कौन हैं विधायक मनप्रीत सिंह, वांटेड सांसद को जेल से छुड़ाने गुंडों की तरह कुल्हाड़ी-तलवारें लेकर पहुंचे

Published on 30 जुल॰ 2026

पंजाब में लुधियाना के दाखा हलके से 'वारिस पंजाब दे' के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली चर्चा में आ गए हैं। जो अपनी पार्टी के मोस्ट वांटेड सांसद को जेल से छुडवाने के लिए की मांग करने के लिए समर्थकों के साथ तलवारें-कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे।

अमृतसर : चंडीगढ़ पुलिस ने विधायक मनप्रीत सिंह अयाली और 'वारिस पंजाब दे' के 15 अन्य नेताओं और सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह मामला 29 जुलाई को गौशाला चौक के पास हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस की शिकायत के मुताबिक, 'वारिस पंजाब दे' के करीब 2,500 से 3,000 समर्थक पार्टी के कई बड़े नेताओं की अगुवाई में गौशाला चौक पर इकट्ठा हुए थे। आरोप है कि उन्होंने सड़क जाम कर दी, जिससे गाड़ियों की आवाजाही में भारी रुकावट आई और आम लोगों को काफी परेशानी हुई।

तलवारें, कुल्हाड़ियां लेकर कर रहे थे अमृतपाल की रिहाई की मांग

  • बताया जा रहा है कि पंजाब के खडूर साहिब से खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल की रिहाई के लिए प्रदर्शनकारी अमृतपाल सिंह के पोस्टर लिए हुए थे और उसकी व अन्य सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। पुलिस का कहना कि प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने से इनकार कर दिया और उनके नेताओं ने उन्हें पुलिस बैरिकेड तोड़ने और आगे बढ़ने के लिए उकसाया।
  • पुलिस ने आरोप लगाया कि कई प्रदर्शनकारियों ने, जिनके पास तलवारें, कुल्हाड़ियां, लाठियां और दूसरे धारदार हथियार थे, मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया, बैरिकेड तोड़ दिए और जबरन शहर में घुसने की कोशिश की। बार-बार चेतावनी देने के बाद, पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट से इजाजत लेकर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और पानी की बौछारों (वाटर कैनन) का इस्तेमाल किया।

कौन हैं विधायक मनप्रीत सिंह?

मनप्रीत सिंह अयाली लुधियाना के दाखा हलके से विधायक हैं। इससे पहले अयाली अकाली शिरोमणि दल से जुड़े हुए थे। बाद में अपने कार्यकर्ताओं के साथ वारिस पंजाब में शामिल हो गए। मनप्रीत के पिता गुरचरणजीत सिंह भी पंजाब के सीनियर नेता रह चुके हैं। 6 जनवरी 1375 को जन्मे मनप्रीत सिंह अयाली कृषि समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह 2007 में वे लुधियाना जिला परिषद के अध्यक्ष भी बने। मनप्रीत पहली बार 2012 में विधायक बने थे। हालांकि दूसरी बार साल 2017 में चुनाव हार गए थे, लेकिन 2019 में विधायक एचएस फुल्का के इस्तीफे के बाद उपचुनाव में वे फिर विधायक बन गए। फिर पांच साल बाद 2022 में उन्होंने दाखा विधानसभा से चुनाव जीता।

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