिंह चौहान को 93,408 वोट मिले।

जीत का अंतर केवल 1,063 वोट था।

सिकंदराराऊ विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
रामवीर उपाध्यायBSP94,47145.81%
यशपाल सिंह चौहानSP93,40845.30%
ओमप्रकाश उर्फ पप्पू बघेलRLD6,1132.96%
नरेंद्र सिंहBJP4,0521.96%
जीत का अंतर1,063

उस चुनाव में BJP सिर्फ 4,052 वोट पर चौथे स्थान पर थी। पांच साल बाद वही पार्टी सीट जीत गई।

यही तथ्य सिकंदराराऊ को एक स्थायी पार्टी गढ़ मानने से रोकता है।

2017 में चौथे स्थान से BJP सीधे पहले स्थान पर

2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बीरेन्द्र सिंह राणा को उम्मीदवार बनाया और पार्टी का वोट 2012 के 4 हजार से बढ़कर 76,129 पहुंच गया।

बसपा के बनी सिंह बघेल को 61,357 और सपा के यशपाल सिंह चौहान को 59,740 वोट मिले। भाजपा ने 14,772 वोट से जीत दर्ज की।

सिकंदराराऊ विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
बीरेन्द्र सिंह राणाBJP76,12935.44%
बनी सिंह बघेलBSP61,35728.56%
यशपाल सिंह चौहानSP59,74027.81%
राकेश सिंह राणानिर्दलीय7,2223.36%
अमर सिंह यादवनिर्दलीय4,8762.27%
BJP की जीत14,772

2017 में SP और BSP का वोट लगभग बराबर बंटा था। दोनों पार्टियों को 59 से 61 हजार के बीच वोट मिले, जबकि भाजपा 76 हजार पर पहुंचकर विजयी हो गई।

विपक्षी वोट का विभाजन भाजपा की जीत के लिहाज से महत्वपूर्ण था।

2017 से 2022: BJP मजबूत हुई, लेकिन SP और तेजी से बढ़ी

दो विधानसभा चुनावों की तुलना सिकंदराराऊ की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दिखाती है।

पार्टी2017 वोट2022 वोटबदलाव
BJP76,12998,094+21,965
SP59,74089,990+30,250
BSP61,35741,781-19,576

BJP के वोट में करीब 22 हजार की वृद्धि हुई, लेकिन SP ने लगभग 30 हजार वोट बढ़ाए। दूसरी तरफ BSP के वोट करीब 20 हजार घट गए।

इसका परिणाम यह हुआ कि BJP की जीत का अंतर 14,772 से घटकर 8,104 रह गया।

यानी 2022 में सपा BJP के काफी करीब पहुंची और BSP का कमजोर होना उसके विस्तार के समानांतर दिखाई दिया।

2027 का बड़ा सवाल यही है कि BSP का वोट 2022 के स्तर पर रहता है, 2024 की तरह कुछ बढ़ता है या मुख्य दोनों दलों की तरफ जाता है।

2012 से 2022 तक जीत का अंतर

चुनावविजेतापार्टीउपविजेताजीत का अंतर
2012रामवीर उपाध्यायBSPयशपाल सिंह चौहान, SP1,063
2017बीरेन्द्र सिंह राणाBJPबनी सिंह बघेल, BSP14,772
2022बीरेन्द्र सिंह राणाBJPडॉ. ललित प्रताप बघेल, SP8,104

पिछले तीन विधानसभा चुनावों में BSP, BJP और SP तीनों मुख्य मुकाबले के केंद्र में रहे हैं। BJP ने लगातार दो जीत जरूर हासिल की हैं, लेकिन 2022 का अंतर इतना बड़ा नहीं था कि सीट को पूरी तरह सुरक्षित माना जाए।

2024 लोकसभा चुनाव: सिकंदराराऊ खंड में BJP फिर मजबूत

2024 के लोकसभा चुनाव में सिकंदराराऊ विधानसभा खंड में BJP का वोट शेयर 44.58 प्रतिशत, SP का 33.20 प्रतिशत और BSP का 20.55 प्रतिशत रहा। BJP को SP पर करीब 11.38 प्रतिशत अंक की बढ़त मिली।

