बेरोजगारों के साथ ये कैसा छल...:नौकरी के लिए दो बड़ी परीक्षाएं, दोनों की परीक्षा तिथि एक
रायपुर32 मिनट पहलेलेखक: राकेश पाण्डेय
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छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को भर्ती एजेंसियों के आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। राज्य में दो बड़ी भर्ती परीक्षाएं एक ही दिन आयोजित होने से हजारों छात्रों के सामने एक परीक्षा छोड़ने की नौबत आ गई है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन बोर्ड ने 1654 शिक्षक पदों के लिए 25 अक्टूबर को परीक्षा तय की है। वहीं, सीजीपीएससी ने सूबेदार, सब-इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर भर्ती की मुख्य परीक्षा 24, 25 और 26 अक्टूबर को आयोजित करने का निर्णय लिया है।
इस टकराव के कारण पुलिस भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए 7,301 अभ्यर्थियों के सामने 25 अक्टूबर को शिक्षक भर्ती परीक्षा से वंचित होने का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश के हजारों उम्मीदवार अब इस धर्मसंकट में हैं कि वे किस परीक्षा में शामिल हों और किसे छोड़ें।
आईबीपीएस और सीजी सेट की परीक्षा भी एक ही दिन छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन बोर्ड (सीजी एसएसबी) द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता के लिए आयोजित होने वाली छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (सीजी सेट) और बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान द्वारा आयोजित आईबीपीएस पीओ मेंस परीक्षा दोनों की तारीख एक ही है। दोनों परीक्षाएं 4 अक्टूबर को प्रस्तावित हैं। यह पहली बार नहीं है जब प्रदेश के छात्र इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं।
प्रभाव : सीजी सेट जहां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए अनिवार्य है, वहीं आईबीपीएस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ऑफिसर बनने का प्रमुख माध्यम है। इन दोनों परीक्षाओं के टकराने से बैंकिंग और शैक्षणिक दोनों क्षेत्रों की तैयारी करने वाले छात्र प्रभावित हो रहे हैं।
छात्रों की मांग: अभ्यर्थियों ने मांग की है कि भर्ती एजेंसियां आपस में समन्वय कर परीक्षाओं की तिथियों को आगे-पीछे करें ताकि किसी भी पात्र युवा को परीक्षा से वंचित न होना पड़े।

प्रतिभागियों का दर्द: धमतरी जिले के नंद किशोर सोम का कहना है कि पुलिस भर्ती की मुख्य परीक्षा है। सालों बाद शिक्षक परीक्षा हो रही है। दोनों में से किसी एक को अब छोड़ना पड़ेगा। वहीं, बालोद जिले की चित्रलेखा का कहना है कि यह छात्रों के साथ ज्यादती है।
एक तो सरकारी नौकरियों की वेकेंसी कम निकलती है। ऊपर से अब किसी एक को चुनने की मजबूरी है। बलौदा बाजार की दीपाली चंद्राकर, बबिता साहू, मनीषा और रायपुर की छाया ठाकुर जैसी छात्राओं के सामने भी अब इसी तरह की चुनौती है।
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