Sawan Kamika Ekadashi : सावन की कामिका एकादशी कब है? जानें सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और पारण का समय

Published on 7 अग॰ 2026

सावन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी का व्रत इस साल 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। उदया तिथि के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना के कई शुभ योग बन रहे हैं।

Sawan Kamika Ekadashi : सावन का महीना केवल भगवान शिव की भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय भगवान विष्णु की साधना के लिए भी बेहद उत्तम माना जाता है।

सावन के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को ‘कामिका एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे नियम-संयम के साथ व्रत रखने से जीवन के अनजाने में हुए पाप मिटते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

आइए जानते हैं कि इस साल कामिका एकादशी की सही तिथि क्या है, पूजा के लिए कौन से मुहूर्त सबसे अच्छे रहेंगे और व्रत खोलने का सही समय क्या है।

कामिका एकादशी 2026: तिथि और शुभ समय

पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को देर रात 1:59 बजे से हो रही है। इस तिथि का समापन 9 अगस्त 2026 को सुबह 11:04 बजे होगा।

सनातन परंपरा में व्रत-त्योहार हमेशा उदया तिथि (सूर्य उदय के समय रहने वाली तिथि) के आधार पर माने जाते हैं।

चूंकि 9 अगस्त को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहेगी, इसलिए कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को ही रखा जाएगा।

दिनभर के शुभ मुहूर्त (9 अगस्त 2026)

अगर आप इस दिन विशेष पूजा, जप या दान करना चाहते हैं, तो इन शुभ समय का ध्यान रखें:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 से सुबह 4:45 तक
  • अमृत काल: सुबह 6:42 से सुबह 8:09 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:37 से दोपहर 12:30 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:15 से दोपहर 3:07 तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:38 से शाम 7:00 तक

व्रत पारण का सही समय

एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसका पारण यानी व्रत खोलना सही समय पर द्वादशी तिथि के भीतर किया जाए।

  • पारण की तारीख: 10 अगस्त 2026 (सोमवार)
  • पारण का समय: सुबह 6:05 बजे से सुबह 8:39 बजे तक

पारण करने से पहले श्रीहरि विष्णु का ध्यान करें, उनका प्रसाद ग्रहण करें और इसके बाद ही सामान्य भोजन लें।

सरल पूजा विधि और जरूरी नियम

सुबह का संकल्प: व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

तुलसी दल का प्रयोग: पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें। तुलसी जी श्रीहरि को अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उनके बिना एकादशी की पूजा अधूरी मानी जाती है।

भोग और आरती: विष्णु जी को फल, मिष्ठान, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ या आरती करें।

सात्विकता का ध्यान: दशमी तिथि की रात से ही सात्विक जीवन शैली अपनाएं। क्रोध, झूठ बोलने और दूसरों की निंदा करने से बचें।

दान का महत्व

कामिका एकादशी के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराएं या अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। सावन के महीने में किया गया यह दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।