PMPML पर आर्थिक संकट गहराया: 1,610 करोड़ खर्च के मुकाबले सिर्फ 818 करोड़ आय, 300 करोड़ की बकाएदारी| Navbharat Live

Published on 26 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 26, 2026 | 01:51 PM IST

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सार

Pune Public Bus Service: पुणे की जीवनदायिनी पीएमपीएमएल भारी आर्थिक संकट में है। 300 करोड़ रुपये का बकाया और आमदनी से दोगुना खर्च होने से बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

Pune's PMPML faces a severe financial crisis with ₹300 crore in pending dues and expenses doubling its income, threatening city's bus services.

पुणे बस सांकेतिक (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)

विस्तार

PMPML Financial Crisis Pune Public Bus Service: पुणेवासियों की जीवनदायिनी मानी जाने वाली पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड यानी पीएमपीएमएल इस समय बेहद गंभीर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही है। महामंडल का कुल खर्च उसकी कुल कमाई से लगभग दोगुना हो चुका है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पीएमपीएमएल पर करीब तीन सौ करोड़ रुपये की बकाएदारी की तलवार लटक रही है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह महत्वपूर्ण बस सेवा पूरी तरह से अब उधारी के भरोसे चलाई जा रही है।

वार्षिक खर्च और आय में भारी अंतर

ठेकेदारों के भुगतान, ईंधन बिल और अन्य परिचालन खचों को मिलाकर पीएमपीएमएल का वार्षिक खर्च 1610 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले महामंडल को महज 818 करोड़ रुपये की इनकम प्राप्त हुई है। हालांकि, प्रशासन द्वारा खर्च में कटौती और परिचालन में सुधार के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में बसों का परिचालन 11.67 करोड़ किलोमीटर था, जो अब बढ़कर 12.88 करोड़ किलोमीटर हो गया है। इस मामूली सुधार के कारण महामंडल का परिचालन घाटा कुछ हद तक कम हुआ है।

वेतन और किराए पर भारी भरकम बोझ

आंकड़ों के अनुसार, पीएमपीएमएल का सबसे बड़ा वितीय बोझ उसके कर्मचारियों का वेतन और किराए पर ली गई बसें हैं। कर्मचारियों के वेतन पर ही 790 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहे है, जो पुणे महामंडल की कुल यात्री आय से भी ज्यादा है। इसके अतिरिक्त, किराए की बसों का भुगतान करने के लिए 619.71 करोड़ रुपये से अधिक और ईंधन के लिए 108.79 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। लगातार बढ़ रहे इन खचों के कारण महामंडल की वित्तीय स्थिति दिनोंदिन और अधिक चिंताजनक होती जा रही है।

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भुगतान अटकने से सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

मार्च से जुलाई के बीच निजी ठेकेदारों के 129 करोड़ रुपये और गैस कंपनी के 63 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा, कर्मचारियों के ग्रेच्युटी और मेडिकल बिलों के भी करोड़ों रुपये अटके पड़े हैं। ठेकेदारों ने भुगतान के लिए पत्र भेज दिया है। यदि समय पर इस बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो भविष्य में पुणे शहर की सार्वजनिक बस सेवा बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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