'जहाजों पर हमले स्वीकार्य नहीं', एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से की बात, दी सख्त चेतावनी

Published on 31 जुल॰ 2026

'जहाजों पर हमले स्वीकार्य नहीं', एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से की बात, दी सख्त चेतावनी

Time Updated: Friday, July 31, 2026, 20:53 [IST]

S. Jaishankar Abbas Araghchi Talk: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार शाम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर चर्चा हुई। जयशंकर ने साफ कहा कि भारत को मौजूदा संघर्ष को लेकर गहरी चिंता है।

उन्होंने विशेष रूप से व्यापारिक जहाजों और समुद्री नाविकों पर किसी भी तरह के हमले से बचने की अपील की। भारत ने दोहराया कि वह किसी भी पक्ष की ओर से नागरिक जहाजों पर हमले की निंदा करता है और विवादों के समाधान के लिए संवाद व कूटनीति का समर्थन करता है।

S Jaishankar Abbas Araghchi talk

समुद्री जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर भारत का जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी समकक्ष से बातचीत में कहा कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में व्यापारिक जहाजों और उन पर काम कर रहे नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि नागरिक जहाजों पर हमला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर खतरा है। भारत ने ऐसे किसी भी हमले की, चाहे वह किसी भी पक्ष द्वारा किया जाए, कड़ी निंदा की।

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ईरान ने रखा अपना पक्ष, क्षेत्रीय हालात पर हुई चर्चा

बातचीत के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मौजूदा घटनाक्रम को लेकर अपने देश का पक्ष भी भारत के सामने रखा। उन्होंने क्षेत्र में जारी हालात और कूटनीतिक स्तर पर चल रही चर्चाओं की जानकारी साझा की। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और संभावित समाधान पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारत ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से सुना और दोहराया कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी देशों के हित में है।

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संवाद और कूटनीति को ही समाधान मानता है भारत

भारत ने एक बार फिर अपनी पारंपरिक विदेश नीति दोहराते हुए कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा संवाद, शांति और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। भारत की यह भी कोशिश है कि क्षेत्रीय तनाव का असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर न पड़े। ऐसे समय में भारत संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाने पर जोर दे रहा है।