सिकंदराराऊ विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024

पार्टीवोट शेयर
BJP44.58%
SP33.20%
BSP20.55%
BJP-SP अंतर11.38 प्रतिशत अंक

यह 2022 विधानसभा के मुकाबले BJP के लिए सकारात्मक संकेत था।

2022 में BJP: 41.63%
2022 में SP: 38.19%

2024 में BJP: 44.58%
2024 में SP: 33.20%

यानी लोकसभा चुनाव में BJP का हिस्सा कुछ बढ़ा और SP का घटा, जबकि BSP करीब 20.55 प्रतिशत तक पहुंची।

हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव का मतदान व्यवहार अलग होता है। राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रत्याशी और मुद्दे अलग होते हैं, इसलिए 2024 की बढ़त को सीधे 2027 का परिणाम नहीं माना जा सकता।

BSP का 20 प्रतिशत वोट 2027 में गेम चेंजर

सिकंदराराऊ में BSP की स्थिति दूसरी कई सीटों के मुकाबले अधिक महत्वपूर्ण है।

2012 में BSP ने सीट जीती।

2017 में पार्टी दूसरे स्थान पर रही।

2022 में 41,781 वोट और 17.73 प्रतिशत मत हासिल किए।

2024 लोकसभा खंड में BSP का वोट शेयर 20.55 प्रतिशत रहा।

ऐसी स्थिति में BSP को केवल तीसरे दल के रूप में देखना अधूरा होगा।

2022 BJP-SP अंतर—8,104 वोट।

BSP वोट—41,781।

यानी BSP का वोट जीत के अंतर से पांच गुना से अधिक था।

अगर BSP अपना दलित और अन्य सामाजिक आधार मजबूत रखती है तो मुकाबला त्रिकोणीय रहेगा।

अगर उसका वोट सपा की तरफ ज्यादा जाता है तो BJP के लिए चुनौती बढ़ेगी।

अगर BJP दलित मतदाताओं में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करती है तो उसकी जीत आसान हो सकती है।

बीरेन्द्र सिंह राणा की हैट्रिक की परीक्षा

बीरेन्द्र सिंह राणा 2017 और 2022 में लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। 2027 में भाजपा उन्हें फिर टिकट देती है तो उनके सामने लगातार तीसरी जीत का अवसर होगा। अगस्त 2026 तक पार्टी ने 2027 का प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।

उनके राजनीतिक रिकॉर्ड में पहली जीत 14,772 और दूसरी जीत 8,104 वोट की रही है। वर्तमान प्रोफाइल में उनकी जाति क्षत्रिय, शिक्षा इंटरमीडिएट और व्यवसाय कृषि व शीतगृह भंडारण दर्ज है।

उनके पक्ष में तीन बड़े चुनावी संकेत हैं—

2017 और 2022 की लगातार जीत, 2024 लोकसभा खंड में BJP की बढ़त और क्षत्रिय प्रभाव वाली सीट पर उनकी सामाजिक पहचान।

लेकिन चुनौती भी साफ है—2022 में सपा सिर्फ 8,104 वोट पीछे थी और 2026 की नई मतदाता सूची में 42,893 वोटर कम हुए हैं।

विकास कार्य बनाम अधूरी मांगें: 2026 में स्थानीय मुद्दे

2027 की राजनीति केवल जातीय गणित से तय नहीं होगी। जुलाई 2026 तक क्षेत्र में ट्रामा सेंटर शुरू होने, करमई में पॉलीटेक्निक कॉलेज, भरतपुर में मिनी स्टेडियम, मऊ चिरायल में आश्रम पद्धति विद्यालय, खिजरपुर में काली नदी पर पुल और हाजीपुर रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज जैसे विकास कार्य प्रमुख उपलब्धियों में गिनाए जा रहे हैं।

दूसरी तरफ सिकंदराराऊ बस स्टैंड और पुरदिलनगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मांग अभी भी लंबित प्रमुख मुद्दों में शामिल है। बस स्टैंड नहीं बनने से यात्रियों और स्थानीय कारोबारियों की असुविधा तथा पुरदिलनगर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की मांग 2027 से पहले स्थानीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी हुई है।

यहां चुनाव का नतीजा जाति और विकास की दो समानांतर धाराओं से प्रभावित हो सकता है।

85 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण सीट, किसान मुद्दे भी निर्णायक

सिकंदराराऊ विधानसभा का करीब 85.66 प्रतिशत हिस्सा जनसंख्या के लिहाज से ग्रामीण बताया गया है।

