गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव कई बार ब्लड शुगर लेवल बढ़ा देते हैं, जिसे जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है। सही डाइट, हल्की एक्सरसाइज और समय पर जांच की मदद से इसे आसानी से कंट्रोल में रखा जा सकता है।
Gestational Diabetes In Pregnancy : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं।
इस दौरान प्लेसेंटा से निकलने वाले कुछ हार्मोन शरीर में इंसुलिन के असर को कम कर देते हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति बन जाती है। जब शरीर जरूरत के मुताबिक इंसुलिन नहीं बना पाता, तो खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है।
इसे मेडिकल भाषा में जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) कहते हैं। यह स्थिति उन महिलाओं को भी हो सकती है, जिन्हें गर्भावस्था से पहले कभी शुगर की समस्या नहीं रही हो।
अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
प्रेग्नेंसी में कितना होना चाहिए ब्लड शुगर लेवल?
गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर का सही स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। डॉक्टरों के अनुसार, नॉर्मल रेंज इस प्रकार होनी चाहिए:
- फास्टिंग (खाली पेट): 60 से 90 mg/dL
- खाना खाने से ठीक पहले: 60 से 105 mg/dL
- खाना खाने के 1 घंटे बाद: 130 से 140 mg/dL
- खाना खाने के 2 घंटे बाद: 120 mg/dL से कम
- रात के समय (सुबह 2:00 से 6:00 बजे के बीच): 60 से 90 mg/dL
लक्षण और पहचान के तरीके
जेस्टेशनल डायबिटीज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते। कुछ महिलाओं में बार-बार प्यास लगना या सामान्य से ज्यादा पेशाब आना जैसे संकेत मिल सकते हैं।
इसकी सटीक जानकारी के लिए समय पर ब्लड शुगर टेस्ट और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c) टेस्ट कराया जाता है। HbA1c टेस्ट से पिछले 2 से 3 महीनों का औसतन शुगर लेवल पता चलता है।
किन महिलाओं में होता है ज्यादा खतरा?
- वजन ज्यादा होना या ओबेसिटी की समस्या
- शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना
- प्रीडायबिटीज की शिकायत होना
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की स्थिति
- परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीज होना
- पिछली डिलीवरी में 4 किलो (9 पाउंड) से ज्यादा वजन के बच्चे का जन्म
खानपान में रखें इन बातों का ध्यान
शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के लिए डाइट में बदलाव सबसे पहला और प्रभावी कदम है:
क्या खाएं: ताजा फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फलियां। आहार में हल्का कड़वा, कसैला और प्राकृतिक स्वाद वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें।
किनसे परहेज करें: रिफाइंड चीनी, पैकेट बंद प्रोसेस फूड, ज्यादा तैलीय, भारी और मीठे व्यंजनों से पूरी तरह दूरी बनाएं।
लाइफस्टाइल में करें ये जरूरी सुधार
खानपान के साथ-साथ सही दिनचर्या भी शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है। रोज सुबह या शाम हल्की वॉक (टहलना), डॉक्टर की सलाह से योग और हल्की स्ट्रेचिंग करें।
तनाव दूर करने के लिए प्राणायाम और ध्यान की मदद लें। इसके अलावा, रोजाना 7 से 8 घंटे की भरपूर नींद और आराम शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखने में मददगार साबित होता है।
यदि डाइट और लाइफस्टाइल से शुगर नियंत्रित न हो, तो डॉक्टर की सलाह पर इंसुलिन थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। नियमित जांच कराते रहें और अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें।