अगस्त में बन रहा है दुर्लभ महासंयोग, सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक साथ, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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Written By:
सीमा कुमारी
Updated On: Jul 31, 2026 | 08:38 PM IST
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सार
Sawan Somwar 2026 : अगस्त 2026 में सावन सोमवार और प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जानिए पूजा विधि, शुभ समय और इस महासंयोग का महत्व।

सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक साथ (सौ.AI)
विस्तार
Sawan Somwar Pradosh Vrat Benefits : सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 को सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन सोमवार व्रत और प्रदोष व्रत का महासंयोग बन रहा है। जिस वजह से इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
बताया जाता है कि, सावन महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का महत्व बहुत अधिक होता है, क्योंकि यह मास भगवान शिव को समर्पित है और प्रदोष व्रत सीधे महादेव की कृपा पाने का उत्तम अवसर है। इस दिन त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में शिव आराधना करने से विशेष पुण्य मिलता है।
सावन 2026 में पहला प्रदोष व्रत कब है?
सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त को सुबह में 08:00 सुबह से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 54 मिनट पर होगा। ऐसे में सावन का पहला प्रदोष व्रत या सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को है।
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सोम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त
सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 07 बजकर 05 मिनट से है और यह रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी होता है।
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सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा कैसे करें?
धार्मिक एवं लोक मान्यताओं के अनुसार, सोम प्रदोष व्रत के दिन सुबह और शाम (प्रदोष काल) दोनों समय पूजा करना शुभ माना जाता है।
सुबह की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त से पहले आप उठ जाएं। स्नान आदि कार्य करने के बाद नीले, हरे या सफेद रंग के कपड़े पहनें।
फिर घर के मंदिर में स्थापित शिव जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। व्रत का संकल्प लेने के बाद महादेव को फल, फूल, अक्षत, जल, वस्त्र और मिठाई अर्पित करें। इस दौरान निरंतर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें।
व्रत की कथा और शिव चालीसा पढ़ें। आरती करने के बाद सुबह की पूजा का समापन करें। शाम में इसी विधि से फिर से शिव जी की पूजा करें। पूजा करने के बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं।