इस वजह से यहां किसान और ग्रामीण मतदाता सबसे बड़ी चुनावी आबादी तैयार करते हैं।

क्षत्रिय, बघेल, यादव, लोधी, दलित और दूसरे कई समुदाय खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।

इसलिए—

सिंचाई,
बिजली,
खाद,
फसल मूल्य,
आवारा पशु,
ग्रामीण सड़क,
मंडी व्यवस्था और
कृषि आधारित रोजगार

जैसे मुद्दे जातीय सीमाओं से बाहर भी मतदान प्रभावित कर सकते हैं।

किसी साझा किसान समस्या पर अलग-अलग जातियों का वोट एक दिशा में स्विंग हो जाए तो वह पुराने जातिगत समीकरण को बदल सकता है।

महिला मतदाता करीब 1.50 लाख

2026 की अंतिम सूची में सिकंदराराऊ में 1,50,210 महिला मतदाता हैं, जबकि पुरुष मतदाता 1,81,769 हैं। महिला वोटर कुल मतदाता आधार का करीब 45.25 प्रतिशत बनती हैं।

करीब डेढ़ लाख महिला मतदाताओं को केवल पारिवारिक या जातीय वोट मानना किसी भी दल के लिए जोखिम भरा होगा।

महंगाई, राशन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, उज्ज्वला, बिजली, आवास, पेंशन, स्थानीय परिवहन और महिलाओं की आय जैसे मुद्दे मतदान व्यवहार में स्वतंत्र भूमिका निभा सकते हैं।

2027 में BJP और विपक्ष दोनों के लिए महिला लाभार्थी और महिला युवा वोट एक अलग चुनावी मोर्चा होगा।

युवा वोट और रोजगार भी बदल सकता है समीकरण

सिकंदराराऊ का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है, लेकिन युवा आबादी के सामने स्थानीय रोजगार की समस्या अलग चुनौती है।

पॉलीटेक्निक कॉलेज जैसी परियोजनाएं तकनीकी शिक्षा का विकल्प देती हैं, लेकिन नौकरी और स्थानीय उद्योग का सवाल इससे आगे जाता है। कृषि और छोटे व्यापार पर निर्भर परिवारों के युवाओं के लिए सरकारी भर्ती, निजी रोजगार, कौशल विकास और शहरों तक कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान विकास समीक्षा में शिक्षा और सड़क कार्यों के साथ बस स्टैंड जैसी लंबित परियोजना भी इसी व्यापक कनेक्टिविटी की जरूरत दिखाती है।

युवा मतदाता परंपरागत जातीय निष्ठा से अलग मतदान करें तो 8-10 हजार वोट के अंतर वाली सीट में बड़ा असर पड़ सकता है।

BJP के लिए 2027 में मजबूत पक्ष

BJP के लिए सिकंदराराऊ में हालिया चुनावी रिकॉर्ड मजबूत है।

2017—BJP जीत
2022—BJP जीत
2024 लोकसभा खंड—BJP सबसे आगे

मौजूदा विधायक क्षत्रिय समुदाय से हैं और पुराने सामाजिक आकलन भी सीट पर इसी समूह का मजबूत प्रभाव बताते हैं।

इसके अलावा 2024 में BJP को 44.58 प्रतिशत वोट मिलना बताता है कि पार्टी का आधार केवल सवर्ण वोट तक सीमित नहीं है।

उसे गैर-यादव OBC और दलित वोट का हिस्सा भी चाहिए और पिछले चुनाव दिखाते हैं कि वह यह गठजोड़ बनाने में सफल रही है।

BJP के लिए 2027 की कमजोर कड़ी

BJP की सबसे बड़ी कमजोरी 2022 का अपेक्षाकृत छोटा जीत अंतर है।

98,094 बनाम 89,990।

अंतर केवल 8,104।

इसके अलावा 2026 की मतदाता सूची में 42,893 वोटरों की शुद्ध कमी हुई है।

स्थानीय स्तर पर बस स्टैंड और पुरदिलनगर CHC की लंबित मांग भी विपक्ष के लिए मुद्दा है।

अगर सपा 2022 वाला OBC-मुस्लिम आधार कायम रखती है और BSP के वोट में सेंध लगाती है तो BJP के लिए मुकाबला फिर करीबी हो सकता है।

SP के लिए सबसे बड़ा अवसर: 2022 का 38 प्रतिशत वोट

समाजवादी पार्टी ने 2022 में 38.19 प्रतिशत वोट हासिल किए और जीत से केवल 8,104 वोट दूर रही।

