
पाकिस्तान में सियासी हलचल (Hamed Malekpour - ICANA News Agency via Getty Images)
पाकिस्तान में एक बार फिर सेना और सरकार के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इसकी वजह बना है गृह मंत्री मोहसिन नकवी का हालिया बयान, जिसमें उन्होंने देश की मौजूदा शासन व्यवस्था और नए प्रांतों की जरूरत का जिक्र किया था. इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या पाकिस्तान में प्रशासनिक बदलाव को लेकर सेना और सरकार के बीच अलग-अलग सोच है?
इसी विवाद के बीच सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि नए प्रांत बनाना या प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करना सेना का नहीं, बल्कि जनता और उनके निर्वाचित राजनीतिक नेतृत्व का अधिकार है. उन्होंने कहा कि ऐसे सभी फैसले संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही लिए जाने चाहिए.
टिप्पणी करने से किया इनकार
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों ने गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान पर सवाल पूछा. इस पर डीजी आईएसपीआर ने कहा कि गृह मंत्री ने अपनी व्यक्तिगत राय रखी है और वह उस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि पाकिस्तान के सामने मौजूद कई समस्याओं का समाधान बेहतर सुशासन और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था में छिपा है. उनके मुताबिक, समय के साथ जनसंख्या, तकनीक और देश की जरूरतें बदलती हैं, इसलिए शासन व्यवस्था में सुधार पर चर्चा होना स्वाभाविक है.
क्या था मोहसिन नकवी का बयान?
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा था कि मौजूदा व्यवस्था देश की समस्याओं को हल करने में असमर्थ है और चेतावनी दी कि संरचनात्मक सुधारों के बिना पाकिस्तान को अगले दशक में भी इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘जिस व्यवस्था के तहत हम जी रहे हैं, वह ध्वस्त हो चुकी है। इसके जरिए समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। अगर यह व्यवस्था जारी रही, तो 10 साल बाद भी हम यहीं बैठकर इन्हीं मुद्दों पर चर्चा कर रहे होंगे।’
जनता की इच्छा सबसे ऊपर
लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान में किसी भी प्रशासनिक सुधार या नए प्रांत बनाने जैसे फैसले जनता की इच्छा और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से ही होने चाहिए. उन्होंने दोहराया कि देश के सभी राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों का समाधान संविधान, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ही किया जाना चाहिए.
बेहतर शासन की जरूरत पर दिया जोर
डीजी आईएसपीआर ने कहा कि सुशासन पाकिस्तान के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है. उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था कभी स्थिर नहीं रहती, क्योंकि बदलती जनसंख्या, नई तकनीक और समय की जरूरतों के हिसाब से प्रशासनिक ढांचे में सुधार जरूरी होता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 1972 में पाकिस्तान की आबादी करीब 4 से 5 करोड़ थी और देश में केवल चार प्रांत थे, जबकि आज आबादी कई गुना बढ़ चुकी है. ऐसे में यह चर्चा जरूरी है कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचा आज की जरूरतों को पूरा कर पा रहा है या नहीं.
राष्ट्रीय कार्य योजना का भी जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्य योजना के 14 बिंदुओं पर सरकार और विपक्ष सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति है. आतंकवाद के खिलाफ अभियान, मदरसों से जुड़े सुधार और अफगान शरणार्थियों की वापसी जैसे मुद्दों को भी उन्होंने बेहतर प्रशासन और सुशासन का हिस्सा बताया.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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