PoK में चुनाव के बाद अब प्रधानमंत्री पर बवाल, चुनाव हारने वाले नेता को नवाज शरीफ ने दी कुर्सी

Published on 28 अग॰ 2026

PoK में चुनाव के बाद अब प्रधानमंत्री पर बवाल, चुनाव हारने वाले नेता को नवाज शरीफ ने दी कुर्सी

नवाज शरीफ और इफ्तिखार गिलानी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आम चुनाव के बाद अब प्रधानमंत्री पद को लेकर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के भीतर ही घमासान शुरू हो गया है. चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने की स्थिति में आई PML-N ने यहां बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है. लेकिन गिलानी का नाम सामने आते ही पार्टी के भीतर असंतोष और सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं.

दरअसल विवाद की जड़ यह है कि इफ्तिखार गिलानी हालिया आम चुनाव में अपनी सीट हार गए थे. इससे पहले 2021 के चुनाव में भी वह जीत हासिल नहीं कर पाए थे. इसके बावजूद PML-N ने उन्हें तकनीकी विशेषज्ञों के लिए आरक्षित सीट से विधानसभा में पहुंचाया. अब पार्टी अध्यक्ष नवाज शरीफ ने उन्हीं गिलानी को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित कर दिया है.

चुनाव हारे, आरक्षित सीट से विधानसभा पहुंचे और अब PM पद के दावेदार

इफ्तिखार गिलानी का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने का रास्ता सीधे चुनाव से नहीं, बल्कि आरक्षित सीट से होकर आया है. यही बात अब पार्टी के भीतर उनके विरोध की सबसे बड़ी वजह बन रही है. सवाल उठ रहा है कि जिस नेता को जनता ने सीधे चुनाव में नकार दिया, उसे प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है?

हालांकि, आरक्षित सीट से विधानसभा में पहुंचा कोई व्यक्ति पहली बार प्रधानमंत्री पद का दावेदार नहीं बना है. इससे पहले मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के नेता सरदार अब्दुल कय्यूम खान ने मौलवियों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित सीट जीतने के बाद 1991 से 1996 तक PoK के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया था.

शाह गुलाम कादिर का नाम भी था रेस में

गिलानी के नाम पर विवाद इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि प्रधानमंत्री पद के लिए PML-N के PoK अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर का नाम भी मजबूती से चर्चा में था.बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में इफ्तिखार गिलानी और शाह गुलाम कादिर के नामों पर चर्चा हुई थी. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, उस समय तय किया गया था कि दोनों में से किसी एक को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा और अंतिम नाम तय करने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष नवाज शरीफ को दिया गया था.

क्या नवाज शरीफ ने गिलानी के नाम पर मुहर लगा दी?

पार्टी के भीतर कुछ नेताओं का आरोप है कि नवाज शरीफ ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए गिलानी को तरजीह दी, जबकि शाह गुलाम कादिर को उम्मीद थी कि उन्हें प्रधानमंत्री पद दिया जाएगा.PML-N के भीतर असंतोष सिर्फ शाह गुलाम कादिर तक सीमित नहीं बताया जा रहा है. पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर भी इस फैसले से नाराज हैं.

सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल

गिलानी के नामांकन को लेकर सोशल मीडिया पर भी PML-N की आलोचना हो रही है. पत्रकार मुहम्मद असद चौधरी ने लिखा कि ऐसे समय में जब PoK में जोरदार आंदोलन चल रहा है, टेक्नोक्रेट की आरक्षित सीट पर बैठे इफ्तिखार गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना आग में घी डालने जैसा है.

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक आमिर महबूब के मुताबिक, पार्टी के भीतर नाराजगी के बावजूद PML-N की सरकार बनने पर फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है.PoK विधानसभा में PML-N के पास 32 सीटें हैं, जबकि प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए 27 वोटों की जरूरत है. ऐसे में अगर पार्टी के दो वरिष्ठ नेता भी मतदान से दूरी बनाते हैं, तब भी उसके पास बहुमत से अधिक संख्या बचती है.

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