यह पार्टी के लिए मजबूत शुरुआती स्थिति है।

उसे 2017 के मुकाबले 30 हजार से ज्यादा अतिरिक्त वोट मिले थे।

2027 में सपा की संभावित रणनीति में बघेल-धनगर, यादव, मुस्लिम और दलित वोट के साथ ब्राह्मण तथा अन्य गैर-यादव OBC समूहों में विस्तार महत्वपूर्ण होगा।

पार्टी अगर केवल अपने पारंपरिक वोट तक सीमित रहती है तो 2024 की BJP बढ़त को काटना मुश्किल होगा।

अगर OBC और BSP के कुछ दलित वोट जुड़ते हैं तो 2022 का छोटा अंतर खत्म हो सकता है।

BSP 2027 में किसका खेल बिगाड़ेगी?

सिकंदराराऊ में BSP का 2022 का 17.73 प्रतिशत और 2024 लोकसभा खंड का 20.55 प्रतिशत वोट उसे निर्णायक तीसरा पक्ष बनाता है।

BSP अगर मजबूत उम्मीदवार देती है तो BJP और SP दोनों से अलग बड़ा वोट ब्लॉक बनाए रख सकती है।

अगर पार्टी क्षत्रिय उम्मीदवार उतारती है तो BJP के सवर्ण समीकरण में असर पड़ सकता है।

अगर दलित-OBC चेहरा आता है तो SP के सामाजिक विस्तार के सामने चुनौती हो सकती है।

अगर BSP का कोर वोट कमजोर होता है तो उसकी दिशा ही सीट का विजेता तय कर सकती है।

यही वजह है कि सिकंदराराऊ में 2027 का विश्लेषण केवल BJP और SP तक सीमित नहीं होना चाहिए।

2027 में उम्मीदवार की जाति क्यों फिर होगी अहम?

सिकंदराराऊ में पिछले तीन चुनाव उम्मीदवार चयन के महत्व को स्पष्ट करते हैं।

2012 में BSP ने रामवीर उपाध्याय उतारे।

2017 में BJP ने बीरेन्द्र सिंह राणा पर भरोसा किया।

2022 में BJP ने फिर राणा को टिकट दिया, SP ने बघेल उम्मीदवार उतारा और BSP ने अवधेश कुमार सिंह को मौका दिया।

यहां प्रत्याशी केवल पार्टी का प्रतिनिधि नहीं बल्कि सामाजिक गठबंधन का चेहरा भी बनता है।

अगर BJP क्षत्रिय प्रत्याशी रखती है तो उसे OBC और दलित वोट ट्रांसफर सुनिश्चित करना होगा।

अगर SP बघेल या दूसरे OBC चेहरे पर जाती है तो उसे मुस्लिम-यादव आधार के साथ सवर्ण और दलित वोट जोड़ना होगा।

BSP का उम्मीदवार भी मुख्य दोनों दलों की रणनीति प्रभावित करेगा।

2026 की नई मतदाता सूची सबसे बड़ा नया चुनावी डेटा

2022 में BJP की जीत: 8,104 वोट

2026 में शुद्ध मतदाता कमी: 42,893

2026 कुल वोटर: 3,31,988

यही तुलना 2027 की असली चुनावी तैयारी समझाती है।

राजनीतिक दलों को अब यह देखना होगा—

किस गांव में वोटर संख्या सबसे ज्यादा बदली?

क्षत्रिय बहुल बूथों पर क्या बदलाव हुआ?

बघेल और यादव प्रभाव वाले क्षेत्रों का नया वोटर बेस क्या है?

दलित बहुल बूथों की संख्या कितनी बदली?

कस्बाई सिकंदराराऊ और पुरदिलनगर में मतदाता स्थानांतरण कितना हुआ?

कहां नए युवा वोटर जुड़े?

इन सवालों के बिना केवल 2022 की जातिगत गणना पर 2027 की रणनीति बनाना अधूरा होगा।

उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण

सिकंदराराऊ के अलावा प्रदेश की बाकी सीटों की सामाजिक संरचना, प्रमुख जातियों, चुनावी इतिहास और मतदाता संख्या को समझने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विधानसभा-वार श्रृंखला देखी जा सकती है।

हाथरस जिले की तीनों सीटों का सामाजिक चरित्र अलग है। हाथरस सदर SC आरक्षित सीट पर दलित-सवर्ण-OBC गठजोड़ महत्वपूर्ण है, सादाबाद में जाट राजनीति सबसे बड़ी धुरी है, जबकि सिकंदराराऊ में क्षत्रिय प्रभाव के साथ बघेल-यादव-मुस्लिम-दलित-OBC समीकरण नतीजा तय करता है।

2027 के विधानसभा चुनाव में सिकंदराराऊ पर क्यों रहेगी नजर?

