कौन हैं टीम इंडिया के नए फील्डिंग कोच शुभदीप घोष? गौतम गंभीर के साथ है पुराना कनेक्शन
Published: Tuesday, August 4, 2026, 15:35 [IST]
Shubhdeep Ghosh: श्रीलंका दौरे से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बीसीसीआई ने फील्डिंग विभाग की जिम्मेदारी ऐसे कोच को सौंपी है, जिसने पिछले कई वर्षों में घरेलू क्रिकेट, आईपीएल, महिला क्रिकेट और जूनियर स्तर पर लगातार अपनी छाप छोड़ी है।
टीम इंडिया के नए फील्डिंग कोच के तौर पर अब शुभदीप घोष खिलाड़ियों के साथ नजर आएंगे। उनकी पहली 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज होगी। शुभदीप घोष ने टी दिलीप को रिपेल्स किया है, जो 5 वर्ष तक टीम के फील्डिंग कोच रहे थे।
पहले भी रहे हैं गौतम गंभीर के साथ
दिलचस्प बात यह है कि गौतम गंभीर और शुभदीप घोष की पेशेवर साझेदारी कोई नई नहीं है। दोनों इससे पहले भी एक साथ काम कर चुके हैं। साल 2014 में जब गौतम गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल ट्रॉफी जीती थी, तब घोष भी फ्रेंचाइजी के सपोर्ट स्टाफ का अहम हिस्सा थे। करीब एक दशक बाद दोनों फिर भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में साथ दिखाई देंगे।
हालांकि शुभदीप घोष की पहचान सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं रही। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के सबसे अहम ट्रेनिंग सेंटर, नेशनल क्रिकेट अकादमी में भी लंबा समय बिताया। यहां राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों के साथ काम करते हुए उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों की फील्डिंग और फिटनेस पर काम किया। भारतीय क्रिकेट की नई पीढ़ी को तैयार करने में उनका योगदान काफी अहम माना जाता है।
महिला टीम के साथ किया काम
साल 2021 में उन्हें भारतीय महिला टीम का फील्डिंग कोच बनाया गया। उनके कार्यकाल में टीम की फील्डिंग को बेहतर बनाने के लिए कई नए अभ्यास कार्यक्रम शुरू किए गए। हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना और अन्य खिलाड़ियों के साथ उन्होंने लगातार काम किया। इसके अलावा 2023 एशियन गेम्स में भी वह भारतीय महिला टीम के सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा रहे।
कैसा रहा है शुभदीप का करियर
अगर उनके क्रिकेट करियर की बात करें तो घोष ने असम के हैं, तो वहां की टीम का प्रतिनिधित्व किया, इसके अलावा रेलवे के लिए खेलने का मौका भी उनको मिला। 1994 से 2005 के बीच उन्होंने 17 फर्स्ट क्लास और 17 लिस्ट-ए मुकाबले खेले। कुल 623 रन बनाने के साथ उन्होंने चार अर्धशतक भी लगाए। हालांकि खिलाड़ी के तौर पर उनका करियर बहुत लंबा नहीं चला, लेकिन कोचिंग में उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली।