उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी के साथ हुई हिंसा को बताया लोकतंत्र क्र लियर खतरनाक, उठाई धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग| Navbharat Live

Published on 22 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 22, 2026 | 04:31 PM IST

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सार

Uddhav Thackeray Press Conference Delhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को हिरासत में लेने और छात्रों के आंदोलन पर पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार को घेरा।

Uddhav Thackeray On Rahul Gandhi Protest

राहुल गांधी के साथ पुलिस के रवैये को लेकर भड़के उद्धव ठाकरे (फोटो क्रेडिट-X)

विस्तार

Uddhav Thackeray On Rahul Gandhi Protest: देश की राजधानी दिल्ली में नीट (NEET) परीक्षा धांधली और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर जारी जन-आंदोलन के बीच राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में पहुंचे शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार (22 जुलाई) को दिल्ली में एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। राहुल गांधी को जिस तरह से हिरासत में लिया गया उस पर भी ठाकरे ने टिप्पणी की है।

उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) पहले दिन से ही छात्र नेता अभिजीत दीपके, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और आंदोलनकारी बच्चों की जायज मांगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

इनसे अच्छे तो अंग्रेज थे, राहुल गांधी के प्रदर्शन और दमनकारी नीतियों पर हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पीएम आवास के बाहर किए गए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद उन्हें हिरासत में लिए जाने के वक्त पुलिस के रवैये पर सवाल करते हुए उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “जिस बेरहमी के साथ सरकार इन छात्रों और विपक्षी नेताओं के साथ पेश आ रही है, वह प्रजातंत्र का लक्षण बिल्कुल नहीं है।”

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उद्धव ठाकरे ने सरकार के इस अड़ियल रुख की तुलना औपनिवेशिक दौर से करते हुए कहा, “अब तो आम जनता और बहुत सारे लोग यह तक कहने लगे हैं कि ‘इनसे अच्छे तो अंग्रेज थे’। इसका सीधा मतलब यह है कि सत्ता में बैठे लोगों के दिमाग में घमंड की हवा भर गई है, और इस हवा को निकालने में देश की जनता को ज्यादा वक्त नहीं लगता।”

इंदिरा गांधी और अन्ना आंदोलन का दिया उदाहरण

पूर्व मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि जब भी देश में कोई बड़ा आंदोलन होता है, तो सरकार का नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह प्रदर्शनकारियों से बात करे और उनकी गलतफहमियां दूर करे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पहले ही दिन छात्रों और विशेषज्ञों से बात कर लेती, तो आज सड़कों पर यह नौबत नहीं आती।

ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “जब सोनम वांगचुक के पिता ने अनशन किया था, तब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद जाकर उनसे मुलाकात की थी। अन्ना हजारे के अनशन के समय कांग्रेस सरकार ने अपने मंत्रियों को बातचीत के लिए भेजा था। लेकिन आज की सरकार केवल अपने ‘मन की बात’ सुनाना जानती है और ‘जन की बात’ सुनने को तैयार नहीं है, जिसे स्पष्ट रूप से तानाशाही ही कहा जाएगा।”

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर समर्थन; “देश का भविष्य एक मंत्री से बड़ा”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों का खुलकर बचाव करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं की यह मांग पूरी तरह से जायज है। उन्होंने कहा, “अगर देश के बच्चे अपने बर्बाद होते करियर को देखकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है?”

उन्होंने केंद्र सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि आज देश के सामने सीधा विकल्प है, सरकार को किसी एक व्यक्ति (मंत्री) के राजनीतिक बचाव और पूरे देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य में से किसी एक को चुनना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों के हित में कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन देशव्यापी जन-आक्रोश का रूप ले लेगा।

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