सिकंदराराऊ के आगामी मुकाबले को सात महत्वपूर्ण चुनावी आंकड़ों में समझा जा सकता है।

चुनावी संकेतआंकड़ा
2012 BSP जीत1,063 वोट
2017 BJP जीत14,772 वोट
2022 BJP जीत8,104 वोट
BJP वोट शेयर 202241.63%
SP वोट शेयर 202238.19%
BJP वोट शेयर, लोकसभा खंड 202444.58%
2026 अंतिम मतदाता3,31,988
SIR में शुद्ध कमी42,893

2012 में सीट केवल 1,063 वोट से तय हुई थी।

2017 में BJP ने बड़ा राजनीतिक परिवर्तन करते हुए 14,772 वोट से जीत हासिल की।

2022 में BJP ने सीट बचाई, लेकिन अंतर घटकर 8,104 रह गया।

2024 लोकसभा चुनाव में BJP ने फिर 44.58 प्रतिशत वोट के साथ सपा पर स्पष्ट बढ़त बनाई।

2026 में मतदाता आधार करीब 43 हजार कम हो गया।

यानी 2027 में पुराने नतीजों के साथ एक पूरी तरह नया वोटर बेस मौजूद होगा।

BJP के लिए बीरेन्द्र सिंह राणा की दो लगातार जीत और 2024 का प्रदर्शन मजबूत संकेत हैं।

SP के लिए 2022 में सिर्फ 8,104 वोट से हारना बड़ा अवसर है।

BSP के लिए 2024 का 20.55 प्रतिशत वोट बताता है कि उसका राजनीतिक स्पेस अभी खत्म नहीं हुआ।

क्षत्रिय मतदाता उम्मीदवार चयन में केंद्रीय रहेंगे।

बघेल-धनगर और दूसरे OBC वोट BJP-SP मुकाबले का स्विंग ब्लॉक बन सकते हैं।

मुस्लिम और यादव वोट विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण शुरुआती आधार रहेंगे।

जाटव और दूसरे दलित मतदाताओं का BJP-BSP-SP के बीच बंटवारा अंतिम नतीजे को प्रभावित करेगा।

और विकास के मुद्दों में ट्रामा सेंटर, सड़क, पुल और शिक्षा से जुड़े कामों के मुकाबले बस स्टैंड तथा पुरदिलनगर CHC जैसी अधूरी मांगों पर भी जनता का फैसला महत्वपूर्ण होगा।

प्रदेश की सीटवार चुनावी तैयारी, संभावित उम्मीदवारों, गठबंधन और राजनीतिक रणनीतियों से जुड़ी विस्तृत कवरेज के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विशेष श्रृंखला देखी जा सकती है।

Sikandra Rao Assembly Caste Equations का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुराने चुनावी आकलन क्षत्रिय/ठाकुर मतदाताओं को सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूह बताते हैं, लेकिन सीट की वास्तविक जीत गैर-यादव OBC, यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण, दलित, वैश्य और लोधी मतदाताओं के बीच बनने वाले बड़े गठजोड़ से तय होती है।

3,31,988 मतदाताओं वाली सिकंदराराऊ विधानसभा में 2027 की असली लड़ाई BJP के क्षत्रिय-सवर्ण-गैर यादव OBC-दलित गठजोड़ और SP के बघेल-यादव-मुस्लिम-PDA विस्तार के बीच हो सकती है। BSP का करीब 18 से 20 प्रतिशत हालिया वोट इस मुकाबले का तीसरा और शायद सबसे निर्णायक कोण है। 2012 की 1,063 वोट की जीत, 2022 का सिर्फ 8,104 वोट का अंतर और 2026 में 42,893 मतदाताओं का बदला आधार बताता है कि सिकंदराराऊ में जातियां जितनी महत्वपूर्ण हैं, उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगा उनका 2027 में बनने वाला नया राजनीतिक गठबंधन।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

UTTAR PRADESH NEWS की अन्य न्यूज पढऩे के लिए Facebook और Twitter पर फॉलो करें