अरबों का 'नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट', कैसे PoJK के लिए बन गया 'दोहन मशीन'?

Published on 5 अग॰ 2026

PoJK इलाके के पहाड़ों के बीच बना अरबों रुपये का बांध की दास्तान ऐसी है, कि इसे नीलम- झेलम नदियों की ताकत का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के नेशनल ग्रिड को लगभग एक हजार मेगावट बिजली देने के लिए बनाया था.

Written By : आशीष कुमार सिंह, एबीपी न्यूज़ |  Updated at : 05 Aug 2026 08:08 PM (IST)

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Ground Reality of Pakistan-occupied Jammu and Kashmir PoJK Neelum-Jhelum Hydropower Project अरबों का 'नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट', कैसे PoJK के लिए बन गया 'दोहन मशीन'?

नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पीओजेके के लिए एक दोहन का प्रोजेक्ट बनकर रह गया है.

PoJK Neelam-Jhelum Hydropower Project: ये कहानी उस बांध की है, जिससे जुड़ा प्रोजेक्ट पूरी तरह से बंद हो गया है. इस प्रोजेक्ट का नाम है, नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट. यह पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओजेके के हालात को पूरी तरह बयां करता है. कब्जे वाले इलाके के पहाड़ों के बीच बना अरबों रुपये का बांध की दास्तान ऐसी है, कि इसे नीलम और झेलम नदियों की ताकत का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के नेशनल ग्रिड को लगभग एक हजार मेगावट बिजली देने के लिए बनाया गया था. इसे तरक्की का एक बेहतरीन नमूना करार दिया था. लेकिन आज हालात पूरी तरह पलट गए हैं.  

भारत सरकार के पास मौजूद रिकॉर्ड की मानें तो कब्जे वाले इलाके की राजधानी मुजफ्फराबाद के लोग बिजली जैसी मूल जरूरत की समस्या से जूझ रहे हैं. लगातार बिजली कटौती ने हालात बेहद ही निम्न स्तर पर पहुंचा दिए हैं. वो भी ऐसे इलाके में जहां, यह अरबों का प्रोजेक्ट मौजूद है. कुछ साल पहले इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था. लेकिन तकनीकि खराबी का हवाला देते हुए बंद कर दिया गया. स्थानीय व्यापारियों ने अब इस मामले में जांच की मांग करते हुए बिजली कटौती की समस्या को सुलझाने की मांग की है. साथ ही प्रशासन पर इन स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप मढ़े हैं. 

प्रशासन पर गंभीर आरोप, दोहन का शिकार हो रहे PoJK के लोग

प्रशासन पर आरोप हैं, कि वह प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तो करता है, लेकिन अपने ही लोगों को बुनियादी सुविधाओं से मरहूम रखता है. कब्जे वाली इन इलाकों की नदियां उस इलाके की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसधान है. बांध बनाकर यहां से बिजली का उत्पादन किया जाता है. लेकिन यह बिजली घाटियों के घरों को रोशन करने के लिए नहीं दी जाती. इसे बाहर भेजा जाता है. ऐसे में इन इलाकों में जो थोड़ी बहुत बिजली पहुंचती है, उसके लिए महंगी दरों पर बिल लिया जाता है. यानी साफ है कि इस इलाके के प्राकृतिक संसाधन का दोहन करके, इस ही इलाके को मूल जरूरत से परे रखा जाता है. 

अब यह पैटर्न सिर्फ एक बांध तक नहीं है. यहां की राजनीतिक पार्टी यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी ने महीनों से चल रही बिजली कटौती, कम वोल्टेज और पूरे इलाके में बार बार इंटरनेट और मोबाइल सर्विस बंद होने की निंदा की है. यहां के लोग जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी के बैनर तले ढाई साल से ज्यादा समय से अपनी बुनियादी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं. लगातार ढाई साल से इसे लेकर विरोध किया जा रहा है. यह एक तरह से इस इलाके दोहन किया जा रहा है. 

LOC के पार हालात बिल्कुल उलट, पहुंच रहा स्थानीय लोगों को फायदा

इधर, एलओसी पार करते ही बिजली का तर्क बिल्कुल उलट जाता है. जम्मू-कश्मीर में हाइड्रोइलेक्ट्रिक की बहुत बड़ी क्षमता है. इसके विकास को सिर्फ वहां के संसाधन निकालने के बजाय पूरे इलाके के लिए संसाधन के तौर पर देखा गया है. नेशनल प्रोग्राम के जरिए ग्रिड का विस्तार किया गया है. ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचने लगी है. नए बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन प्रोजेक्टस बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा पहुंच रहा है. फर्क यह नहीं है कि एक तरफ नदियां हैं, दूसरी तरफ नहीं. दोनों ही जगह नदियां हैं. बस बात इतनी है कि इन नदियों का फायदा स्थानीय लोगों तक कैसे पहुंचाया जाता है. 

Published at : 05 Aug 2026 08:08 PM (IST)

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