
राहुल गांधी, संसद और रिजिजू.
संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को भी गतिरोध नहीं टूटा. लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और संसद मार्च के दौरान युवाओं और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग दोहराई. इस बीच, सूत्रों का कहना है कि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से फोन पर बातचीत की. बातचीत का मुख्य मुद्दा परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण विधेयक रहा.
रिजिजू ने राहुल गांधी से कहा कि परिसीमन का समर्थन मिलने से महिला आरक्षण विधेयक लागू करने का रास्ता आसान होगा. उन्होंने यह भी कहा कि यदि महिला आरक्षण लागू नहीं हुआ तो महिला समाज में नाराजगी बढ़ सकती है. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि वह पहले कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे.
राहुल गांधी ने कहा कि इस विषय पर ऑल पार्टी मीटिंग में भी विस्तार से चर्चा होगी. सहयोगी दलों से बातचीत के बाद कांग्रेस सरकार को अपना रुख बताएगी.
मानसून सत्र गुरुवार को भी हंगामे की भेंट चढ़ गया
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए. हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विपक्ष का आचरण उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि देश सरकार का जवाब सुनना चाहता है, लेकिन विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है.
उधर, राज्यसभा में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए. नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली.
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान विपक्ष ने खरगे को बोलने देने की मांग को लेकर नारेबाजी की. सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खरगे को बोलने की अनुमति दी, लेकिन सत्ता पक्ष के विरोध के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि एक ही मुद्दे पर बार-बार चर्चा नहीं हो सकती और कांग्रेस अपने नए सांसदों को बोलने का अवसर भी नहीं दे रही है.
सियासी टकराव के बीच सीपी राधाकृष्णन का अहम संदेश
इसी सियासी टकराव के बीच राज्यसभा से एक अहम संदेश भी सामने आया. सभापति सीपी राधाकृष्णन ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा कि वे विपक्ष की भावनाओं और उनकी मांगों से गृह मंत्री अमित शाह को अवगत कराएं, ताकि सदन का गतिरोध खत्म करने की दिशा में संवाद आगे बढ़ सके.
दरअसल पूरे गतिरोध की जड़ संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई है. INDIA ब्लॉक का आरोप है कि सीजेपी के साथ आए युवाओं और छात्रों पर लाठीचार्ज और पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया. विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर पूरे घटनाक्रम पर बयान दें.
इसी मुद्दे को सुलझाने के लिए बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी.
सूत्रों के मुताबिक सरकार चाहती है कि FCRA संशोधन विधेयक समेत सभी महत्वपूर्ण विधेयकों पर सदन में तथ्यों के साथ चर्चा हो और उन्हें हंगामे के बजाय संसदीय प्रक्रिया के तहत पारित कराया जाए, लेकिन विपक्ष गृह मंत्री के बयान की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है. यही वजह है कि संसद का गतिरोध अब भी बरकरार है.
संसद के मकर द्वार पर विपक्ष का संयुक्त प्रदर्शन
इससे पहले सुबह भारी बारिश के बीच संसद के मकर द्वार पर विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रदर्शन किया. तस्वीर विपक्षी एकजुटता की थी, लेकिन मुद्दे अलग-अलग थे. कांग्रेस गृह मंत्री के बयान की मांग कर रही थी, जबकि समाजवादी पार्टी चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विरोध जता रही थी. मुद्दे अलग थे, लेकिन सरकार को घेरने की रणनीति एक थी.
दूसरी तरफ सरकार की कोशिश संसद की कार्यवाही सामान्य कर FCRA संशोधन विधेयक समेत लंबित विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने की है. हालांकि सभापति की पहल, सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत और बैक-चैनल प्रयासों के बावजूद गुरुवार को भी संसद का गतिरोध नहीं टूटा. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में सहमति बनेगी या मानसून सत्र का यह सियासी घमासान यूं ही जारी रहेगा.
ये भी पढ़ें- परिसीमन से महिला आरक्षण तक राहुल का रिजिजू को अल्टीमेटम, विशेष सत्र को लेकर सरकार और विपक्ष में घमासान

Amod Rai
21 सालों से राजनीतिक, सामाजिक और पॉलिसी संबंधित विषयों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव। लगातार 2 दशक से बीजेपी, संघ परिवार, संसद और केंद्र सरकार की खबरों पर विशेष निगाह
Read More